Wednesday, 07 January 2026, 6:21:00 PM. Agra, Uttar Pradesh
आगरा की हींग की मंडी स्थित प्रकाशवंती पैलेस में संचालित हरवीरा शू होलसेलर में हुई चोरी अब केवल एक आपराधिक वारदात नहीं रह गई है, बल्कि करोड़ों रुपये के कथित कैश कारोबार और उसे दबाने की कोशिशों का बड़ा खुलासा बनकर सामने आई है। चोरों से 97 लाख रुपये की नकदी बरामद होने के बाद पुलिस पर जबरदस्त दबाव बनाया गया कि बरामद रकम को 20–22 लाख रुपये तक सीमित दिखाया जाए, लेकिन आगरा पुलिस ने किसी भी दबाव को स्वीकार नहीं किया।

हरवीरा शू होलसेलर फर्म को खेमचंद वंजानी और हरीश चंद वंजानी, दो सगे भाई, संयुक्त रूप से संचालित करते हैं। फर्म की ऑल इंडिया लेवल पर सप्लाई बताई जाती है और प्रतिदिन करोड़ों रुपये के कारोबार का दावा किया जाता है। चोरी की घटना के बाद व्यापारी की ओर से पुलिस को भी चोरी की रकम मात्र 20–22 लाख रुपये बताई गई थी।
CCTV से चोरों तक पहुंची पुलिस
चोरी की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में साफ दिखाई दिया कि चोर रात करीब 1:30 बजे हरवीरा शू से चोरी कर गली के रास्ते निकलते हैं और करीब 2:30 बजे बिजलीघर चौराहे से किराये पर ऑटो लेते हैं। इन्हीं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने लोहामंडी और शाहगंज क्षेत्र से आरोपियों को हिरासत में लिया।
पुलिस की दबिश के दौरान चोरों के पास से बोरे में भरी 97 लाख रुपये की नकदी बरामद हुई। इसी बरामदगी के साथ पूरा मामला पलट गया और चोरी की रकम को कम दिखाने का दावा सवालों के घेरे में आ गया।
व्यापारी नेता की दबाव राजनीति उजागर
चोरों की गिरफ्तारी और भारी नकदी बरामदगी की सूचना मिलते ही हींग की मंडी का एक व्यापारी नेता भी सक्रिय हो गया। आरोप है कि उसने पुलिस पर दबाव बनाया कि केवल 20–22 लाख रुपये की चोरी दर्शाई जाए और शेष रकम का खुलासा न किया जाए। यहां तक कि सत्ता पक्ष से जुड़े कुछ लोगों के जरिए भी दबाव बनवाने की कोशिश की गई, लेकिन पुलिस ने किसी की नहीं सुनी।
पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस से ठीक पहले तक यह कोशिश चलती रही कि 97 लाख रुपये की बरामदगी सार्वजनिक न हो, लेकिन अंततः पुलिस ने पूरी रकम का खुलासा करते हुए साफ कर दिया कि व्यापारी द्वारा बताई गई रकम और वास्तविक बरामदगी में जमीन-आसमान का अंतर है।
कैश कारोबार का खुला सच, विभागीय जांच की आहट
97 लाख रुपये की नकद बरामदगी से यह साफ हो गया है कि हींग की मंडी में बड़े पैमाने पर कैश में लेन-देन किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, आगरा पुलिस इस बरामदगी की जानकारी आयकर विभाग और जीएसटी विभाग को भेजने की तैयारी में है, जिसके बाद जांच तय मानी जा रही है।
इसी आशंका के चलते हींग की मंडी से जुड़ी अन्य फर्मों में भी खलबली मच गई है और कई व्यापारी अपने खातों और रिकॉर्ड दुरुस्त करने में जुट गए हैं।
हरवीरा शू के मालिकों में से हरीश वंजानी विजय नगर कॉलोनी के एक अपार्टमेंट में रहते हैं, जबकि खेमचंद वंजानी फतेहाबाद रोड क्षेत्र में निवास करते हैं। सवाल यह उठ रहा है कि डिजिटल लेन-देन के दौर में इतना बड़ा कारोबार नकद में कैसे और क्यों किया जा रहा था।
पुराना पैटर्न, वही सवाल
गौरतलब है कि कुछ महीने पहले आगरा के ही एक अन्य शू ट्रेडर के यहां से करोड़ों रुपये कैश और बड़ी मात्रा में पर्चियां बरामद हुई थीं, लेकिन वह मामला बाद में ठंडे बस्ते में चला गया। अब सवाल उठ रहा है कि क्या 97 लाख रुपये की यह बरामदगी भी दबा दी जाएगी या जांच किसी ठोस नतीजे तक पहुंचेगी।
सूत्रों की मानें तो वास्तविक चोरी की रकम 1.5 करोड़ रुपये तक बताई जा रही है और पूरी रात जूता व्यापारियों के बीच यह चर्चा बनी रही कि आखिर चोरी की रकम कितनी दिखाई जाएगी।
यह मामला अब सिर्फ चोरी का नहीं, बल्कि कैश इकोनॉमी, दबाव की राजनीति और सिस्टम की पारदर्शिता की बड़ी परीक्षा बन चुका है।
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