Monday, 01 December 2025, 11:45 AM. Agra, Uttar Pradesh
आगरा। विश्व प्रसिद्ध ताजमहल को दुनिया भर में प्रेम का प्रतीक माना जाता है। हर साल लाखों पर्यटक इस अद्भुत स्मारक को देखने आते हैं और सरकार को टिकट, टूरिज़्म और अन्य सेवाओं से भारी राजस्व प्राप्त होता है। लेकिन यही सच दुनिया को चौंकाता है कि ताजमहल परिसर की मस्जिद में नमाज पढ़ाने वाले इमाम को अब भी मात्र 15 रुपये मासिक मानदेय मिलता है—एक ऐसी राशि, जिसे आज की अर्थव्यवस्था में प्रतीकात्मक भी नहीं कहा जा सकता।
ताजमहल के इतिहास, उसके रखरखाव, सुरक्षा, टिकट बिक्री और पर्यटन विकास में केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) करोड़ों—अरबों में कमाई कर रहे हैं। लेकिन मस्जिद में धार्मिक कार्य करने वाले इमाम और उनके परिवार की दशा इससे बिलकुल विपरीत है।
यह विसंगति आगरा में लंबे समय से चर्चा का विषय रही है और एक बार फिर सुर्खियों में है।

ताजमहल से राजस्व: अरबों की कमाई का स्रोत
ताजमहल, जिसे 1983 में यूनेस्को विश्व धरोहर घोषित किया गया था, भारत सरकार की आय का प्रमुख पर्यटन केंद्र है।
ASI की रिपोर्ट के अनुसार:
- 2022–23 में ताजमहल से 254 करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई।
- प्रतिवर्ष औसतन 20–25 लाख विदेशी और भारतीय पर्यटक ताजमहल देखने आते हैं।
- ताजमहल के टिकट से प्रतिदिन 25 लाख से अधिक राजस्व प्राप्त होता है।
- सिर्फ 2018–19 में ही 86 करोड़ रुपये से अधिक टिकट बिक्री से आए थे।
इतनी विशाल कमाई के बीच इमाम का 15 रुपये प्रतिमाह मानदेय किसी विसंगति से कम नहीं।
सदियों पुरानी प्रथा—और उसी अनुपात में रुका तनख्वाह का आंकड़ा
ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि
1873 में ब्रिटिश शासन ने ताजमहल मस्जिद के इमाम के लिए 15 रुपये मासिक मानदेय स्वीकृत किया था।
उस समय यह उचित राशि मानी जाती थी, लेकिन:
- 1949 में प्रथा दोहराई गई
- 1959 में इस मानदेय को उसी स्थिति में बरकरार रखा गया
- उसके बाद इसे कभी संशोधित नहीं किया गया
परिणाम यह कि 2025 तक भी ताजमहल मस्जिद के इमाम को 15 रुपये प्रति माह ही दिए जा रहे हैं।
क्या है ASI का पक्ष?
ASI का कहना है कि:
- इमाम सरकारी कर्मचारी नहीं
- वे परंपरागत रूप से मस्जिद में नियुक्त किए जाते हैं
- ASI सिर्फ स्मारक के संरक्षित ढांचे और परिसर की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है
लेकिन स्थानीय समुदाय का सवाल है—
“अगर परिसर में अरबों की कमाई हो सकती है, तो मस्जिद के इमाम को सम्मानजनक वेतन क्यों नहीं?”
केंद्र सरकार को ज्ञापन—वेतन बढ़ाने की जोरदार मांग
मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता और हिंदुस्तानी बिरादरी के चेयरमैन डॉ. सिराज कुरैशी ने कहा:
- “इमाम का 15 रुपये वेतन अपमानजनक है।”
- “सरकार को इसे तुरंत बढ़ाकर सम्मानजनक स्तर पर लाना चाहिए।”
- “ताजमहल से अरबों की कमाई के बीच इमाम का वेतन 19वीं सदी का आंकड़ा लग रहा है।”
उन्होंने केंद्र सरकार से इस व्यवस्था पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है।
धार्मिक सेवाएं—लेकिन बिना सुरक्षा, बिना लाभ
ताजमहल मस्जिद के इमाम:
- दैनिक नमाज अदा कराते हैं
- शुक्रवार की जुमे की नमाज की अगुवाई करते हैं
- मस्जिद के धार्मिक अनुशासन को बनाए रखते हैं
- ईद, बकरा ईद और अन्य अवसरों पर समुदाय का नेतृत्व करते हैं
लेकिन इसके बदले न किसी प्रकार का नियमित वेतन, न सुविधा, न मेडिकल सहायता, न कोई भत्ता—
सिर्फ 15 रुपये।
लाखों का रखरखाव—लेकिन इमाम की आय स्थिर
ताजमहल परिसर में पुलिस, सीआईएसएफ, ASI अधिकारी, गार्ड, सफाई कर्मचारी और टिकट स्टाफ सबको समान वेतन मिलता है—
लेकिन मस्जिद के धार्मिक हिस्से का दायित्व निभाने वाले इमाम के हिस्से में सिर्फ 15 रुपये!
यह प्रश्न पूरे शहर में चर्चा का कारण है—
क्या सरकार इस ऐतिहासिक विसंगति को सुधारने के लिए कदम उठाएगी?
स्थानीय समुदाय का कहना—“संवेदनशील मुद्दा, तत्काल सुधार जरूरी”
आगरा के कई संगठनों ने इस मामले में कहा कि:
- मस्जिद के धार्मिक महत्व को देखते हुए वेतन सम्मानजनक होना चाहिए
- ताजमहल के इमाम का न सिर्फ वेतन बढ़ाया जाए, बल्कि
- स्वास्थ्य सुविधा
- सुरक्षा
- आवास सहायता
- पुरानी प्रथाओं का आधुनिकीकरण
भी किया जाना चाहिए
ताजमहल की कमाई बनाम इमाम की आय—एक कठोर तुलना
| श्रेणी | राशि |
|---|---|
| ताजमहल प्रतिवर्ष औसत आय | 200–250+ करोड़ |
| प्रतिदिन टिकट राजस्व | 25–30 लाख |
| इमाम का मासिक वेतन | 15 रुपये |
| वार्षिक वेतन | 180 रुपये |
यह अंतर जितना चौंकाता है, उतना सवाल भी खड़े करता है।
स्थानीय प्रशासन का रुख—“ASI निर्णय करेगा”
मामला केंद्र सरकार के अधिकार में है।
ASI के अधिकारियों ने कहा कि किसी भी प्रकार का संशोधन “सरकार की स्वीकृति” के बाद ही हो सकता है।
धार्मिक संस्थाओं का कहना—“इतिहास की गलती सुधारने का समय आ गया है”
देश की कई मुस्लिम संस्थाओं ने कहा है कि यह प्रणाली 1873 की है, जबकि:
- महंगाई 10,000% बढ़ चुकी है
- आर्थिक संरचना बदल चुकी है
- ताजमहल की आय अब अरबों में है
फिर भी इमाम का वेतन वही पुराना 15 रुपये—
“यह मज़ाक है या परंपरा?”
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✍️ संपादन: ठाकुर पवन सिंह | ताज न्यूज़ – आईना सच का | pawansingh@tajnews.in
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