सिटी डेस्क, Taj News | Published by: ठाकुर पवन सिंह | Updated: Wednesday, 04 Feb 2026 06:30 PM IST
आगरा (Agra): ताजनगरी आगरा (Agra) की सड़कों पर यातायात व्यवस्था एक बार फिर ध्वस्त नजर आई। शब-ए-बारात (Shab-e-Barat) के मौके पर शहर के प्रमुख मार्गों पर ऐसा भीषण जाम लगा कि लोगों का पैदल चलना भी दूभर हो गया। शहर की लाइफलाइन कही जाने वाली Agra Traffic Jam ने मंगलवार शाम और रात को लोगों के पसीने छुड़ा दिए। हालात यह थे कि जिस सफर को तय करने में सामान्यतः 5 से 7 मिनट लगते हैं, उसे पूरा करने में लोगों को 30 से 40 मिनट तक का समय लग गया। एमजी रोड (MG Road) से लेकर भगवान टॉकीज तक वाहनों की लंबी कतारें रेंगती नजर आईं, और ट्रैफिक पुलिस की तमाम कोशिशें नाकाफी साबित हुईं।

Agra Traffic Jam: एमजी रोड पर लगा ‘ब्रेक’, मेट्रो का काम बना सिरदर्द
शहर के सबसे व्यस्ततम मार्ग एमजी रोड पर जाम का सबसे बुरा हाल देखने को मिला। आगरा मेट्रो (Agra Metro) के निर्माण कार्य के चलते सड़क के बड़े हिस्से पर बैरिकेडिंग की गई है, जिससे सड़कें पहले ही संकरी हो चुकी हैं।
- संकरी सड़कें: सेंट जॉन्स कॉलेज से लेकर हरी पर्वत और हींग की मंडी तक, सड़क की चौड़ाई कम होने के कारण दो वाहनों का एक साथ निकलना मुश्किल हो रहा है।
- त्योहार का दबाव: शब-ए-बारात के मौके पर इबादत के लिए निकलने वाले लोगों की भीड़ और शाम के वक्त ऑफिस से घर लौटने वालों का समय एक साथ टकरा गया। नतीजतन, एमजी रोड पर वाहनों का ऐसा रेला उमड़ा कि पूरी सड़क ‘पार्किंग’ में तब्दील हो गई।

इन चौराहों पर रही सबसे ज्यादा आफत
जाम का असर केवल एक जगह नहीं, बल्कि शहर के लगभग हर प्रमुख चौराहे पर दिखा।
- सेंट जॉन्स चौराहा (St. John’s Crossing): यह शहर का एक प्रमुख शिक्षा और व्यापार केंद्र है। यहां चारों तरफ से आने वाले वाहनों के कारण स्थिति अनियंत्रित हो गई। एंबुलेंस और स्कूल बसें भी जाम में फंसी नजर आईं।
- हरी पर्वत और दीवानी चौराहा: प्रशासन का केंद्र होने के बावजूद, यहां ट्रैफिक मैनेजमेंट फेल नजर आया। दीवानी से लेकर सूरसदन तक वाहनों की कतारें लगी रहीं।
- भगवान टॉकीज (Bhagwan Talkies): यह शहर का मुख्य प्रवेश द्वार है। यहां फ्लाईओसवर के नीचे और ऊपर दोनों तरफ भीषण जाम रहा। नेशनल हाईवे से शहर में प्रवेश करने वाले भारी वाहनों ने स्थिति को और बिगाड़ दिया।
- फतेहाबाद और शमशाबाद रोड: टूरिस्ट सीजन होने के कारण इन रोड्स पर टूरिस्ट बसों का जमावड़ा था, जिससे स्थानीय निवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
जाम के 5 बड़े कारण: क्यों घुट रहा है आगरा का दम?
आगरा में जाम अब कोई नई बात नहीं रह गई है, लेकिन त्योहारों पर यह लाइलाज बीमारी बन जाती है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- मेट्रो निर्माण और बैरिकेडिंग: विकास कार्यों के लिए जगह-जगह खोदी गई सड़कें और बैरिकेडिंग ने ट्रैफिक की रफ्तार रोक दी है। बॉटलनेक (Bottleneck) बनने से वाहन फंस रहे हैं।
- यातायात नियमों की अनदेखी: ई-रिक्शा और ऑटो चालकों द्वारा बीच सड़क पर सवारी बैठाना और उतारना जाम का एक बड़ा कारण है। रॉन्ग साइड ड्राइविंग (Wrong Side Driving) ने कोढ़ में खाज का काम किया।
- भारी वाहनों का प्रवेश: नो-एंट्री के समय में भी कई बार भारी वाहन शहर में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे पूरी व्यवस्था चरमरा जाती है।
- अतिक्रमण: दुकानदारों द्वारा सड़क पर किए गए अतिक्रमण और बेतरतीब पार्किंग ने सड़कों की चौड़ाई को आधा कर दिया है।
- जलभराव और खराब सड़कें: कई जगहों पर सीवर के पानी और गड्ढों ने वाहनों की गति को धीमा कर दिया है।
जनता का दर्द: ‘समय और ईंधन दोनों की बर्बादी’
जाम में फंसे राहगीरों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। शाहगंज निवासी रोहित ने बताया, “मैं हरी पर्वत से राजा की मंडी जा रहा था, जो कि मुश्किल से 10 मिनट का रास्ता है, लेकिन आज मुझे 45 मिनट लग गए। पेट्रोल अलग बर्बाद हुआ और मानसिक तनाव अलग।” वहीं, एक अन्य यात्री ने कहा, “त्योहारों पर पुलिस को पहले से तैयारी करनी चाहिए थी। हर बार यही होता है, आम आदमी पिसता रहता है।”
पुलिस का दावा: डायवर्जन और हेल्पलाइन जारी
भीषण जाम के बीच यातायात पुलिस (Traffic Police Agra) ने स्थिति को संभालने के लिए कुछ कदम उठाए:
- रूट डायवर्जन: शब-ए-बारात को देखते हुए कुछ मार्गों पर डायवर्जन लागू किया गया था, हालांकि इसका पालन कराने में पुलिस को पसीने छूट गए।
- हेल्पलाइन नंबर: पुलिस ने लोगों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं और अपील की है कि जाम की स्थिति में वे संपर्क करें।
- सख्त कार्रवाई: डीसीपी ट्रैफिक ने निर्देश दिए हैं कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ चालान और सीज करने की कार्रवाई की जाए। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे वैकल्पिक मार्गों का प्रयोग करें और यातायात नियमों का पालन करें।
स्थायी समाधान की दरकार
आगरा में Agra Traffic Jam की समस्या अब नासूर बन चुकी है। केवल त्योहारों पर अस्थायी इंतजाम काफी नहीं हैं। परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस को मिलकर एक ठोस कार्ययोजना बनानी होगी। ई-रिक्शा के लिए रूट निर्धारण, मेट्रो निर्माण के दौरान वैकल्पिक रास्तों का सुदृढ़ीकरण और अतिक्रमण के खिलाफ निरंतर अभियान ही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है। जब तक ऐसा नहीं होता, ताजनगरी की रफ्तार यूं ही थमती रहेगी।
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