Rajkumar Chahar in Parliament

Wednesday, 03 December 2025, 4:11:45 PM. Agra, Uttar Pradesh

आगरा—ताजमहल की रोशनी दुनिया को भले ही चमत्कृत करती हो, लेकिन आगरा की धरती पर रहने वाले लाखों लोगों के लिए यह चमक कई दशकों से एक ऐसे बोझ के रूप में मौजूद है, जिसने शहर के औद्योगिक दमघोंटू माहौल को स्थाई रूप से रोक दिया है। यह बात लोकसभा के शीतकालीन सत्र में फतेहपुर सीकरी के सांसद एवं भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार चाहर ने बेहद कठोर, लेकिन यथार्थवादी शब्दों में रखी।

सांसद चाहर ने कहा कि ताजमहल की सुंदरता आगरा की पहचान है, लेकिन यही पहचान अब “शाप” में बदल गई है। ताज ट्रेपेज़ियम ज़ोन (TTZ) के कठोर पर्यावरणीय नियमों और एनजीटी की सख़्त पाबंदियों ने आगरा में उद्योग और फैक्ट्रियों की स्थापना को लगभग असंभव बना दिया है। यही कारण है कि शहर का युवा आज बेरोजगारी, पलायन और आर्थिक असुरक्षा से जूझ रहा है।

उनके शब्दों में—
“ताजमहल वैश्विक धरोहर है… लेकिन अगर इस धरोहर को बचाने के नाम पर पूरे आगरा के विकास को जकड़ दिया जाए, तो यह आगरा की जनता के साथ अन्याय है।”

यही भावनाएँ सदन में इतनी स्पष्टता के साथ शायद ही पहले कभी व्यक्त हुई हों।

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ताजमहल की सुरक्षा के नाम पर थमी आगरा की औद्योगिक सांस

आगरा कभी चमड़े, जूते, पेथर, काष्ठ और ग्लास इंडस्ट्री का बड़ा केंद्र था। लेकिन 1983 से लेकर आज तक पर्यावरणीय नियमों की कड़ाई ने धीरे-धीरे पूरे शहर के औद्योगिक तंत्र को लगभग निष्क्रिय कर दिया।

TTZ के 50 किलोमीटर के दायरे में:

  • नए उद्योगों की स्थापना प्रतिबंधित
  • पुरानी फैक्ट्रियों के विस्तार पर रोक
  • निर्माण इकाइयों के लिए प्रदूषण से संबंधित अनुमति लगभग असंभव
  • कोयले आधारित, गैस आधारित और धुएँ वाले अधिकांश उद्योग बंद

इसका सीधा परिणाम यह हुआ कि—

“आगरा का युवा Noida–Gurugram–Delhi भागने को मजबूर हो गया।”

जो शहर दुनिया के करोड़ों सैलानियों को आकर्षित करता है, वही शहर आज स्वयं विकास की मुख्यधारा में पिछड़ चुका है।

Rajkumar Chahar

सांसद चाहर ने लोकसभा में पूछा—“क्या आगरा का विकास हमेशा ताजमहल की कीमत पर रुकेगा?”

लोकसभा में अपनी बात रखते हुए सांसद राजकुमार चाहर ने बहुत स्पष्ट प्रश्न उठाया—

“जब आगरा में उद्योग नहीं लग सकते… तो युवाओं के लिए रोजगार कैसे पैदा होगा? जब विकास थम चुका है, तो आगरा सिर्फ पर्यटन के भरोसे कितने दिन चलेगा?”

