आगरा में खूनी खेल: GST अधिकारी से विवाद और फिर ‘सस्पेंस’ वाली मौत, परिजनों ने लगाए हत्या के गंभीर आरोप

Uttar Pradesh Desk, tajnews.in | Sunday, April 5, 2026, 09:15:30 AM IST

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आगरा: ताजनगरी आगरा में एक नामचीन ट्रांसपोर्टर की संदिग्ध मौत ने पूरे प्रशासनिक महकमे में एक भारी हड़कंप मचा दिया है। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, थाना शाहगंज क्षेत्र के निवासी ट्रांसपोर्टर असगर अली का शव शनिवार सुबह मलका चबूतरा इलाके में सड़क पर पड़ा मिला। दरअसल, इस मामले ने तब एक बहुत ही खौफनाक मोड़ ले लिया जब परिजनों ने सीधे तौर पर जीएसटी (GST) विभाग की दो महिला अधिकारियों पर हत्या की साजिश रचने का संगीन आरोप लगाया। गौरतलब है कि, मृतक ट्रांसपोर्टर का पिछले कई महीनों से जीएसटी विभाग के साथ एक बहुत ही कड़ा कानूनी विवाद चल रहा था। इसलिए, परिजनों का पक्का दावा है कि यह कोई साधारण सड़क हादसा नहीं बल्कि एक सुनियोजित कत्ल है। चूंकि सीसीटीवी फुटेज में एक संदिग्ध कार द्वारा उन्हें टक्कर मारते हुए देखा गया है। नतीजतन, पुलिस ने अब इस पूरे संवेदनशील मामले की बहुत ही गहराई से जांच शुरू कर दी है।

HIGHLIGHTS
  • संदिग्ध मौत: आगरा के ट्रांसपोर्टर असगर अली का शव मलका चबूतरा के पास संदिग्ध अवस्था में सड़क पर मिला।
  • जीएसटी विवाद: मौत से ठीक तीन घंटे पहले जीएसटी विभाग की टीम ने मृतक का माल से भरा ट्रक टोल पर रोका था।
  • हत्या का आरोप: परिजनों ने जीएसटी विभाग की महिला सहायक आयुक्त पर हत्या की साजिश रचने का कड़ा आरोप लगाया है।
  • सीसीटीवी सुराग: लोहामंडी पुलिस को सीसीटीवी फुटेज में एक कार द्वारा ट्रांसपोर्टर को टक्कर मारने के अहम साक्ष्य मिले हैं।

आगरा में सनसनी: सड़क पर मिली ट्रांसपोर्टर असगर की लाश

आगरा के थाना शाहगंज इलाके में शनिवार की सुबह एक बहुत ही दिल दहला देने वाली खबर के साथ हुई। दरअसल, भोगीपुरा मेवाती गली के निवासी और अजमल ट्रांसपोर्ट के मालिक असगर अली का शव सड़क किनारे संदिग्ध हालत में पड़ा मिला। गौरतलब है कि, असगर अली की उम्र 51 वर्ष थी और वह आगरा के ट्रांसपोर्ट व्यवसाय का एक बहुत ही जाना-माना नाम थे। इसलिए, उनकी मौत की खबर मिलते ही लोहामंडी और शाहगंज इलाके में भारी तनाव और शोक की लहर तुरंत फैल गई।

चूंकि उनके शरीर पर चोट के कई गंभीर निशान मौजूद थे, इसलिए स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को इस घटना की सूचना दी। इसके अलावा, परिजनों ने जब असगर का निर्जीव शरीर देखा तो उनके सब्र का बांध पूरी तरह से टूट गया। नतीजतन, वे उन्हें तुरंत एसएन मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके परिणामस्वरूप, पुलिस ने बिना कोई समय गंवाए इलाके की घेराबंदी कर अपनी शुरुआती जांच बहुत ही तेजी से शुरू कर दी है।

