Lok Sabha uproar PM Modi address postponed opposition female MPs protest near treasury benches Manoj Tiwari Rahul Gandhi reaction

नेशनल डेस्क, Taj News | Published by: ठाकुर पवन सिंह | Updated: Wednesday, 04 Feb 2026 09:15 PM IST

नई दिल्ली (New Delhi): लोकतंत्र के मंदिर यानी संसद भवन में बुधवार का दिन संसदीय इतिहास के पन्नों में एक और नाटकीय और शोरगुल भरे अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में जो दृश्य देखने को मिला, उसने न केवल सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच की खाई को और गहरा कर दिया, बल्कि संसदीय मर्यादाओं पर भी कई सवाल खड़े कर दिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) का राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब, जिसका पूरा देश और राजनीतिक गलियारे बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, वह भारी हंगामे और विरोध प्रदर्शन की भेंट चढ़ गया। दिनभर चले गतिरोध, आरोप-प्रत्यारोप और बार-बार के स्थगन के बाद शाम को स्थिति तब और विस्फोटक हो गई जब विपक्ष की महिला सांसद हाथों में बैनर लेकर सत्ता पक्ष की ‘ट्रेजरी बेंच’ (Treasury Benches) के बेहद करीब पहुंच गईं। इसे भाजपा ने एक “सुनियोजित साजिश” करार दिया है, जबकि विपक्ष ने इसे अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और विरोध का तरीका बताया है।

Lok Sabha uproar PM Modi address postponed opposition female MPs protest near treasury benches Manoj Tiwari Rahul Gandhi reaction
HIGHLIGHTS
  1. Lok Sabha Uproar: भारी हंगामे और विरोध के चलते टला पीएम मोदी का संबोधन; शाम 5 बजे सदन में हुआ हाई-वोल्टेज ड्रामा।
  2. भाजपा सांसद मनोज तिवारी का गंभीर आरोप- ‘सुनियोजित साजिश’ के तहत वर्षा गायकवाड़ और ज्योतिमणि समेत महिला सांसदों ने किया ट्रेजरी बेंच का घेराव।
  3. हाथों में ‘Do What Is Right’ के बैनर लेकर पीएम की सीट के करीब पहुंचीं विपक्षी सांसद, पीठासीन सभापति संध्या राय को स्थगित करनी पड़ी कार्यवाही।
  4. राहुल गांधी का सरकार पर तीखा हमला- ‘पीएम मोदी डरे हुए हैं, सच्चाई का सामना नहीं करना चाहते, इसलिए सदन में नहीं आए।’
  5. विवाद की जड़: पूर्व सेना प्रमुख की ‘अप्रकाशित किताब’, राहुल गांधी को बोलने से रोकने का आरोप और 8 सांसदों के निलंबन पर दिनभर मचा रहा घमासान।

शाम 5 बजे का वो ‘तनावपूर्ण’ मंजर

बुधवार की शाम जैसे ही घड़ी की सुइयां 5 पर पहुंचीं, लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। सत्ता पक्ष की ओर से उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब सदन में आएंगे और राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब देंगे। ट्रेजरी बेंच पर बैठे सांसद और मंत्री पीएम के स्वागत के लिए तैयार थे। दर्शक दीर्घा में भी उत्सुकता थी। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले कुछ ही पलों में सदन का माहौल इतना गरमा जाएगा।

भाजपा सांसद मनोज तिवारी (Manoj Tiwari) ने सदन के भीतर हुए उस घटनाक्रम का आंखों देखा हाल बयां किया, जिसने कार्यवाही को स्थगित करने पर मजबूर कर दिया। मनोज तिवारी ने बताया कि सदन शुरू होते ही विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। यह हंगामा सामान्य नारेबाजी तक सीमित नहीं था।

अचानक विपक्ष की कुछ महिला सांसद अपनी सीटों से उठीं और वेल (Well) में आने की बजाय सीधे सत्ता पक्ष की सीटों यानी ट्रेजरी बेंच की ओर बढ़ने लगीं। इनमें कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की सांसद शामिल थीं, जिनमें प्रमुख रूप से वर्षा गायकवाड़ (Varsha Gaikwad) और ज्योतिमणि (Jothimani) का नाम सामने आया है।