उन्होंने यह भी कहा कि:

  • आगरा की भौगोलिक स्थिति देश में सर्वश्रेष्ठ है।
  • चार एक्सप्रेसवे इसे देश के प्रमुख महानगरों से जोड़ते हैं।
  • दिल्ली—आगरा—लखनऊ—ग्वालियर—जयपुर कनेक्टिविटी शानदार है।

फिर भी शहर विकास की दौड़ में पीछे रह गया है।

PM Narendra Modi and Rajkumar Chahar MP

आगरा बने भारत का प्रमुख IT हब — चाहर की ऐतिहासिक मांग

सांसद चाहर ने सदन में केंद्र सरकार से मांग की कि:

“जब उद्योगों पर प्रतिबंध है, तो आगरा को IT हब घोषित किया जाए।”

यह मांग केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि वास्तविकताओं पर आधारित है। कारण:

  • आईटी सेक्टर प्रदूषण नहीं पैदा करता
  • बड़े कैंपस, टेक कंपनियाँ और स्टार्टअप बिना पर्यावरणीय नुकसान के स्थापित हो सकते हैं
  • युवाओं को हाई-पैकेज नौकरियाँ मिल सकती हैं
  • पर्यटन + IT मॉडल आगरा को दोहरे विकास की दिशा दे सकता है
  • नोएडा और गुरुग्राम की दूरी कम होने के कारण टैलेंट आसानी से उपलब्ध

आगरा के लोग वर्षों से मांग कर रहे हैं कि ताजमहल को सुरक्षित रखते हुए शहर को विकास से वंचित नहीं किया जाए। सांसद चाहर की यह मांग, पहली बार इतने सशक्त तरीके से सदन के भीतर दर्ज की गई है।


ताजमहल बचाना जरूरी, लेकिन आगरा को कुर्बानी देना क्यों पड़े?

आगरा के पर्यटन व्यवसाय से शहर में करोड़ों का राजस्व आता है, यह सही है।
लेकिन:

  • पर्यटन मौसम पर निर्भर
  • नौकरियाँ अस्थिर
  • कम वेतन
  • काम का दायरा सीमित

नतीजतन—

“शहर आर्थिक रूप से स्थिर नहीं, बल्कि नाजुक स्थिति में है।”

सांसद चाहर के शब्दों में:

“ऐसा मॉडल विकसित किया जाए, जहाँ ताजमहल भी चमके और आगरा का युवा भी।”

यह बात वर्षों से आगरा के नागरिकों के भीतर दबी हुई थी, जिसे अब पहली बार संसद के मंच से मजबूती से कहा गया।

बेरोजगारी की सबसे बड़ी मार आगरा के युवाओं पर

आगरा का युवा पिछले दो दशकों से एक ऐसी उलझन में जी रहा है, जहाँ शहर का नाम दुनिया जानता है लेकिन यहाँ रहने वाले युवाओं के लिए अवसर सीमित हैं।
रिपोर्ट बताती है कि—

  • आगरा में बेरोजगारी दर उत्तर भारत में प्रमुख शहरों की तुलना में अधिक है
  • 12वीं और ग्रेजुएट युवाओं का बड़ा हिस्सा NCR की ओर पलायन को मजबूर
  • स्थानीय रोजगार न होने से परिवार टूट रहे हैं, सामाजिक संरचना पर दबाव बढ़ा
  • स्किल्ड वर्कफोर्स तैयार होने पर भी शहर में अवसर नहीं

यह विडंबना है कि जहाँ दुनिया आगरा को एक विश्व-स्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में देखती है, वहीं स्थानीय युवा अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं।


आगरा का भौगोलिक लाभ — पूरे उत्तर भारत का सबसे श्रेष्ठ कनेक्टिविटी ज़ोन

सांसद चाहर के अनुसार आगरा भारत के उन कुछ शहरों में से एक है जिसकी सड़क और रेल कनेक्टिविटी अद्वितीय है।

आगरा को जोड़ने वाले प्रमुख एक्सप्रेसवे:

  • यमुना एक्सप्रेसवे (दिल्ली–आगरा)
  • आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे
  • आगरा–ग्वालियर नया एक्सप्रेसवे
  • आगरा–जयपुर हाईवे

इसके अलावा:

  • दिल्ली से आगरा: मात्र 3 घंटे
  • लखनऊ से आगरा: 4 घंटे
  • जयपुर से आगरा: 4 घंटे
  • ग्वालियर से आगरा: 2 घंटे

ऐसी कनेक्टिविटी का फायदा दुनिया में बहुत कम शहरों को मिलता है।
फिर भी उद्योग न होने के कारण इन अवसरों का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा।


क्यों आगरा औद्योगिक केंद्र नहीं बन पाया?

