क्राइम डेस्क, Taj News | Published by: ठाकुर पवन सिंह | Updated: Monday, 09 Feb 2026 02:45 PM IST
फरीदाबाद: देश की सुरक्षा व्यवस्था और जेल प्रशासन पर सवाल खड़ा करने वाली एक सनसनीखेज वारदात हरियाणा के फरीदाबाद से सामने आई है। अयोध्या में नवनिर्मित भव्य राम मंदिर को बम से उड़ाने की साजिश में शामिल रहे संदिग्ध आतंकी अब्दुल रहमान (Abdul Rahman) की जेल के अंदर ही हत्या कर दी गई है। यह घटना फरीदाबाद की हाई-प्रोफाइल नीमका जेल (Neemka Jail) में रविवार देर रात करीब 2 बजे घटी।
बताया जा रहा है कि अब्दुल रहमान पर उसके ही साथी बंदी अरुण चौधरी ने नुकीले हथियार से जानलेवा हमला किया। अत्यधिक खून बहने के कारण रहमान की मौके पर ही या अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। इस घटना ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।

बैरक में खूनी खेल: रात 2 बजे दिया वारदात को अंजाम नीमका जेल सूत्रों के मुताबिक, अब्दुल रहमान और आरोपी अरुण चौधरी एक ही बैरक या आसपास की सेल में बंद थे। रविवार और सोमवार की दरमियानी रात, जब जेल में सन्नाटा था, तभी अरुण ने किसी नुकीले हथियार (संभवतः चम्मच या लोहे की पत्ती को घिसकर बनाया गया सुआ) से अब्दुल रहमान पर ताबड़तोड़ वार कर दिए।
चीख-पुकार सुनकर जेल के सुरक्षाकर्मी वहां दौड़े, लेकिन तब तक रहमान लहूलुहान होकर गिर चुका था। आरोपी अरुण चौधरी को तुरंत हिरासत में ले लिया गया। जेल प्रशासन ने स्थानीय पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए बादशाह खान नागरिक अस्पताल भेजा गया है।
कौन था अब्दुल रहमान? मृतक अब्दुल रहमान कोई साधारण अपराधी नहीं था। उसका नाम देश की सुरक्षा को खतरा पहुंचाने वाली एक बड़ी साजिश में सामने आया था।
- राम मंदिर पर हमले की साजिश: सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, अब्दुल रहमान अयोध्या के राम मंदिर को बम से उड़ाने की साजिश का हिस्सा था।
- गिरफ्तारी: उसे 2 मार्च 2025 को गुजरात एटीएस (Gujarat ATS) और हरियाणा एसटीएफ (Haryana STF) ने एक संयुक्त ऑपरेशन में फरीदाबाद के पाली इलाके से गिरफ्तार किया था। तब से वह नीमका जेल में न्यायिक हिरासत में था।
- आईएसकेपी (ISKP) कनेक्शन: जांच में सामने आया था कि रहमान ‘इस्लामिक स्टेट ऑफ खोरासान प्रोविंस’ (ISKP) की विचारधारा से प्रभावित था और उनके संपर्क में था।
ई-रिक्शा चालक से कैसे बना जिहादी? अब्दुल रहमान मूल रूप से अयोध्या के मजनाई गांव का रहने वाला था (कुछ रिपोर्ट्स में उसका संबंध जम्मू के कठुआ से भी बताया गया है, जिसकी जांच जारी है)। उसका ब्रेनवॉश कैसे हुआ, इसकी कहानी भी काफी चौंकाने वाली है। अब्दुल पहले ई-रिक्शा चलाता था और अपने पिता की चिकन की दुकान पर हाथ बंटाता था। शुरुआत में वह अपनी मां के मोबाइल पर सामान्य रूप से यूट्यूब और फेसबुक चलाता था। इसी दौरान वह सोशल मीडिया के एल्गोरिदम के जाल में फंसा और तालिबान, इस्लामिक स्टेट और दुनिया भर में मुसलमानों पर तथाकथित अत्याचार के वीडियो देखने लगा।
नकली बंदूकें और इंस्टाग्राम का शौक रेडिकलाइजेशन (कट्टरपंथ) की तरफ बढ़ते हुए उसे हथियारों का शौक हो गया। वह लकड़ी और लोहे के टुकड़ों को जोड़कर नकली बंदूकें बनाता था और उनके साथ फोटो खिंचवाकर सोशल मीडिया पर डालता था।
- उसने सबसे पहले
ar_rahmanनाम से इंस्टाग्राम आईडी बनाई, जिसे संदिग्ध गतिविधियों के चलते ब्लॉक कर दिया गया। - इसके बाद उसने कई नई आईडी बनाईं, लेकिन वे भी ब्लॉक होती रहीं।
‘सलाम’ से शुरू हुआ आतंक का सफर साल 2023 में अब्दुल की इंस्टाग्राम आईडी Abu_ubaida पर Altaf नाम की एक आईडी से मैसेज आया—”सलाम”। यहीं से उसकी जिंदगी ने गलत मोड़ ले लिया। अल्ताफ ने खुद को इस्लामिक स्टेट का रिक्रूटर बताया और धीरे-धीरे अब्दुल का ब्रेनवॉश करना शुरू कर दिया।
- टेलीग्राम पर शिफ्टिंग: इंस्टाग्राम पर निगरानी के डर से अल्ताफ ने उसे टेलीग्राम (Telegram) डाउनलोड करवाया।
- हैंडलर अबू सूफियान: वहां अल्ताफ ने अपना नाम ‘अबू सूफियान’ बताया और अब्दुल को जिहाद के लिए उकसाया।
- वफादारी की परीक्षा: संगठन के प्रति वफादारी साबित करने के लिए उससे आईएसआईएस का झंडा बनाने और भड़काऊ स्पीच देते हुए वीडियो रिकॉर्ड करके भेजने को कहा गया।
आरोपी अरुण चौधरी भी आतंकी गतिविधियों में था लिप्त हैरानी की बात यह है कि हत्या का आरोपी अरुण चौधरी भी कोई साधारण कैदी नहीं है। उसे भी आतंकी गतिविधियों और देश विरोधी कार्यों में संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उसे अक्तूबर 2024 में ही नीमका जेल में शिफ्ट किया गया था। अब पुलिस और खुफिया एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि:
- क्या यह हत्या किसी आपसी रंजिश का नतीजा है?
- क्या जेल के अंदर कोई गैंगवार चल रही है?
- या फिर अब्दुल रहमान की हत्या के पीछे कोई गहरी साजिश है ताकि वह पूछताछ में और राज न उगल सके?
जेल प्रशासन पर सवालिया निशान नीमका जेल को हरियाणा की सुरक्षित जेलों में गिना जाता है। ऐसे में आतंकियों के बैरक तक नुकीला हथियार कैसे पहुंचा? रात के 2 बजे जब सुरक्षा कड़ी होनी चाहिए थी, तब यह हत्या कैसे हो गई? इन सवालों के जवाब जेल अधीक्षक को देने होंगे। फिलहाल, न्यायिक मजिस्ट्रेट की देखरेख में मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
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