दिनांक: 08 Jan, 2026
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) एक बार फिर सुर्खियों में है। 5 जनवरी को यूनिवर्सिटी के साबरमती हॉस्टल के लॉन में आयोजित एक कैंडल मार्च अब राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद का रूप ले चुका है। कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को लेकर लगाए गए आपत्तिजनक नारों का वीडियो वायरल होने के बाद, इसकी तुलना 2016 की घटनाओं से की जा रही है।

1. क्या है पूरा मामला?
जेएनयू छात्रसंघ (JNUSU) ने 5 जनवरी की रात एक कैंडल मार्च का आयोजन किया था। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर दावा किया जा रहा है कि इस दौरान देश के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ अपमानजनक नारे लगाए गए।
- जैसे ही वीडियो सामने आया, मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया।
- जेएनयू प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस को पत्र लिखा और कथित नारेबाज़ी में शामिल छात्रों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग की है।
2. विवाद की पृष्ठभूमि: 5 जनवरी ही क्यों?
छात्रों का स्पष्ट कहना है कि इस मार्च का हालिया किसी अदालती फैसले से सीधा संबंध नहीं था, बल्कि यह एक वार्षिक कार्यक्रम था।
- 2020 की बरसी: छात्रों के अनुसार, 5 जनवरी 2020 को जेएनयू में नकाबपोश हमलावरों ने छात्रों पर लाठी-डंडों से हिंसक हमला किया था।
- न्याय की मांग: उस हमले में कई छात्र घायल हुए थे, लेकिन आज तक न तो किसी की गिरफ्तारी हुई और न ही कोई ठोस कार्रवाई। इसी के विरोध में हर साल यह कैंडल मार्च निकाला जाता है।
छात्र नेता का बयान: जेएनयू से पीएचडी कर रहे और सीआरजेडी के छात्र नेता अक्षन रंजन ने स्पष्ट किया: “हम हर साल 5 जनवरी को 2020 की घटना को याद करते हैं… यह महज इत्तेफाक था कि इस बरसी पर उसी दिन सुप्रीम कोर्ट ने शरजील इमाम और उमर खालिद की जमानत याचिकाएं खारिज कीं। मीडिया ने इसे गलत तरीके से जोड़ा… हम 2020 से हर साल यह कैंडल मार्च करते आ रहे हैं।”
3. एबीवीपी का विरोध और नारों पर सफाई
इस घटना के विरोध में 7 जनवरी को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े छात्रों ने रात 9 बजे साबरमती हॉस्टल में प्रदर्शन किया। उन्होंने ‘एंटी नेशनल एलिमेंट’ का पुतला फूंका और जवाबी नारेबाजी की।
वहीं, नारों के स्वरूप पर छात्रों का एक अलग तर्क है। पीएचडी छात्र अखिलेश कुमार कहते हैं:
“यह कोई नई बात नहीं है। यहां पहले भी इस तरह के नारे लगते रहे हैं। ये नारे प्रतीकात्मक होते हैं, किसी को सच में फिजिकली नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं।”
4. मीडिया ट्रायल पर छात्रों का गुस्सा
जेएनयू के छात्रों ने इस पूरे मामले में मीडिया की भूमिका पर गहरी नाराजगी जताई है।
- छात्रों का आरोप है कि अंग्रेजी में ऐसे शब्द और वाक्यांश अक्सर बोले जाते हैं, लेकिन हिंदी में अनुवादित होते ही इसे विवाद का विषय बना दिया जाता है।
- उनका कहना है कि मीडिया एक बार फिर अधूरी और भ्रामक जानकारी के आधार पर जेएनयू का ‘मीडिया ट्रायल’ कर रहा है, जिससे संस्थान की छवि खराब हो रही है।
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