इस प्रश्न का उत्तर सांसद चाहर ने बिल्कुल स्पष्ट दिया —
“क्योंकि ताजमहल को बचाने के नाम पर उद्योगों को कुर्बान कर दिया गया।”

1983 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा TTZ के गठन के बाद से:

  • कोयले, पेट्रोलियम आधारित उद्योग बंद
  • भारी कारखानों पर रोक
  • निर्माण यूनिटों की क्षमता सीमित
  • गैस आधारित उद्योगों को भी कड़ी निगरानी में रखा गया
  • धुएँ वाले उद्योगों को बाहर शिफ्ट करने का आदेश
  • ग्लास इंडस्ट्री लगभग समाप्त

इन सभी नियमों का उद्देश्य ताजमहल की सुरक्षा था, लेकिन आगरा के आर्थिक तंत्र को इसका भारी नुकसान उठाना पड़ा।

आज यह समस्या और गहरी है क्योंकि—

न नए उद्योग आ सकते हैं, न ही पुरानी फैक्ट्रियाँ विकसित हो सकती हैं।


आगरा में IT हब — क्यों यह सबसे बेहतर विकल्प है?

सांसद चाहर की मांग केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि व्यावहारिक है।

एक IT हब के लिए जिन प्रमुख तत्वों की आवश्यकता है, वे सब आगरा में पहले से मौजूद हैं:

  • IT सेक्टर में प्रदूषण नहीं होता
  • किफायती रियल एस्टेट
  • हाईवे कनेक्टिविटी
  • एयरपोर्ट (आगामी वर्षों में विस्तारित प्रस्ताव)
  • स्किल्ड युवाओं की उपलब्धता
  • NCR का निकटतम बड़ा विकल्प

अगर आगरा में IT पार्क स्थापित हो:

  • 25,000–50,000 नौकरियाँ अगले 5 साल में
  • 1.5–2 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार
  • होटल, परिवहन, कैफे और किराए की संपत्ति का विकास
  • मल्टीनेशनल कंपनियों का आगमन
  • विदेशी निवेश में बढ़ोतरी

और सबसे बड़ी बात —
ताजमहल पर कोई पर्यावरणीय खतरा भी नहीं।


TTZ प्रतिबंधों के कारण शहर में पड़े आर्थिक प्रभाव

TTZ का उद्देश्य ताजमहल को प्रदूषण से बचाना है, इसमें कोई संदेह नहीं।
लेकिन इसके दुष्प्रभाव इतने व्यापक रहे हैं कि—

  • हजारों उद्योग बंद हो गए
  • लाखों कारीगर पलायन कर गए
  • लेदर–फुटवियर सेक्टर कमजोर पड़ा
  • काच (ग्लास) उद्योग लगभग लुप्त
  • फैक्ट्री मालिक दिवालिया हो गए
  • नए निवेशक आगरा से दूर हो गए

पर्यटन शहर के लिए काफी नहीं।
यह मौसमी है, स्थाई नहीं।

इसलिए चाहर का यह प्रश्न एकदम तार्किक है—

“क्या ताजमहल की सुरक्षा के नाम पर आगरा के 30 लाख लोगों का भविष्य रोका जाएगा?”


