सिटी डेस्क, Taj News | Published by: ठाकुर पवन सिंह | Updated: Wednesday, 04 Feb 2026 03:15 PM IST
आगरा (Agra): ताजनगरी आगरा (Agra) के पिनाहट क्षेत्र से एक दिल को झकझोर देने वाली और चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई है। यहां कुत्ते के काटने (Dog Bite) का शिकार हुए 5 साल के मासूम बच्चे की इलाज के दौरान दर्दनाक मौत हो गई। रोंगटे खड़े कर देने वाली बात यह है कि परिजनों ने बच्चे को एंटी रैबीज वैक्सीन (Anti-Rabies Vaccine) की तीन डोज लगवाई थीं, लेकिन इसके बावजूद जहर (Virus) उसके पूरे शरीर में फैल गया।
बच्चे की हालत इतनी खराब हो गई थी कि अंतिम समय में वह कुत्तों जैसी हरकतें करने लगा था—भौंकने की आवाज निकालना और पानी से डरना (Hydrophobia)। पिता उसे लेकर आगरा से दिल्ली तक भटके, लेकिन डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

Agra Rabies Death: क्या है पूरा मामला?
यह दुखद घटना आगरा जिले के पिनाहट थाना क्षेत्र (Pinahat Police Station) के गांव अतैयापुरा (Ataiyapura) की है। यहां कुंवर सिंह अपने परिवार के साथ रहते हैं। उनके परिवार में पत्नी मनीषा और तीन बच्चे—सुरभि (10), मोहित (8) और सबसे छोटा 5 वर्षीय छोटू थे। हंसते-खेलते परिवार की खुशियों को 9 जनवरी की शाम किसी की नजर लग गई।

कुंवर सिंह ने बताया कि 9 जनवरी को वह किसी काम से गांव से बाहर गए हुए थे। घर पर उनकी पत्नी और बच्चे मौजूद थे। शाम के वक्त उनका सबसे छोटा बेटा छोटू घर के बाहर खेल रहा था। तभी अचानक वहां एक पागल कुत्ता आ गया। कुत्ते को अपनी तरफ आते देख छोटू डर गया और हड़बड़ाहट में जमीन पर गिर पड़ा। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, कुत्ते ने मासूम छोटू पर हमला कर दिया और उसके सिर और चेहरे (Head and Face) पर बुरी तरह काट लिया।
लापरवाही की शुरुआत: सरकारी अस्पताल से टरकाया
बच्चे की चीख-पुकार सुनकर मां मनीषा और आसपास के लोग दौड़े। खून से लथपथ हालत में परिजन आनन-फानन में उसे लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), पिनाहट पहुंचे। यहीं से लापरवाही और सिस्टम की बेरुखी का सिलसिला शुरू हुआ। मां मनीषा का आरोप है कि सीएचसी पर डॉक्टरों ने बच्चे को ठीक से देखा तक नहीं। उन्होंने केवल पर्चा बनाकर उन्हें टरका दिया। मजबूरन, घबराए हुए परिजन बच्चे को लेकर एक प्राइवेट अस्पताल गए और बाहर से महंगे इंजेक्शन खरीदकर उसे लगवाए।
3 इंजेक्शन के बाद भी फैला जहर
पिता कुंवर सिंह ने बताया कि डॉक्टरों की सलाह पर उन्होंने टीकाकरण शुरू किया:
- पहली डोज: 9 जनवरी (घटना वाले दिन)।
- दूसरी डोज: 12 जनवरी।
- तीसरी डोज: 16 जनवरी।
तीसरी डोज लगने तक सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन इसके तुरंत बाद बच्चे को तेज बुखार आ गया। बुखार के साथ-साथ उसके व्यवहार में अजीब बदलाव आने लगे। वह पानी देखकर डरने लगा, अजीब आवाज़ें निकालने लगा और आक्रामक होने लगा। यह रैबीज के स्पष्ट लक्षण थे।
आगरा से दिल्ली तक की दौड़, पर नहीं बची जान
बेटे की बिगड़ती हालत देख पिता उसे 17 जनवरी को आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज (SN Medical College) ले गए। वहां दो दिन तक भर्ती रखने के बाद भी जब कोई सुधार नहीं हुआ, तो वे उसे घर ले आए। लेकिन 26 जनवरी को हालत और ज्यादा बिगड़ गई। दोबारा आगरा ले जाने पर डॉक्टरों ने जवाब दे दिया और स्पष्ट कह दिया कि अब बचने की उम्मीद ना के बराबर है।
एक पिता की आस नहीं टूटी और वे 27 जनवरी को बच्चे को लेकर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल (Safdarjung Hospital) पहुंचे। वहां भी डॉक्टरों ने जांच के बाद निराशाजनक उत्तर दिया। कुंवर सिंह ने भावुक होकर बताया, “वहां किसी डॉक्टर ने दबी जुबान में कहा कि बच्चे की तकलीफ बहुत ज्यादा है, इसे जहर का इंजेक्शन दे दो क्योंकि अब जहर ही जहर को काटेगा।” यह सुनकर पिता का कलेजा फट गया। वे रात में ही बच्चे को डिस्चार्ज कराकर वापस गांव ले आए।
आखिरकार, 1 फरवरी को मासूम छोटू जिंदगी की जंग हार गया। रैबीज के संक्रमण ने उसके नर्वस सिस्टम को पूरी तरह बर्बाद कर दिया था। रविवार को गमगीन माहौल में उसका अंतिम संस्कार किया गया।

