Published: Thursday, 08 January 2026, 07:35 AM IST | Washington/New Delhi
इंटरनेशनल सोलर अलायंस से अलग हुआ अमेरिका (America withdraws from International Solar Alliance), जो भारत की वैश्विक कूटनीति के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ (America First) नीति को आक्रामक रूप से आगे बढ़ाते हुए न केवल सोलर अलायंस, बल्कि कुल 65 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अमेरिका को अलग करने का ऐलान कर दिया है।
Highlights:
- इंटरनेशनल सोलर अलायंस से अलग हुआ अमेरिका: भारत और फ्रांस की पहल को लगा बड़ा झटका।
- ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति: ट्रंप का तर्क- ये संगठन अमेरिकी संसाधनों का दुरुपयोग कर रहे हैं।
- कुल 65 संगठनों से तोड़ा नाता: ट्रंप प्रशासन ने फंडिंग रोकने और सदस्यता रद्द करने का आदेश दिया।

इंटरनेशनल सोलर अलायंस से अलग हुआ अमेरिका: ट्रंप की दलील
डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता में वापसी के साथ ही यह साफ कर दिया था कि वे उन समझौतों को रद्द करेंगे जो अमेरिका के हित में नहीं हैं। इंटरनेशनल सोलर अलायंस से अलग हुआ अमेरिका इसी कड़ी का हिस्सा है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि आईएसए (ISA) जैसे संगठनों में अमेरिका का योगदान बहुत ज्यादा है, लेकिन बदले में उसे वो फायदा नहीं मिल रहा, जिसकी उम्मीद थी। ट्रंप ने इसे अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसे की बर्बादी करार दिया है।
भारत की महत्वाकांक्षी योजना पर असर
इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) की शुरुआत 2015 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति ने मिलकर की थी। इसका उद्देश्य सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना था। अब जब इंटरनेशनल सोलर अलायंस से अलग हुआ अमेरिका, तो इस संगठन की फंडिंग और वैश्विक प्रभाव पर सवाल खड़े हो गए हैं। इसके अलावा, अमेरिका ने यूनेस्को और मानवाधिकार परिषद जैसे कई अन्य निकायों से भी दूरी बना ली है।
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