सामाजिक प्रभाव — जब बेरोजगारी घर-घर पहुँच जाए

आर्थिक संकट केवल फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज की जड़ों तक जा पहुँचा—

  • युवाओं में निराशा बढ़ी
  • अपराध दर में वृद्धि
  • कौशल विकास के बाद भी नौकरी नहीं
  • लोग NCR में कम वेतन वाली नौकरियों पर मजबूर
  • शहर का प्रतिभाशाली वर्ग आगरा छोड़ने पर विवश

अगर आगरा IT हब बनता है, तो यह स्थिति तेजी से बदल सकती है।


सांसद चाहर की मांग — “ताजमहल भी रहे, आगरा भी विकसित हो”

यह पहला अवसर है जब किसी सांसद ने संसद के भीतर इतनी स्पष्टता और दृढ़ता से आगरा की आर्थिक दुर्दशा को उजागर किया है।

उनकी मांगें:

  1. आगरा को तत्काल IT हब घोषित किया जाए
  2. IT पार्क के लिए स्पेशल ज़ोन बनाया जाए
  3. युवाओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाए
  4. विदेशी कंपनियों को आगरा में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाए
  5. ताजमहल की सुरक्षा बनी रहे, लेकिन विकास बाधित न हो

यह मांग केवल एक राजनीतिक वक्तव्य नहीं—
बल्कि एक ऐसे शहर की आवाज़ है जो वर्षों से विकास की प्रतीक्षा कर रहा है।


ताजमहल के साथ–साथ आगरा के भविष्य की रक्षा भी जरूरी

दुनिया का सातवाँ आश्चर्य ताजमहल आगरा का गर्व है।
लेकिन किसी भी शहर का गर्व तभी अर्थपूर्ण होता है, जब वहाँ के नागरिक खुशहाल हों।

आज आगरा का युवा पूछ रहा है—

  • “क्या हमारा भविष्य केवल पर्यटन पर निर्भर रहेगा?”
  • “क्या हम अपने ही शहर में उद्योग स्थापित नहीं कर सकते?”
  • “क्या विकास की रफ्तार हमेशा ताजमहल की कीमत पर रुकेगी?”

सांसद चाहर ने यही सवाल सदन में रखा है, जो आगरा ही नहीं, पूरे ब्रज क्षेत्र की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है।


आगरा में IT हब बनने से क्या-क्या बदल जाएगा?

अगर केंद्र सरकार इस प्रस्ताव पर अमल करती है, तो आगरा का भविष्य इस प्रकार बदलेगा—

  • आगरा NCR के बराबर IT सर्किट में शामिल होगा
  • युवा शहर से बाहर नहीं जाएंगे
  • मल्टीनेशनल कंपनियाँ निवेश शुरू करेंगी
  • पर्यटन + टेक्नोलॉजी = आर्थिक रूप से सबसे मजबूत मॉडल
  • आगरा उत्तर भारत का सबसे बड़ा टेक शहर बन सकता है
  • मेट्रो विस्तार और एयरपोर्ट उन्नयन की गति तेज होगी
  • रियल एस्टेट और कनेक्टिविटी में बूम आएगा

यह बदलाव आगरा को अगली पीढ़ी का शहर बना देगा।


आगरा के हर नागरिक की आवाज़ संसद तक पहुँची

सांसद राजकुमार चाहर ने जो मुद्दा उठाया है, वह आगरा की जनता की वर्षों पुरानी पीड़ा है।
यह पहली बार है कि किसी जनप्रतिनिधि ने ताजमहल की सुरक्षा और आगरा के विकास—दोनों को एक साथ देखने की दृष्टि प्रस्तुत की है।

ताजमहल की छाया में दबे आगरा के विकास की पुकार, संसद के भीतर गूंज उठी।

क्या ताजमहल की सुरक्षा और आगरा का विकास एक साथ संभव नहीं?

सांसद चाहर के भाषण के बाद सोशल मीडिया, स्थानीय व्यावसायिक संगठनों और नीति विशेषज्ञों के बीच एक नई बहस शुरू हो गई है—
क्या ताजमहल की सुंदरता बचाते हुए आगरा को पुनर्जीवित किया जा सकता है?