हाथों में बैनर और आंखों में आक्रोश

मनोज तिवारी के मुताबिक, इन महिला सांसदों के हाथों में बड़े-बड़े बैनर थे। इन बैनरों पर अंग्रेजी में मोटे अक्षरों में लिखा था—‘Do What Is Right’ (जो सही है वो करो)। आमतौर पर संसदीय परंपरा में विपक्षी सदस्य वेल में आकर नारेबाजी करते हैं, लेकिन ट्रेजरी बेंच के इतने करीब जाकर, जहां प्रधानमंत्री और वरिष्ठ मंत्री बैठते हैं, वहां जाकर बैनर लहराना एक गंभीर विषय माना जाता है।

मनोज तिवारी ने इस स्थिति को ‘डराने वाला’ बताया। उन्होंने कहा, “जिस आक्रामक तरीके से महिला सांसद प्रधानमंत्री की सीट के आसपास घेराव जैसी स्थिति बना रही थीं, वह सामान्य विरोध नहीं लग रहा था। यह एक पूर्व नियोजित (Pre-planned) कदम था। उनका उद्देश्य सिर्फ विरोध करना नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री को बोलने से रोकना और एक असहज स्थिति पैदा करना था।”

तिवारी ने आगे बताया कि स्थिति को बिगड़ता देख संसदीय कार्य मंत्री कंवल जीत सिंह ढिल्लों (Kanwal Jeet Singh Dhillon) ने तत्परता दिखाई। उन्होंने और अन्य मंत्रियों ने मानव श्रृंखला बनाकर स्थिति को संभालने की कोशिश की और महिला सांसदों को वहां से हट जाने का आग्रह किया। सत्ता पक्ष के सांसदों ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसके बाद सदन में शोरगुल इतना बढ़ गया कि पीठासीन सभापति के लिए कार्यवाही चलाना असंभव हो गया।

पीठासीन सभापति की बेबसी और स्थगन

उस समय लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) की कुर्सी पर पीठासीन सभापति संध्या राय (Sandhya Rai) बैठी थीं। उन्होंने लगातार विपक्षी सदस्यों से अपील की कि वे अपनी सीटों पर वापस जाएं और सदन की मर्यादा का पालन करें। उन्होंने कहा, “सदन चर्चा के लिए है, प्रधानमंत्री जी को जवाब देने दीजिए। पूरा देश उन्हें सुनना चाहता है।”

लेकिन विपक्ष सुनने के मूड में नहीं था। ट्रेजरी बेंच के पास जमावड़ा, लगातार नारेबाजी और बैनर लहराने की घटनाओं ने सदन को एक मछली बाजार में तब्दील कर दिया। जब काफी देर तक हंगामा नहीं थमा और महिला सांसद अपनी जगह से नहीं हटीं, तो पीठासीन सभापति ने विवश होकर सदन की कार्यवाही को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया। इसके साथ ही प्रधानमंत्री का संबोधन, जो बुधवार का सबसे अहम एजेंडा था, वह टल गया।

राहुल गांधी का तीखा हमला: ‘डर गए हैं मोदी’

सदन के भीतर जहां हंगामा बरपा था, वहीं सदन के बाहर भी सियासी पारा सातवें आसमान पर था। प्रधानमंत्री का संबोधन टलने के तुरंत बाद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने सोशल मीडिया और मीडिया के जरिए सरकार पर तीखा हमला बोला।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपना एक वीडियो संदेश जारी किया। वीडियो में राहुल गांधी काफी आक्रामक अंदाज में नजर आए। उन्होंने कहा, “मैंने पहले ही कहा था कि पीएम मोदी सदन में नहीं आएंगे। वे आज भी नहीं आए। इसका कारण साफ है—वे डरे हुए हैं। वे सच्चाई का सामना नहीं करना चाहते।”

राहुल गांधी ने अपनी बात को विस्तार देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के पास विपक्ष के सवालों का कोई जवाब नहीं है। उन्होंने कहा, “विपक्ष जनता की आवाज उठा रहा है, हम सवाल पूछ रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री जवाब देने की बजाय भाग रहे हैं। आज का घटनाक्रम यह साबित करता है कि सरकार विपक्ष का सामना करने की हिम्मत खो चुकी है।”

‘अप्रकाशित किताब’ का रहस्य और विवाद की जड़

सदन में हुए इस भारी हंगामे की जड़ें केवल बुधवार की घटनाओं में नहीं, बल्कि पिछले कुछ दिनों से चल रहे विवादों में छिपी हैं। राहुल गांधी ने अपने वीडियो में एक ‘किताब’ का जिक्र किया, जो दिनभर चर्चा का विषय बनी रही।

