क्राइम/कोर्ट डेस्क, Taj News | Published by: ठाकुर पवन सिंह | Updated: Wednesday, 04 Feb 2026 07:45 PM IST
आगरा (Agra): ताजनगरी में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस और न्यायपालिका की जुगलबंदी रंग ला रही है। Agra Rape Case Verdict में माननीय न्यायालय ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। वर्ष 2018 में एत्माद्दौला थाना क्षेत्र से एक नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर भगाने और उसके साथ दुष्कर्म (Rape) करने के दोषी सुनील को एडीजे-29 कोर्ट (ADJ-29 Court) ने 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 15,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
यह फैसला आगरा पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन कनविक्शन’ (Operation Conviction) की एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, जिसके तहत जघन्य अपराधों में शामिल दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने के लिए पुलिस और अभियोजन पक्ष मिलकर काम कर रहे हैं।

Agra Rape Case Verdict: क्या था 2018 का वह काला दिन?
घटना की जड़ें 8 साल पुरानी हैं। 17 जनवरी 2018 को थाना एत्माद्दौला (Etmaddaula Police Station) क्षेत्र के नरायच सती नगर निवासी राजकुमार ने थाने में बदहवास हालत में एक तहरीर दी थी।
- तहरीर: पिता ने पुलिस को बताया कि उनकी नाबालिग बेटी घर से गायब है। उन्हें शक था कि गुलाब नगर, बोदला निवासी युवक सुनील (Sunil), पुत्र कन्हैया लाल, उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर भगा ले गया है।
- मुकदमा: पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल आईपीसी की धारा 363 (अपहरण) के तहत मुकदमा अपराध संख्या 41/2018 दर्ज किया और बच्ची की तलाश शुरू कर दी।
3 दिन में बरामदगी और मेडिकल में खुला राज
पुलिस की तत्परता से महज 3 दिन के भीतर, यानी 20 जनवरी 2018 को पुलिस ने सटीक मुखबिरी और सर्विलांस की मदद से आरोपी सुनील को गिरफ्तार कर लिया और नाबालिग पीड़िता को सुरक्षित बरामद कर लिया।
- बयान और मेडिकल: बरामदगी के बाद जब पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया और मजिस्ट्रेट के समक्ष कलमबंद बयान (धारा 164) दर्ज हुए, तो रोंगटे खड़े कर देने वाली सच्चाई सामने आई। पीड़िता ने बताया कि आरोपी ने उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए थे।
- धाराओं में बढ़ोतरी: पीड़िता के बयान और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने मुकदमे में आईपीसी की धारा 366 (अपहरण कर शादी या दुष्कर्म के लिए विवश करना), धारा 376 (दुष्कर्म) और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) की गंभीर धाराएं बढ़ा दीं।
8 साल की कानूनी लड़ाई और न्याय की जीत
विवेचना अधिकारी ने मामले में त्वरित जांच करते हुए गवाहों के बयान, फोरेंसिक सबूत और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर ठोस साक्ष्य संकलित किए। पुलिस ने 16 मार्च 2018 को न्यायालय में आरोपी सुनील के खिलाफ आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल कर दिया। इसके बाद शुरू हुई लंबी कानूनी प्रक्रिया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष और कोर्ट पैरोकार ने गवाहों को टूटने नहीं दिया और साक्ष्यों को मजबूती से अदालत के सामने रखा।
- फैसला: आखिरकार, 4 फरवरी 2026 को एडीजे-29 कोर्ट ने तमाम सबूतों और गवाहों के मद्देनजर सुनील को दोषी करार दिया। कोर्ट ने उसे 10 साल की जेल और जुर्माने की सजा सुनाकर समाज में कड़ा संदेश दिया कि नाबालिगों के साथ अपराध करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
‘ऑपरेशन कनविक्शन’ का दिखा असर
आगरा पुलिस आयुक्त (Police Commissioner) के निर्देशन में चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन कनविक्शन’ अभियान के तहत इस मामले की लगातार निगरानी की जा रही थी। मॉनिटरिंग सेल (Monitoring Cell) ने सुनिश्चित किया कि गवाह समय पर कोर्ट पहुंचें और पैरवी में कोई ढिलाई न हो। इसी प्रभावी पैरवी का नतीजा है कि आज एक अपराधी सलाखों के पीछे है और पीड़ित परिवार को न्याय मिला है।
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