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चैत्र नवरात्रि 2026 प्रारंभ: पहले दिन करें मां शैलपुत्री की पूजा, जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, अचूक विधि और मंत्र

धर्म-कर्म

Astro Desk, Taj News | Thursday, 19 March 2026, 04:11:00 AM IST

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विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक कवरेज

चैत्र नवरात्रि पहला दिन (Chaitra Navratri Day 1): सनातन धर्म में चैत्र नवरात्रि का अत्यंत विशेष महत्व है। आज 19 मार्च 2026 से चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व शुरू हो गया है। इसके साथ ही, आज से हिंदू नववर्ष (नव संवत्सर) की भी शुरुआत होती है। भक्तगण नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूरे विधि-विधान से आराधना करते हैं। नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को पूरी तरह समर्पित होता है। माता शैलपुत्री हिमालय राज की पुत्री हैं। इसलिए, उनका यह नाम पड़ा। आज के दिन भक्त अपने घरों में घटस्थापना (कलश स्थापना) करते हैं। इसके बाद वे माता की पूजा-अर्चना शुरू करते हैं। यह समय शक्ति की उपासना का सबसे उत्तम और पवित्र समय है। आइए विस्तार से जानते हैं कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, मां शैलपुत्री की पूजा विधि, उनका प्रिय भोग और अचूक मंत्र।

नवरात्रि प्रथम दिन के HIGHLIGHTS
  • कलश स्थापना मुहूर्त: आज सुबह घटस्थापना का अत्यंत शुभ मुहूर्त बन रहा है। भक्तगण शुभ मुहूर्त में ही कलश स्थापित करें।
  • मां शैलपुत्री का स्वरूप: माता के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल सुशोभित है। उनका वाहन वृषभ (बैल) है।
  • पसंदीदा रंग और भोग: मां शैलपुत्री को सफेद रंग बेहद प्रिय है। इसलिए, उन्हें गाय के शुद्ध घी या सफेद मिठाई का भोग जरूर लगाएं।
  • अचूक मंत्र: ‘ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करना अत्यंत फलदायी होता है। इससे सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व

चैत्र नवरात्रि केवल एक त्योहार नहीं है। बल्कि, यह प्रकृति के बदलाव और नई ऊर्जा का प्रतीक है। आज से वसंत ऋतु अपना पूर्ण प्रभाव दिखाती है। इसके अलावा, ब्रह्मांड में एक नई सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मान्यता है कि भगवान ब्रह्मा ने इसी दिन से सृष्टि की रचना शुरू की थी। इसलिए, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही हिंदू नववर्ष मनाया जाता है। भक्तगण इन नौ दिनों में उपवास रखते हैं। वे अपने मन और शरीर को शुद्ध करते हैं। नतीजतन, उनके भीतर आध्यात्मिक शक्ति का विकास होता है। घर में माता रानी की ज्योति जलाने से सभी नकारात्मक ऊर्जाएं हमेशा के लिए नष्ट हो जाती हैं।

कलश स्थापना (घटस्थापना) का शुभ मुहूर्त

नवरात्रि में कलश स्थापना का सबसे अधिक महत्व होता है। कलश को भगवान गणेश और सभी तीर्थों का प्रतीक माना जाता है। इसलिए, शुभ मुहूर्त में ही कलश स्थापित करना चाहिए। आगरा के समय और पंचांग के अनुसार आज 19 मार्च 2026 को घटस्थापना के लिए विशेष मुहूर्त बन रहा है।

कलश स्थापना मुहूर्त (19 मार्च 2026)
प्रातः काल शुभ मुहूर्त सुबह 06:15 AM से सुबह 07:45 AM तक
अभिजीत मुहूर्त (अत्यंत शुभ) दोपहर 12:05 PM से 12:53 PM तक
कलश की दिशा (वास्तु) ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा)

