आगरा के बिचपुरी में मुख्यमंत्री से मिलने के लिए कूच की तैयारी करते ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ

Tuesday, 09 December 2025, 10:35:00 AM. Agra, Uttar Pradesh

आगरा। बिचपुरी में बलवंत एजुकेशनल सोसाइटी की कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहा अनिश्चितकालीन धरना 11वें दिन एक नए और उग्र चरण में प्रवेश कर गया। शांतिपूर्ण आंदोलन की अनदेखी से नाराज ग्रामीणों और किसानों ने सोमवार को शहर में मौजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने के लिए सर्किट हाउस कूच करने का ऐलान कर दिया। सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और निजी वाहनों के काफिले के साथ जैसे ही आंदोलनकारी आगे बढ़ने को तैयार हुए, पुलिस-प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे अधिकारियों ने मोर्चा संभाला और प्रदर्शनकारियों को रोककर मान-मनौव्वल शुरू की। अंततः प्रशासन ने कल शाम तक जिला जज से प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात कराने और धरना स्थल पर टेंट लगाने की अनुमति देने का लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद माहौल कुछ शांत हुआ।

सीएम से मिलने की जिद और पुलिस के हाथ-पांव फूले

पिछले 10 दिनों से कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे बैठे आंदोलनकारियों का धैर्य सोमवार को जवाब दे गया। बलवंत एजुकेशनल सोसाइटी में व्याप्त भ्रष्टाचार, तानाशाही और स्थानीय लोगों के हकों की अनदेखी को लेकर चल रहे इस धरने पर प्रशासन की उदासीनता ने आग में घी का काम किया। संयोगवश, सोमवार को ही प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगरा के दौरे पर थे।

प्रदर्शनकारियों ने इसे एक अवसर के रूप में देखा और निर्णय लिया कि वे अपनी व्यथा सीधे मुख्यमंत्री को सुनाएंगे। दोपहर 1 बजे के करीब बिचपुरी धरना स्थल पर गहमागहमी तेज हो गई। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण अपने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को कतार में लगाकर सर्किट हाउस की ओर कूच करने की तैयारी करने लगे। यह खबर जैसे ही वायरलेस सेट पर गूंजी, आगरा पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। वीआईपी मूवमेंट और सीएम की सुरक्षा के बीच किसानों का यह कूच प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया था।

एडिशनल डीसीपी की एंट्री और जिला जज से मुलाकात का वादा

स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए एडिशनल डीसीपी (पश्चिमी) आदित्य कुमार तत्काल भारी पुलिस बल और पीएसी के साथ धरना स्थल पर पहुंचे। उस समय तक आंदोलनकारी कूच करने के लिए पूरी तरह तैयार थे। पुलिस अधिकारियों ने किसान नेताओं से बातचीत शुरू की और उन्हें समझाने का प्रयास किया कि सुरक्षा कारणों से मुख्यमंत्री से सीधे मिलना संभव नहीं हो पाएगा।

काफी देर तक चली रस्साकशी और बातचीत के बाद, एडिशनल डीसीपी ने आंदोलनकारियों को ठोस आश्वासन दिया। उन्होंने वादा किया कि आंदोलनकारियों की सभी मांगें एक विधिवत मांग पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री तक पहुंचाई जाएंगी। इसके अलावा, सबसे महत्वपूर्ण आश्वासन यह दिया गया कि कल शाम तक आंदोलनकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात जिला जज (District Judge) से कराई जाएगी। इस मुलाकात में वे सोसाइटी के लीगल और प्रशासनिक मुद्दों पर अपनी बात विस्तार से रख सकेंगे और आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

टेंट लगाने की अनुमति पर प्रशासन का यू-टर्न

गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से प्रशासन ने धरना स्थल पर टेंट लगाने की अनुमति नहीं दी थी, जिससे प्रदर्शनकारी खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर थे और कई लोगों की तबीयत भी बिगड़ रही थी। सोमवार को उग्र हुए आंदोलन को देखते हुए प्रशासन को झुकना पड़ा।

पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि धरना स्थल पर टेंट लगाने की अनुमति दी जाएगी और आंदोलनकारियों के लिए न्यूनतम बुनियादी सुविधाओं का प्रबंध करवाया जाएगा। प्रशासन के इस यू-टर्न को आंदोलनकारियों की पहली बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।

किसान नेताओं की हुंकार: समाधान तक जारी रहेगा संघर्ष

प्रशासन के आश्वासन के बाद भी किसान नेताओं के तेवर नरम नहीं पड़े हैं। किसान-मजदूर नेता चौधरी दिलीप सिंह और बिचपुरी ब्लॉक प्रधान संगठन के अध्यक्ष हाकिम सिंह प्रधान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रशासन के आश्वासन पर भरोसा करके कूच को स्थगित किया गया है, लेकिन आंदोलन खत्म नहीं हुआ है।

उन्होंने चेताया, “अगर जिला जज से वार्ता बेनतीजा रहती है या हमारी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तो यह आंदोलन जन आंदोलन में बदल जाएगा। हम पीछे हटने वाले नहीं हैं। जब तक किसानों और पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता, यह धरना अनवरत जारी रहेगा।”

गरीब सेना और क्षत्रिय महासभा का मिला साथ

धरने के 11वें दिन आंदोलन को विभिन्न सामाजिक संगठनों का भी भारी समर्थन मिला। गरीब सेना के प्रमुख बाबा बालयोगी ने धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन का समर्थन किया और सभी मांगों को जायज ठहराया। वहीं, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष मुनेंद्र परमार ने भी प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए।

धरना स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण और किसान नेता मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख रूप से पूर्व प्रधान कृष्णवीर सिंह सोलंकी (अंगूठी), भारतीय किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष धीरज सिकरवार, पूर्व प्रधान कृपाल सिंह (लड़ामदा), प्रदीप राणा, भरत सिंह सोलंकी, प्रधान अजीत चाहर (बरारा), प्रधान प्रदीप चौधरी (बिचपुरी), लंबू पंडित (कलवारी), संजय चाहर, दाताराम लोधी, बाबूलाल वाल्मीकि, गंगाराम माहौर, अरविंद चौधरी, राजीव ठाकुर, सोनू चौधरी, वेदप्रकाश सोलंकी, सत्यपाल सोलंकी, उम्मेद सोलंकी, कर्णवीर सोलंकी, सुभाष सोलंकी और शिशुपाल सोलंकी शामिल थे।

फिलहाल, प्रशासन के आश्वासन के बाद बिचपुरी में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन तनाव बरकरार है। सभी की निगाहें अब जिला जज के साथ होने वाली प्रस्तावित मुलाकात पर टिकी हैं।

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By Thakur Pawan Singh

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