Published: Thursday, 08 January 2026, 05:30 AM IST | Lucknow
UP में पंचायत चुनाव (Panchayat elections in UP) का इंतजार कर रहे दावेदारों को बड़ा झटका लग सकता है। प्रदेश में इसी साल अप्रैल-मई में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव टलने के संकेत मिल रहे हैं। इसकी मुख्य वजह ‘समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग’ (Dedicated Backward Classes Commission) का अब तक गठित न होना है। आयोग के बिना ओबीसी (OBC) आरक्षण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती, जिसके चलते चुनाव की तारीखें आगे खिसक सकती हैं।

UP में पंचायत चुनाव: क्यों फंसा है पेंच?
पंचायतीराज विभाग ने छह सदस्यीय आयोग के गठन का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है, लेकिन अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ है। नगर निकाय चुनाव की तरह ही पंचायत चुनाव में भी ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए समर्पित आयोग की रिपोर्ट जरूरी है। यह आयोग जिलों में जाकर ओबीसी आबादी का ‘ट्रिपल टेस्ट’ सर्वे करेगा, जिसमें कम से कम दो महीने का समय लग सकता है। ऐसे में UP में पंचायत चुनाव की अप्रैल-मई की समयसीमा पर संकट गहरा गया है।
मंत्री राजभर का दावा: समय पर होंगे चुनाव
भले ही प्रशासनिक देरी हो रही हो, लेकिन पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) का दावा है कि UP में पंचायत चुनाव अपने तय समय पर ही होंगे। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री से मिलकर आयोग गठन की प्रक्रिया पूरी कराएंगे।
क्या है आरक्षण का गणित?
नियम के मुताबिक, प्रदेश स्तर पर ओबीसी के लिए 27% आरक्षण अनिवार्य है। हालांकि, किसी भी ब्लॉक में ओबीसी की आबादी चाहे जितनी भी हो, ग्राम प्रधान के पद 27% से ज्यादा आरक्षित नहीं हो सकते। एससी/एसटी के लिए 2011 की जनगणना के आधार पर सीटें तय होंगी, लेकिन ओबीसी का पेच फंसा हुआ है।
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