राहुल गांधी ने कहा, “अगर प्रधानमंत्री आज सदन में आते, तो मैं उन्हें पूर्व सेना प्रमुख की एक ‘अप्रकाशित किताब’ भेंट करता और उनसे उस पर चर्चा की मांग करता।” विपक्ष का आरोप है कि दिन में जब कार्यवाही चल रही थी, तो नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने भाषण के दौरान पूर्व सेना प्रमुख की इस किताब का हवाला देने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें ऐसा करने से रोक दिया गया। विपक्ष का कहना है कि यह किताब सरकार की नीतियों, विशेषकर रक्षा और सेना से जुड़े फैसलों (अग्निपथ योजना आदि) पर गंभीर सवाल उठाती है, जिसे सरकार दबाना चाहती है।

राहुल गांधी का आरोप है कि उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा और उनके माइक बंद किए जा रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लामबंद हो गए और उन्होंने तय किया कि जब तक उनकी बात नहीं सुनी जाएगी, वे सदन नहीं चलने देंगे।

8 सांसदों का निलंबन: आग में घी का काम

इस पूरे विवाद में आग में घी डालने का काम किया 8 विपक्षी सांसदों के निलंबन ने। एक दिन पहले ही राज्यसभा और लोकसभा में हंगामे के चलते विपक्ष के 8 सांसदों को निलंबित कर दिया गया था। विपक्ष इस कार्रवाई को ‘लोकतंत्र की हत्या’ और ‘तानाशाही’ बता रहा है।

बुधवार को जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई, तो विपक्ष की मांग थी कि पहले इन सांसदों का निलंबन रद्द किया जाए और राहुल गांधी को बेरोकटोक बोलने दिया जाए। महिला सांसदों के हाथों में जो बैनर थे, जिन पर ‘Do What Is Right’ लिखा था, वह इसी संदर्भ में थे—कि सरकार सही काम करे, निलंबन वापस ले और विपक्ष की आवाज को न दबाए।

भाजपा का पलटवार: ‘विपक्ष हताश है’

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विपक्ष के इस रवैये की कड़ी निंदा की है। भाजपा नेताओं ने कहा कि विपक्ष के पास मुद्दों की कमी है, इसलिए वे अब ‘गुंडागर्दी’ पर उतर आए हैं।

मनोज तिवारी ने कहा, “विपक्ष हताश है। उन्हें पता है कि प्रधानमंत्री जब बोलेंगे, तो उनके सारे झूठ बेनकाब हो जाएंगे। इसलिए वे प्रधानमंत्री को बोलने ही नहीं देना चाहते। महिला सांसदों को ढाल बनाकर ट्रेजरी बेंच तक भेजना संसदीय परंपराओं का घोर अपमान है। यह सुरक्षा में भी सेंध जैसा है। क्या विपक्ष चाहता है कि सदन में मारपीट हो? यह लोकतंत्र के लिए काला दिन है।”

संसदीय कार्य मंत्री ने भी कहा कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष चर्चा से भाग रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का जवाब सुनना विपक्ष का कर्तव्य है, लेकिन वे शोर-शराबा करके देश का समय बर्बाद कर रहे हैं।

आगे क्या? अनिश्चितता के बादल

बुधवार की घटनाओं के बाद संसद के बजट सत्र पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा अधूरी रह गई है और प्रधानमंत्री का जवाब अब अगली बैठक में संभावित है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या अगली बैठक शांतिपूर्ण हो पाएगी?

विपक्ष के तेवर बता रहे हैं कि वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। ‘किताब’ का मुद्दा, सांसदों का निलंबन और राहुल गांधी के आरोप—ये ऐसे मुद्दे हैं जो आने वाले दिनों में भी सदन में गूंजते रहेंगे। वहीं, सरकार भी अपने रुख पर कायम है कि वह विपक्ष के दबाव में नहीं झुकेगी।

अब सबकी निगाहें संसद की अगली कार्यवाही पर टिकी हैं। क्या प्रधानमंत्री अपना संबोधन दे पाएंगे? क्या विपक्ष उन्हें सुनने का धैर्य दिखाएगा? या फिर संसद का यह सत्र भी हंगामे की भेंट चढ़ जाएगा? यह देखना दिलचस्प होगा। लेकिन इतना तय है कि बुधवार को लोकसभा में जो हुआ, उसने भारतीय राजनीति की कड़वाहट को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है।

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