विशेषज्ञों की राय में यह बिल्कुल संभव है, यदि सरकार संतुलित नीति लेकर आए।
भारत के कई शहरों में प्रदूषण-रहित टेक इंडस्ट्री और पर्यटन साथ-साथ फले-फूले हैं:

  • बेंगलुरु — गार्डन सिटी + IT कैपिटल
  • पुणे — सांस्कृतिक विरासत + टेक हब
  • जयपुर — हैरिटेज सिटी + स्टार्टअप इकोसिस्टम
  • हैदराबाद — ऐतिहासिक स्मारक + ग्लोबल टेक हब

फिर आगरा क्यों पीछे रहे?


TTZ कानूनों का संशोधन — क्या केंद्रीय सरकार कोई राह निकाल सकती है?

TTZ को 41 साल पहले ताजमहल की सुरक्षा के लिए बनाया गया था।
लेकिन आज 2025 में टेक्नोलॉजी, पर्यावरण नियंत्रण और ऊर्जा-प्रबंधन की क्षमता 1983 से कई गुना अधिक है।

पर्यावरणविदों ने सुझाव दिए हैं:

  • ग्रीन टेक इंडस्ट्री को TTZ में अनुमति दी जाए
  • गैस-आधारित या इलेक्ट्रिक आधारित उत्पादन इकाइयों को छूट दी जाए
  • IT और सर्विस सेक्टर को पूर्ण अनुमति मिले
  • एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम और सैटेलाइट आधारित सुरक्षा से स्मारक की रक्षा की जा सकती है

इन सुझावों के आधार पर सरकार “TTZ मॉडर्नाइजेशन कमेटी” बनाए, यह मांग भी उठ रही है।


आगरा के युवा क्या सोचते हैं?

सांसद चाहर की लोकसभा में उठी मांग का सबसे अधिक प्रभाव युवाओं पर हुआ।
ताज न्यूज़ द्वारा किए गए छोटे सर्वे में कई प्रतिक्रियाएँ सामने आईं:

  • “हमारी पढ़ाई आगरा में होती है, नौकरी दिल्ली में तलाशनी पड़ती है।”
  • “आईटी पार्क खुल जाए, तो हमें अपने शहर छोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी।”
  • “हमें विकास चाहिए, पर ताजमहल भी सुरक्षित रहना चाहिए।”
  • “हर साल लाखों टूरिस्ट आते हैं, पर शहर के लोग अभी भी पीछे हैं।”

यह प्रतिक्रियाएँ सिर्फ राय नहीं—
आगरा की नई पीढ़ी के सपनों का प्रतिबिंब हैं।


स्थानीय व्यापारी और उद्योगपति क्या कहते हैं?

कई दशकों से उद्योगों पर लगे प्रतिबंधों के कारण:

  • अगल–बगल के शहरों (फिरोजाबाद, मथुरा, अलीगढ़, नोएडा) में उद्योग बढ़े
  • जबकि आगरा आर्थिक रूप से पीछे रह गया
  • व्यापारियों ने कई बार TTZ में बदलाव की मांग की, पर ठोस निर्णय नहीं हुआ

अब सांसद चाहर की मांग ने व्यापारियों की उम्मीद जागृत कर दी है।
आगरा के प्रमुख बाजारों में इस मुद्दे पर चर्चा बढ़ी है—
संजय प्लेस, बिजलीघर, हरीपर्वत, सदर, फतेहाबाद रोड, ताजगंज और मंटोला में व्यापारी इस मसले को बड़ी उम्मीद से देख रहे हैं।


पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था की सीमाएँ — आगरा को दूसरा सहारा चाहिए

आगरा की अर्थव्यवस्था का 65% हिस्सा पर्यटन और उससे जुड़े व्यवसायों पर निर्भर है।
लेकिन पर्यटन की बड़ी समस्याएँ हैं:

