हेल्थ डेस्क, Taj News | Published by: ठाकुर पवन सिंह | Updated: Wednesday, 04 Feb 2026 12:45 PM IST
आगरा (Agra): सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (SN Medical College) के डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यहां के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग (Obstetrics and Gynecology Department) की टीम ने एक जटिल सर्जरी को अंजाम देते हुए 36 वर्षीय महिला के गर्भाशय (Uterus) से 16 फाइब्रॉइड (गांठे) निकालकर उसे नया जीवन दिया है। सबसे खास बात यह रही कि इतनी जटिल सर्जरी के बावजूद डॉक्टरों ने महिला के गर्भाशय को सुरक्षित बचा लिया, जिससे उसके मां बनने का सपना अब भी जीवित है।

Agra Medical Success: क्या थी समस्या?
36 वर्षीय महिला मरीज पिछले काफी समय से प्राथमिक बांझपन (Primary Infertility) और पेट में तेज दर्द की समस्या से जूझ रही थी। जांच में पता चला कि उसके गर्भाशय में कई गांठे (Uterine Fibroids) हैं, जो न केवल दर्द का कारण बन रही थीं, बल्कि उसे मां बनने से भी रोक रही थीं। आमतौर पर ऐसे मामलों में गर्भाशय निकालने (Hysterectomy) का खतरा रहता है, लेकिन एसएन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने मायोमेक्टॉमी (Myomectomy) तकनीक का सहारा लिया।
जटिल सर्जरी: 8×8 सेंटीमीटर की बड़ी गांठ भी निकाली
प्राचार्य प्रो. (डॉ.) प्रशांत गुप्ता के नेतृत्व में यह सर्जरी की गई। ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण था।
- 16 फाइब्रॉइड: डॉक्टरों की टीम ने एक-एक करके कुल 16 फाइब्रॉइड निकाले।
- बड़ी चुनौती: इनमें से एक फाइब्रॉइड का आकार काफी बड़ा (8 × 8 सेंटीमीटर) था।
- सफलता: तमाम चुनौतियों के बावजूद टीम ने गर्भाशय को बिना कोई नुकसान पहुंचाए सभी गांठों को सफलपूर्वक बाहर निकाल दिया। इससे भविष्य में रोगी के गर्भवती होने की संभावना सुरक्षित रह गई है।
इन डॉक्टरों की टीम ने किया कमाल
यह सफल सर्जरी प्रो. (डॉ.) अनु पाठक के कुशल निर्देशन में की गई। टीम में निम्नलिखित चिकित्सक शामिल रहे:
- गायनिक टीम: डॉ. दिव्या यादव, डॉ. नीलांशा, डॉ. श्वेता, डॉ. अंशु, डॉ. ज्योत्सना, डॉ. गरिमा, डॉ. दीक्षा और डॉ. रुपल।
- एनेस्थीसिया टीम: डॉ. मिहिर गुप्ता, डॉ. अनुभव, डॉ. अभिषेक और डॉ. कृति ने बेहोशी और दर्द प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विभाग की अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) शिखा सिंह ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह विभाग की उन्नत और सुरक्षित चिकित्सा सेवाओं का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां प्रजनन क्षमता को संरक्षित रखने पर जोर दिया जाता है।
प्राचार्य ने कहा- ‘रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण की जीत’
एसएनएमसी के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) प्रशांत गुप्ता ने इस सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, “यह उपलब्धि हमारे संस्थान के डॉक्टरों की उच्च स्तरीय विशेषज्ञता और टीमवर्क को दर्शाती है। एसएनएमसी आगरा निरंतर अत्याधुनिक और सुरक्षित चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि रोगियों को सर्वोत्तम उपचार मिल सके।”
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