सिटी रिपोर्टर, Taj News | Published by: ठाकुर पवन सिंह | Updated: Wednesday, 04 Feb 2026 09:30 AM IST
आगरा (Agra): शब-ए-बारात (Shab-e-Barat) के मौके पर मंगलवार रात ताजनगरी के कब्रिस्तान फूलों और लाइटों से रोशन हो उठे। मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में देर रात तक इबादत का सिलसिला जारी रहा। अकीदतमंदों ने शहर की प्रमुख मस्जिदों में खुदा की इबादत की और कब्रिस्तानों में जाकर अपने बुजुर्गों व परिजनों की कब्रों पर उनकी रूह की शांति के लिए दुआ की। जगह-जगह जलसों का आयोजन भी किया गया।

इबादत और अकीदत: कब्रों पर गुलपोशी और फातिहा
मस्जिदों में नमाज के बाद से कब्रिस्तानों में अकीदतमंदों की भीड़ उमड़ती रही और देर रात तक इबादत का दौर चलता रहा।
- रस्में: लोगों ने अपने पूर्वजों और रिश्तेदारों की कब्रों की साफ-सफाई कर फूल चढ़ाए और मोमबत्ती जलाकर उनकी मगफिरत की दुआ मांगी। कब्रों पर गुलपोशी करने के बाद अगरबत्ती जलाकर ‘खिराज-ए-अकीदत’ पेश की। इसके बाद मस्जिदों में भी पूरी रात जागकर गुनाहों की माफी मांगी।
- मान्यता: माना जाता है कि इस रात की जाने वाली दुआएं अल्लाह ताला कुबूल फरमाते हैं। कई लोगों ने रोजा भी रखा।

पाया चौकी: फैसलों की रात है शब-ए-बारात
आगरा के पाया चौकी स्थित नाला नई बस्ती में मंगलवार को ख्वाजा गरीब नवाज दीनी इस्लाही तंजीम की ओर से शब-ए-बारात पर जलसे का आयोजन किया गया।
- मुख्य अतिथि: मुख्य अतिथि मुफ्ती मोहम्मद सोहेल रजा कादरी ने कहा कि “यह फैसलों की रात है। हमें कब्रिस्तान में दुआ करनी चाहिए”।
- कार्यक्रम: जलसे का आगाज ‘तिलावते कुरान’ से हुआ। इसके बाद मशहूर नात-ए-पाक शाहबाज खान और मोहसिन रजा कादरी ने पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब की शान में नात पेश की। मरहूमों के लिए दुआ-ए-मगफिरत की गई।
- मौजूदगी: इस दौरान मोहम्मद जमील चिश्ती, सुफियान रजा कादरी, मोहम्मद आजम, अमीर उद्दीन, फूल भाई, पिंटू भाई आदि मौजूद रहे।
पंचकुइयां में सबसे बड़ा जलसा
शहर का सबसे बड़ा जलसा पंचकुइयां कब्रिस्तान में आयोजित किया गया। यहां शहर के बाहर से आए उलेमा ने शब-ए-बारात के बारे में विस्तार से बताया। इसके अलावा अबुल उला दरगाह, हींग की मंडी, शाहगंज, नाई की मंडी, बोदला, लोहामंडी आदि इलाकों में भी जलसे आयोजित किए गए।
मस्जिदों में अमन-चैन की दुआ और पुलिस की सराहना
शाही जामा मस्जिद में भी पूरी रात इबादत की गई। नायब काजी मौलाना मोहम्मद उजैर आलम ने बताया कि “इस रात इबादत करने का सबब सौ गुना मिलता है। माना जाता है कि इस रात फरिश्ते दुनिया में आकर गुनाहों का हिसाब-किताब करते हैं”।
ऑल इंडिया जमीयतुल कुरैश के जिला अध्यक्ष अदनान कुरैशी ने बताया कि शब-ए-बारात पर मस्जिदों में पूरी रात इबादत की और मरहूमों के लिए खिराज-ए-अकीदत पेश की। महिलाओं ने घरों में इबादत की। कब्रिस्तान में लोगों ने बुजुर्गों की कब्र पर फातिहा पढ़ी और फूल डाले।
- सराहना: उन्होंने पंचकुइयां कब्रिस्तान पर पुलिस कैंप की सुरक्षा और एमजी रोड पर भारी वाहन के रूट डायवर्जन की सराहना की।
- भाईचारा: हिंदुस्तानी बिरादरी के अध्यक्ष और कबीर पुरस्कार से सम्मानित डॉ. सिराज कुरैशी ने कहा कि शब-ए-बारात पर सांप्रदायिक एकता और भाईचारे की रोशनी दिखाई दी।
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