  • सीजनल इनकम
  • महंगे होटल व टैक्सी पर कमीशन सिस्टम
  • पर्यटक सिर्फ 2–3 घंटे शहर में बिताते हैं
  • बड़ी राशि दिल्ली–जयपुर के ट्रैवल सर्किट में खर्च होती है
  • स्थानीय कारीगरों को उचित लाभ नहीं मिलता

टिकाऊ विकास केवल पर्यटन से संभव नहीं।
इसलिए IT हब आगरा के आर्थिक ढाँचे को दूसरी मजबूत रीढ़ दे सकता है।


आगरा का कारीगर — दुनिया में मशहूर, पर शहर में उपेक्षित

आगरा के लेदर, फुटवियर और मार्बल कारीगर दुनिया में पहचान रखते हैं।
लेकिन TTZ के कारण:

  • उत्पादन क्षमता घट गई
  • कारीगरों की आय कम हुई
  • परिवार NCR और राजस्थान पलायन को मजबूर हुए
  • युवा पीढ़ी ने पारंपरिक कला छोड़ दी

IT हब आने से:

  • कारीगरों के बच्चों को डिजिटल शिक्षा मिलेगी
  • डिज़ाइन, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के ऑनलाइन अवसर खुलेंगे
  • स्थानीय कला को अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म मिलेगा

इस तरह IT सेक्टर अप्रत्यक्ष रूप से कारीगर समुदाय को भी नया जीवन देगा।


पर्यटन + आईटी = आगरा का सुनहरा भविष्य

यदि दोनों क्षेत्र साथ मिलें, तो आगरा भारत का एक अनोखा शहर बन सकता है:

  • “टेक एंड टूरिज़्म कैपिटल”
  • दुनिया के बड़े टेक ब्रांड्स आगरा में निवेश करेंगे
  • विदेशी पर्यटक सिर्फ ताजमहल नहीं, टेक–इनोवेशन पार्क भी देखेंगे
  • युवाओं को स्किल-डेवलपमेंट सेंटर मिलेंगे
  • अगरा की GDP कई गुना बढ़ जाएगी

सांसद चाहर की यह परिकल्पना एक विज़न है—
“आगरा सिर्फ एक स्मारक का शहर नहीं, बल्कि भविष्य की राजधानी बने।”


केंद्र सरकार का रुख क्या होगा?

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार:

  • सरकार 2025–26 में IT सेक्टर को बढ़ाने की बड़ी नीति लाने वाली है
  • यूपी सरकार पहले ही “IT शहरों की त्रिमूर्ति” (नोएडा, लखनऊ, कानपुर) पर काम कर रही है
  • आगरा को इसमें शामिल करना आसान और लाभकारी होगा
  • 2026–27 में कई विदेशी निवेशक यूपी की ओर रुचि दिखा रहे हैं

इसलिए आगरा को IT हब बनाने की संभावना पहले से ज्यादा मजबूत है।


आगरा का IT हब बनना केवल नौकरी नहीं—एक सांस्कृतिक बदलाव भी होगा

जब कोई शहर IT हब बनता है, तो वहाँ:

  • उच्च शिक्षा का स्तर बढ़ता है
  • अंग्रेज़ी–हिंदी दोनों भाषाओं में अवसर
  • महिला रोजगार में अभूतपूर्व वृद्धि
  • स्टार्टअप कल्चर विकसित
  • स्मार्ट सिटी परियोजनाएँ तेज
  • नए कैफे, को-वर्किंग स्पेस, मल्टीनेशनल कंपनियाँ
  • युवा सोच में आधुनिकता और अवसर

यह बदलाव आगरा को नई पहचान देगा।


आगरा का प्रश्न अब राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है

सांसद चाहर का यह बयान केवल आगरा की आवाज़ नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत के मध्यम आकार के शहरों के लिए एक मिसाल है।
विकास और विरासत—दोनों साथ चल सकते हैं, इसका प्रमाण दुनिया में कई जगह है।

अब आगरा की बारी है।

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✍️ संपादन: ठाकुर पवन सिंह
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