
Wednesday, 04 December 2025, 7:56:36 AM. International Desk
अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ कार्रवाई, गिरफ्तारी की घोषणा और इनाम जैसे कदमों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में गंभीर बहस छेड़ दी है। वर्षों से राजनीतिक और आर्थिक संकट से जूझ रहे वेनेजुएला के संदर्भ में यह मामला केवल एक देश तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और महाशक्तियों की भूमिका पर व्यापक सवाल खड़े करता है, जिनका असर भारत की विदेश नीति पर भी पड़ता है।
अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति पर कार्रवाई: सही या गलत और भारत की भूमिका
देवेंद्र गौतम

वेनेजुएला आज कई वर्षों से गंभीर राजनीतिक और आर्थिक संकट से गुजर रहा है। देश में महंगाई, बेरोज़गारी, भोजन और दवाइयों की कमी जैसी समस्याएँ आम जनता को परेशान कर रही हैं। इसी बीच अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनकी गिरफ्तारी की घोषणा और इनाम जैसी कार्रवाई की है। इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है।

सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि क्या अमेरिका को किसी दूसरे देश के राष्ट्रपति को गिरफ्तार करने का अधिकार है। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, कोई भी देश दूसरे संप्रभु देश के राष्ट्रपति के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई नहीं कर सकता। ऐसा तभी संभव है जब संयुक्त राष्ट्र या अंतरराष्ट्रीय न्यायालय किसी वैध प्रक्रिया के तहत आदेश दे। इस दृष्टि से अमेरिका की कार्रवाई को कानूनी और नैतिक रूप से गलत माना जाता है। इससे यह डर भी पैदा होता है कि शक्तिशाली देश अपने हितों के लिए कमजोर देशों की संप्रभुता का उल्लंघन कर सकते हैं।
हालाँकि अमेरिका का कहना है कि वेनेजुएला में लोकतंत्र खत्म हो चुका है और मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। लेकिन आलोचकों का मानना है कि अमेरिका का असली उद्देश्य मानवाधिकार नहीं, बल्कि वेनेजुएला की तेल संपदा और वहां सत्ता परिवर्तन करना है। इसलिए यह कदम अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरनाक माना जा रहा है।
अब सवाल उठता है कि इस पूरे संकट में भारत कहाँ खड़ा है। भारत ने न तो अमेरिका की इस कार्रवाई का समर्थन किया है और न ही वेनेजुएला सरकार के पक्ष में खुलकर बयान दिया है। भारत का रुख साफ है — किसी भी देश के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। भारत हमेशा से यह मानता रहा है कि किसी भी संकट का समाधान बातचीत, लोकतांत्रिक प्रक्रिया और शांति से होना चाहिए।
यह रुख भारत की विदेश नीति के मूल सिद्धांतों पर आधारित है। भारत की विदेश नीति कहती है:
सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान
गैर-हस्तक्षेप की नीति
शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व
और रणनीतिक स्वायत्तता, यानी किसी भी बड़े शक्ति गुट के दबाव में न आना
अब सवाल यह है कि भारत को आगे क्या करना चाहिए। भारत को चाहिए कि:
संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संवाद और शांतिपूर्ण समाधान की वकालत करे।
वेनेजुएला की आम जनता के लिए मानवीय सहायता का समर्थन करे।
अमेरिका और लैटिन अमेरिकी देशों दोनों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखे।
किसी भी तरह के जबरन सत्ता परिवर्तन का विरोध करे।
निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि अमेरिका की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ और विवादास्पद है। वहीं भारत ने एक जिम्मेदार देश की तरह संतुलित, शांतिपूर्ण और सिद्धांत आधारित नीति अपनाई है। यही नीति भारत को एक उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में मजबूत बनाती है।
देवेंद्र गौतम
लेक्चरर वर्द्धमान डिग्री कॉलेज
फतेहाबाद रोड आगरा
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