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🎯 IPS वाई. पुरन कुमार सुसाइड केस: FIR में बदलाव, SC/ST एक्ट की आजीवन कारावास वाली धारा जोड़ी गई

राष्ट्रीय

📅 रविवार, 12 अक्टूबर 2025 | शाम 5:49 बजे | चंडीगढ़ / गुरुग्राम / रोहतक

आईपीएस अफसर वाई. पुरन कुमार की आत्महत्या के मामले में चंडीगढ़ पुलिस ने एफआईआर में बड़ा बदलाव करते हुए SC/ST एक्ट की गंभीर धारा 3(2)(V) जोड़ दी है। यह बदलाव उनकी पत्नी और आईएएस अफसर अमनीत पी. कुमार के प्रतिनिधित्व के बाद हुआ, जिसमें उन्होंने एफआईआर में दो प्रमुख गड़बड़ियों की ओर इशारा किया था — आरोपियों के नाम न लिखना और हल्की धारा लगाना।

IPS वाई. पुरन कुमार सुसाइड केस

📜 FIR में क्या बदलाव हुआ?

9 अक्टूबर को सेक्टर-11 थाने में दर्ज एफआईआर नंबर 156 में शुरू में SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(r) लगाई गई थी, जिसमें केवल छह महीने की सज़ा का प्रावधान है। लेकिन अब इसे बदलकर धारा 3(2)(V) कर दिया गया है, जिसमें आजीवन कारावास और जुर्माने की सज़ा का प्रावधान है — यदि अपराध IPC के तहत 10 साल या उससे अधिक सज़ा वाला हो।

इस बदलाव से केस की गंभीरता और कानूनी दिशा दोनों बदल गई हैं।

🧾 अमनीत पी. कुमार का प्रतिनिधित्व

10 अक्टूबर को अमनीत पी. कुमार ने SSP कंवरदीप कौर को एक लिखित प्रतिनिधित्व दिया, जिसमें उन्होंने तीन प्रमुख बिंदुओं पर आपत्ति जताई:

  1. FIR कॉलम 7 में आरोपियों के नाम न लिखना
  2. SC/ST एक्ट की हल्की धारा लगाना
  3. पति की जेब से मिले ‘फाइनल नोट’ की प्रति न देना

SSP ने जवाब दिया कि जब आरोपियों की संख्या अधिक होती है (जैसे इस केस में 15), तो कॉलम 7 में नाम न लिखना आम प्रैक्टिस है। वहीं ‘फाइनल नोट’ केस प्रॉपर्टी है, जिसे फॉरेंसिक रिपोर्ट से पहले साझा नहीं किया जा सकता — लेकिन कोर्ट की अनुमति से दिया जा सकता है।

⚖️ SC/ST एक्ट की धारा 3(2)(V) का महत्व

यह धारा तब लागू होती है जब कोई गैर-SC/ST व्यक्ति अनुसूचित जाति/जनजाति के सदस्य के खिलाफ IPC के तहत गंभीर अपराध करता है। इस केस में आत्महत्या के लिए उकसाने की IPC धारा लागू है, जिसमें 10 साल तक की सज़ा है — इसलिए धारा 3(2)(V) को उचित माना गया।

यह बदलाव केस को सामान्य आत्महत्या से एक जातीय उत्पीड़न आधारित गंभीर अपराध की श्रेणी में ले जाता है।

🔄 प्रशासनिक हलचल: SP का तबादला

9 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज होने के बाद हरियाणा सरकार ने रोहतक SP नरेंद्र बिजरणिया का तबादला कर दिया — वही अधिकारी जिन पर पुरन कुमार ने उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। उनकी जगह सुरेंद्र सिंह भोरिया को नया SP नियुक्त किया गया है।

गृह विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुमिता मिश्रा द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि बिजरणिया की नई पोस्टिंग के आदेश अलग से जारी किए जाएंगे।

📑 FIR की संरचना

  • IPC धाराएं: 108 और 3(5)
  • SC/ST Act: अब 3(2)(V)
  • दस्तावेज़: पुरन कुमार का आठ पन्नों का ‘फाइनल नोट’ और अमनीत की तीन पन्नों की शिकायत

🕵️‍♀️ SIT की जांच तेज़

IG पुष्पेंद्र कुमार की अगुवाई में SIT ने हरियाणा पुलिस को पत्र लिखकर रोहतक के अर्बन एस्टेट थाने की FIR नंबर 319 और जांच रिपोर्ट की प्रति मांगी है। इस FIR में पुरन कुमार के गनमैन सुशील कुमार पर रिश्वत मांगने का आरोप है, जिसमें पुरन कुमार को भी आरोपी बनाया गया था।

जैसे ही रिकॉर्ड मिलेंगे, SIT पूर्व SP बिजरणिया से पूछताछ कर सकती है।

🧠 सामाजिक और कानूनी प्रभाव

इस केस ने प्रशासनिक जवाबदेही, जातीय उत्पीड़न और पुलिस प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े किए हैं। अमनीत पी. कुमार द्वारा उठाए गए बिंदु न केवल व्यक्तिगत न्याय की मांग हैं, बल्कि संस्थागत पारदर्शिता और संवेदनशीलता की भी परीक्षा हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि SC/ST एक्ट की सही धाराओं का प्रयोग न केवल न्याय सुनिश्चित करता है, बल्कि पीड़ित समुदायों को विश्वास भी देता है कि कानून उनके पक्ष में खड़ा है।

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संपादन: ठाकुर पवन सिंह | pawansingh@tajnews.in

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