कलश स्थापना की अचूक और सरल विधि

कलश स्थापना हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा में करनी चाहिए। सबसे पहले आप स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें। अब एक लकड़ी की चौकी पर लाल रंग का साफ वस्त्र बिछाएं। चौकी पर थोड़े से चावल (अक्षत) रखकर अष्टदल कमल बनाएं। इसके ऊपर मिट्टी या तांबे का कलश स्थापित करें। कलश के अंदर शुद्ध जल भरें। उसमें गंगाजल, एक सिक्का, लौंग, इलायची, सुपारी और दूर्वा डालें। अब कलश के मुख पर आम या अशोक के पांच पत्ते रखें। इसके ऊपर एक नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर रखें। अंत में कलश पर कलावा बांधें और कुमकुम से स्वास्तिक बनाएं। कलश स्थापना के बाद अखंड ज्योति प्रज्वलित करें।

मां शैलपुत्री का दिव्य स्वरूप और कथा

नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री का होता है। पर्वतराज हिमालय के घर जन्म लेने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। पूर्व जन्म में ये राजा दक्ष की पुत्री सती थीं। सती ने भगवान शिव से विवाह किया था। लेकिन, दक्ष ने शिव का भारी अपमान किया। फलस्वरूप, सती ने योगाग्नि में अपना शरीर भस्म कर दिया। इसके बाद उन्होंने हिमालय के घर पार्वती (शैलपुत्री) के रूप में जन्म लिया। मां शैलपुत्री का स्वरूप अत्यंत सौम्य और शांत है। वे वृषभ (बैल) पर सवारी करती हैं। उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल है, जो धर्म का प्रतीक है। वहीं, बाएं हाथ में कमल का फूल है, जो शांति और ज्ञान को दर्शाता है। माता के माथे पर अर्धचंद्र सुशोभित है।

मां शैलपुत्री की संपूर्ण पूजा विधि

मां शैलपुत्री की पूजा अत्यंत सरल है। सबसे पहले कलश स्थापना करें। इसके बाद भगवान गणेश का ध्यान करें। अब मां शैलपुत्री की प्रतिमा या तस्वीर को गंगाजल से स्नान कराएं। माता को लाल या सफेद रंग के वस्त्र अर्पित करें। इसके बाद उन्हें कुमकुम का तिलक लगाएं। माता को लाल अक्षत, सफेद फूल, सिंदूर, धूप और दीप अर्पित करें। मां शैलपुत्री को सफेद रंग बहुत प्रिय है। इसलिए, पूजा में सफेद फूलों का विशेष रूप से उपयोग करें। माता को गाय के शुद्ध घी या सफेद रसगुल्ले का भोग लगाएं। इसके बाद दुर्गा चालीसा का पाठ करें। अंत में माता की आरती उतारें और अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना करें।

मां शैलपुत्री के अचूक और चमत्कारी मंत्र

माता को प्रसन्न करने के लिए मंत्र जाप सबसे उत्तम माध्यम है। आप रुद्राक्ष या स्फटिक की माला से इन मंत्रों का 108 बार जाप करें। इससे माता शीघ्र प्रसन्न होती हैं।

1. ध्यान मंत्र:
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

2. बीज मंत्र:
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नमः।

3. स्तुति मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

ज्योतिषीय लाभ: चंद्रमा के दोष होते हैं दूर

ज्योतिष शास्त्र में मां शैलपुत्री का संबंध चंद्रमा से माना गया है। माता शैलपुत्री चंद्रमा को नियंत्रित करती हैं। इसलिए, जिन लोगों की कुंडली में चंद्र दोष होता है, उन्हें माता की पूजा अवश्य करनी चाहिए। माता की पूजा करने से मानसिक शांति मिलती है। इसके अलावा, डिप्रेशन और तनाव हमेशा के लिए दूर हो जाता है। मां शैलपुत्री मूलाधार चक्र की अधिष्ठात्री देवी हैं। फलस्वरूप, इनकी साधना से व्यक्ति को जीवन में स्थिरता, धन और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। आप आज के दिन गरीबों को सफेद वस्त्र या चावल का दान जरूर करें। इससे घर में सुख-समृद्धि का स्थायी वास होता है।

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Pawan Singh Editor in Chief Taj News

Pawan Singh

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