मौत से ठीक तीन घंटे पहले जीएसटी टीम ने रोका था ट्रक

इस पूरे मामले की सबसे ज्यादा रहस्यमयी और चौंकाने वाली कड़ियाँ शुक्रवार की रात से ही जुड़ती हुई नजर आ रही हैं। दरअसल, असगर अली शुक्रवार रात करीब 11 बजे अपने गोदाम से एक ट्रक लोड करवाकर जयपुर में डिलीवरी के लिए रवाना करने वाले थे। गौरतलब है कि, उनके भतीजे हर्षद ने बताया कि रात 2 बजे असगर ने घर पर कॉल करके बताया था कि फतेहपुर सीकरी के कौरई टोल के पास जीएसटी टीम ने उनका ट्रक जबरन रोक लिया है।

इसलिए, असगर अली खुद उस ट्रक को छुड़ाने के लिए टोल पर पहुंचे हुए थे। चूंकि उनके पास माल के सभी वैध बिल और दस्तावेज मौजूद थे, फिर भी जीएसटी की सहायक आयुक्त रेशू त्रिपाठी ने पुलिस बुला ली। इसके अलावा, अधिकारियों ने असगर को वहीं उतार दिया और ट्रक को कब्जे में लेकर जयपुर हाउस स्थित अपने कार्यालय भेज दिया। नतीजतन, असगर ने रात में घर वालों को बताया था कि वह अब जीएसटी दफ्तर जा रहे हैं। इसी बीच, उनकी संदिग्ध मौत हो गई।

परिजनों का आरोप: महिला अधिकारी ने रची हत्या की साजिश

ट्रांसपोर्टर के परिजनों ने अब इस मामले में सीधे तौर पर एक बहुत बड़ा और खौफनाक खुलासा किया है। दरअसल, मृतक की बहन नाजिमा और अन्य परिजनों ने जीएसटी की महिला सहायक आयुक्त पर हत्या की साजिश रचने का सीधा आरोप लगाया है। गौरतलब है कि, असगर अली और इस महिला अधिकारी के बीच पिछले कई महीनों से एक बहुत ही कड़ा और गंभीर विवाद लगातार चल रहा था।

इसलिए, परिजनों का मानना है कि ट्रक रोकना सिर्फ एक बहाना था और असली मकसद असगर अली को ठिकाने लगाना था। चूंकि महिला अधिकारी ने पहले भी असगर पर ‘चौथ’ मांगने का फर्जी आरोप लगाकर उन पर एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई थी। इसके अलावा, ट्रांसपोर्टर असगर अली ने भी लोकायुक्त और न्यायालय में इस महिला अधिकारी के खिलाफ कई शिकायतें पहले से दर्ज करा रखी थीं। नतीजतन, इस पुराने विवाद ने अब एक बहुत ही खूनी और जानलेवा मोड़ ले लिया है।

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नवंबर 2025 का वह पुराना विवाद और 4.5 लाख का जुर्माना

असगर अली के बेटे अब्दुल ने अपने पिता की मौत के पीछे के असल कारणों का खुलासा किया है। दरअसल, यह पूरा विवाद नवंबर 2025 में तब शुरू हुआ था जब जीएसटी की टीम ने उनके एक ट्रक को पकड़ लिया था। गौरतलब है कि, सभी वैध दस्तावेज दिखाने के बावजूद अधिकारियों ने उन पर 4.5 लाख रुपये का भारी जुर्माना और टैक्स लगा दिया था। इसलिए, असगर अली ने इस अन्याय के खिलाफ एक लंबी कानूनी लड़ाई का बिगुल फूंका हुआ था।

चूंकि विभाग ने केवल 3 लाख 6 हजार की रसीद दी थी और गाड़ी की क्षमता से अधिक माल दिखाकर उन पर दबाव बनाया था। नतीजतन, असगर अली ने विभाग के उच्चाधिकारियों और लोकायुक्त से इसकी कड़ाई से शिकायत की थी। इसके अलावा, उन्होंने न्यायालय में भी अपना प्रार्थनापत्र दिया था। मुख्य रूप से, इसी बात से चिढ़कर महिला अधिकारी ने उन पर झूठा मुकदमा दर्ज कराया था। इसके परिणामस्वरूप, यह विवाद अब उनके जीवन की सबसे बड़ी और आखिरी त्रासदी बन गया।