विशेषज्ञों की राय: चेहरे पर काटना क्यों है खतरनाक?
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, रैबीज का वायरस नसों के जरिए दिमाग तक पहुंचता है।
- दूरी का महत्व: अगर कुत्ता पैर में काटता है, तो वायरस को दिमाग तक पहुंचने में समय लगता है। लेकिन, छोटू के मामले में कुत्ते ने सिर और चेहरे पर काटा था। यह ‘कैटगरी-3’ (Category-3) का बाइट है।
- सीरम की जरूरत: ऐसे मामलों में केवल वैक्सीन काफी नहीं होती। घाव के चारों तरफ इम्युनोग्लोबुलिन (Immunoglobulin/Rabies Serum) का इंजेक्शन लगाना अनिवार्य होता है, जो तुरंत वायरस को निष्क्रिय करता है।
- लापरवाही का सवाल: बड़ा सवाल यह है कि क्या पिनाहट सीएचसी या प्राइवेट डॉक्टर ने बच्चे को यह सीरम दिया था? अगर चेहरे पर काटने के बावजूद सिर्फ साधारण वैक्सीन लगाई गई, तो यह एक गंभीर चिकित्सीय चूक (Medical Negligence) हो सकती है।
गांव में दहशत: कुत्ते ने ली भैंस की भी जान
इस घटना के बाद से अतैयापुरा गांव में खौफ का माहौल है। स्थानीय निवासी ममता ने बताया कि उसी पागल कुत्ते ने 7 जनवरी को उनकी भैंस को भी काटा था, जिसकी दो दिन बाद मौत हो गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि वह पागल कुत्ता अभी भी इलाके में सक्रिय है और रात के समय घरों की छतों पर घूमता देखा गया है। प्रशासन की ओर से आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों की जान खतरे में है।
प्रशासन का पक्ष
पिनाहट सीएचसी के प्रभारी डॉ. प्रमोद कुशवाहा ने कहा कि बच्चे को एंटी रैबीज वैक्सीन लगाई गई थी। हालांकि, वैक्सीन के बाद भी मौत क्यों हुई, इसकी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि मामले की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है।

सावधान रहें: रैबीज का कोई इलाज नहीं, सिर्फ बचाव है
यह घटना हम सभी के लिए एक चेतावनी है। रैबीज 100% जानलेवा बीमारी है। लक्षण दिखने के बाद दुनिया में इसका कोई इलाज नहीं है।
- घाव को धोएं: कुत्ते के काटने पर तुरंत घाव को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोएं।
- तत्काल डॉक्टर के पास जाएं: झाड़-फूंक या घरेलू नुस्खों में वक्त बर्बाद न करें।
- पूरा कोर्स: वैक्सीन का पूरा कोर्स (0, 3, 7, 14, 28 दिन) पूरा करें।
- सीरम: अगर घाव गहरा है या गर्दन से ऊपर है, तो डॉक्टर से ‘रैबीज सीरम’ की मांग जरूर करें।
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