धर्म डेस्क, Taj News | Published by: ठाकुर पवन सिंह | Updated: Monday, 02 Feb 2026 07:18 PM IST
आगरा (Agra): ताजनगरी आगरा में आर्य केंद्रीय सभा द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय Arya Mahasammelan Success के साथ संपन्न हो गया। यह आयोजन सिर्फ एक सम्मेलन नहीं, बल्कि वैदिक संस्कृति का एक महाकुंभ साबित हुआ। तीन दिनों तक चले इस भव्य समारोह में 50 से अधिक शहरों के करीब 300 प्रतिनिधियों और कुल 5,575 आर्यजनों ने हिस्सा लेकर इतिहास रच दिया। जहां एक ओर आगरा की सड़कों पर केसरिया सैलाब उमड़ा, वहीं दूसरी ओर मंच से ऋषि दयानंद के क्रांतिकारी विचारों ने समाज को नई दिशा दी।

केसरिया रंग में रंगा आगरा: 1 किमी लंबी ऐतिहासिक शोभायात्रा
महासम्मेलन का सबसे आकर्षण केंद्र रही भव्य शोभायात्रा। करीब 1 किलोमीटर लंबी इस यात्रा में 1,000 से अधिक लोग शामिल हुए। शहर की सड़कों पर जब यह केसरिया सैलाब निकला, तो हर तरफ ‘ओम’ (ॐ) के झंडे और वैदिक उद्घोष गूंजने लगे। केसरिया पगड़ी और अंगवस्त्र धारण किए आर्यवीरों का उत्साह देखते ही बनता था। आयोजकों का कहना है कि ऐसा भव्य और अनुशासित दृश्य आगरा के स्मृतिपटल पर वर्षों तक अंकित रहेगा।
बाबा रामदेव का आशीर्वाद और विद्वानों का चिंतन
इस महासम्मेलन की सफलता में देश के शीर्ष वैदिक विद्वानों का सानिध्य प्राप्त हुआ। योग ऋषि बाबा रामदेव (Baba Ramdev) ने वर्चुअल माध्यम से जुड़कर सभा को अपना आशीर्वाद दिया और आर्य समाज को राष्ट्र निर्माण की धुरी बताया। मंच से आदरणीय वागीश जी, आचार्य विष्णुमित्र जी, स्वामी आर्यवेश जी, स्वामी स्वदेश जी, आचार्या पवित्रा जी और भजनोपदेशक कुलदीप आर्य ने संबोधित किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के दौर में अंधविश्वास और पाखंड को मिटाने के लिए ऋषि दयानंद का मार्ग ही एकमात्र विकल्प है।
इतिहास: कैसे हुई थी आर्य समाज की स्थापना?
आगरा में हुए इस सफल आयोजन के पीछे 149 साल पुरानी एक महान विरासत है।
- स्थापना: महर्षि दयानंद सरस्वती ने 10 अप्रैल 1875 को मुंबई (तत्कालीन बंबई) के काकड़वाड़ी में ‘आर्य समाज’ की स्थापना की थी।
- उद्देश्य: उस समय भारत गुलामी की जंजीरों में जकड़ा था और समाज कुरीतियों, अंधविश्वास, मूर्ति पूजा और जातिवाद में फंसा था। ऋषि दयानंद ने नारा दिया- “वेदों की ओर लौटो” (Back to Vedas)।
- क्रांति: आर्य समाज केवल पूजा-पाठ की पद्धति नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति थी। इसने विधवा विवाह का समर्थन किया, बाल विवाह का विरोध किया और शिक्षा के द्वार सभी जातियों और महिलाओं के लिए खोले।
- योगदान: भारत के स्वतंत्रता संग्राम में आर्य समाज का योगदान अतुलनीय रहा है। लाला लाजपत राय, राम प्रसाद बिस्मिल, और भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी आर्य समाज की ही देन थे। आज डीएवी (DAV) स्कूल और गुरुकुलों के माध्यम से यह संस्था शिक्षा जगत में प्रकाश स्तंभ बनी हुई है।
आयोजन के शिल्पकार और धन्यवाद ज्ञापन
इस ऐतिहासिक Arya Mahasammelan Success का श्रेय इसके आयोजकों की कड़ी मेहनत को जाता है। केंद्रीय सभा के संस्थापक आर्य अश्वनी जी, संयोजक प्रदीप कुलश्रेष्ठ, प्रधान मनोज खुराना, मंत्री वीरेंद्र वानप्रस्थि, कोषाध्यक्ष सुधीर अग्रवाल सहित अनुज आर्य, विकास आर्य, भारतभूषण सामा, देवशरण, नवीन शास्त्री और अमित आर्य ने दिन-रात एक कर दिया। आर्य केंद्रीय सभा ने आर्य पुरोहित सभा के श्री अशोक शास्त्री और श्री विश्वेंद्र शास्त्री सहित सभी दानदाताओं का आभार व्यक्त किया है, जिनके सहयोग से यह ‘यज्ञ’ पूर्ण हुआ।
Agra Arya Mahasammelan: ‘अंधविश्वास समाज को करता है खोखला, मानवता ही सबसे बड़ा धर्म’ – स्वामी आर्यवेश
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आर्य महासम्मेलन के यादगार लम्हे :-

































































































































































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