CCTV फुटेज का बड़ा खुलासा: कार ने मारी थी जोरदार टक्कर

लोहामंडी पुलिस ने इस संदिग्ध मौत के रहस्य को सुलझाने के लिए घटना स्थल के पास के सभी सीसीटीवी कैमरों को खंगाला है। दरअसल, एसीपी लोहामंडी गौरव सिंह ने मीडिया को बताया कि फुटेज में एक सफेद रंग की कार द्वारा ट्रांसपोर्टर असगर अली को टक्कर मारने की पुष्टि हुई है। गौरतलब है कि, टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि असगर अली काफी दूर तक उछलकर सड़क पर गिर गए थे।

इसलिए, पुलिस अब इसे हिट-एंड-रन (Hit and Run) का मामला मानकर भी अपनी जांच आगे बढ़ा रही है। चूंकि यह घटना रात के अंधेरे में हुई, इसलिए कार के नंबर को पहचानने में काफी मुश्किलें आ रही हैं। इसके अलावा, परिजनों ने आशंका जताई है कि कार से टक्कर मारना भी उस सोची-समझी साजिश का ही एक हिस्सा हो सकता है। नतीजतन, पुलिस अब शहर के सभी मुख्य चौराहों के कैमरों की बारीकी से जांच कर रही है ताकि उस संदिग्ध कार और उसके चालक तक पहुंचा जा सके।

वीडियोग्राफी के साथ हुआ पोस्टमार्टम: पुलिस जांच में जुटी

इस पूरे मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस बहुत ही सावधानी से अपने कदम उठा रही है। दरअसल, परिजनों की भारी मांग और हंगामे को देखते हुए पुलिस ने चिकित्सकों के एक विशेष पैनल से पोस्टमार्टम कराने का फैसला लिया। गौरतलब है कि, पोस्टमार्टम की इस पूरी प्रक्रिया की कड़ी वीडियोग्राफी भी कराई गई है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार का संदेह बिल्कुल न रहे।

इसलिए, पुलिस अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार कर रही है ताकि मौत के असली और तकनीकी कारणों का पता चल सके। चूंकि मामला सीधे तौर पर सरकारी विभाग के अधिकारियों पर लग रहे आरोपों से जुड़ा है, इसलिए जांच में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है। इसके अलावा, एसीपी गौरव सिंह ने स्पष्ट किया है कि परिजन जो भी लिखित तहरीर देंगे, उसी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अंततः, इस घटना ने आगरा के ट्रांसपोर्टर्स के बीच सुरक्षा को लेकर एक बहुत बड़ा डर पैदा कर दिया है।

जीएसटी विभाग की सफाई: जांच में सहयोग का दिया भरोसा

जीएसटी विभाग के उच्चाधिकारियों ने भी इस पूरी घटना पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। दरअसल, एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1 पंकज गांधी ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर ही टीम ने उस ट्रक को रोका था। गौरतलब है कि, टोल पर विवाद होने के बाद पुलिस को 112 पर कॉल करके बुलाया गया था और पुलिस की मौजूदगी में ही ट्रक को रात 3 बजे कार्यालय में सुरक्षित दाखिल किया गया था।

इसलिए, विभाग ने उन पर लगाए जा रहे हत्या के आरोपों को पूरी तरह से नकार दिया है। हालांकि, उन्होंने मृतक के परिवार के प्रति अपनी गहरी सहानुभूति व्यक्त की है। चूंकि पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है, इसलिए विभाग ने जांच एजेंसी को अपना पूरा और हर संभव सहयोग देने का पक्का वादा किया है। इसके अलावा, विभागीय अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार अगली कार्रवाई की जाएगी। ताज न्यूज़ इस सनसनीखेज मामले की हर अपडेट आप तक लगातार पहुंचाता रहेगा।

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Pawan Singh

Pawan Singh

Chief Editor, Taj News

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