Edited by: Thakur Pawan Singh | tajnews.in | 23 Feb 2026, 11:45 pm IST
Taj News Special Report
विशेष विश्लेषणात्मक कवरेज
लखनऊ (Lucknow): उत्तर प्रदेश में सनातन धर्म की सर्वोच्च पीठों में से एक ‘शंकराचार्य’ परंपरा के खिलाफ हाल ही में हुई कथित प्रशासनिक कार्रवाई और विवादों ने एक बड़े सामाजिक और धार्मिक असंतोष को जन्म दे दिया है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के प्रतीक माने जाने वाले संतों पर लगे आरोपों और उन पर हुई कार्रवाई को लेकर अब जनता सीधे तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) से सवाल पूछने लगी है। इसी कड़ी में सोशल मीडिया पर गौरी शंकर सिंह सिकरवार का एक विस्तृत और मार्मिक खुला पत्र तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने सरकार की न्याय प्रणाली और शिकायतकर्ताओं की मंशा पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
- सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा: गौरी शंकर सिंह सिकरवार ने योगी आदित्यनाथ से पूछा- क्या हमारी आस्था इतनी सस्ती है?
- शिकायतकर्ता पर गंभीर आरोप: संत के चोले में छिपे शिकायतकर्ता पर 40 मुकदमों और हिस्ट्रीशीटर होने का दावा।
- सीबीआई (CBI) जांच की मांग: विवादित रिपोर्ट के आधार पर हुई कार्रवाई को लेकर निष्पक्ष जांच की उठ रही मांग।
- जनविश्वास को खतरा: सनातन परंपरा पर आघात से प्रदेश में बड़े सामाजिक असंतोष की चेतावनी।
गौरी शंकर सिंह सिकरवार का योगी आदित्यनाथ को खुला पत्र
(गौरी शंकर सिंह सिकरवार, जिनकी पोस्ट ने सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छेड़ दी है)
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक (Facebook) पर गौरी शंकर सिंह सिकरवार द्वारा लिखी गई एक पोस्ट ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सीधे संबोधित करते हुए उन्होंने लिखा है, “उत्तर प्रदेश की जनता यह सवाल आज मन में लिए खड़ी है— क्या हमारी आस्था, हमारी परंपरा और हमारे धर्म की प्रतिष्ठा इतनी सहज है कि उसे किसी भी रिपोर्ट, किसी भी व्यक्ति, किसी भी आरोप के भरोसे दाँव पर लगा दिया जाए?”
यह पोस्ट इस बात की ओर इशारा करती है कि सनातन धर्म में ‘शंकराचार्य’ केवल एक व्यक्ति या सामान्य नाम नहीं है, बल्कि यह वह सर्वोच्च और पवित्र परंपरा है जिसने सदियों से इस राष्ट्र को विचार, विवेक और दिशा प्रदान की है। जब ऐसी महान परंपरा के विरुद्ध कोई नकारात्मक वातावरण बनाया जाता है या प्रशासनिक कार्रवाई की जाती है, तो उसकी पीड़ा केवल एक संत तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वह देश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आत्मा को छलनी कर देती है।
आपराधिक पृष्ठभूमि वाले शिकायतकर्ता पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे मामले में जो बात सबसे ज्यादा हैरान करने वाली है और जिस पर जनता का गुस्सा फूट रहा है, वह है शिकायतकर्ता की संदिग्ध पृष्ठभूमि। गौरी शंकर सिंह सिकरवार ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट रूप से लिखा है कि जब ऐसी कार्रवाई किसी ऐसे व्यक्ति की रिपोर्ट के आधार पर हो, जिसकी पृष्ठभूमि स्वयं संदेह और जघन्य अपराधों से जुड़ी हो, तो न्याय व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इसी पोस्ट पर कमेंट करते हुए महेंद्र रावत ने एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने लिखा है, “वादी और शिकायतकर्ता की पैरवी करने वाला संत के चोले में एक हिस्ट्रीशीटर है और 40 मुक़दमे फेस कर रहा है। इस केस की तो सीबीआई (CBI) जांच होनी चाहिए।” महेंद्र रावत के इस दावे ने पूरे मामले को एक नया और गंभीर मोड़ दे दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या एक ऐसे व्यक्ति की बातों को आधार मानकर धर्म की सर्वोच्च पीठों को अपमानित किया जा सकता है, जिसका स्वयं का आपराधिक इतिहास इतना लंबा हो?
| CONTROVERSY FACT-FILE (विवाद के मुख्य बिंदु) | |
|---|---|
| मुख्य मुद्दा (Main Issue) | शंकराचार्य परंपरा के विरुद्ध की गई कथित विवादित कार्रवाई |
| वायरल पोस्ट लेखक | गौरी शंकर सिंह सिकरवार |
| संबोधित किया गया | मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ |
| शिकायतकर्ता की पृष्ठभूमि | हिस्ट्रीशीटर होने का आरोप (कथित तौर पर 40 से अधिक मुकदमे) |
| जनता की मुख्य मांग | सत्य की निष्पक्ष जांच और मामले की CBI इन्क्वायरी |
‘जनता कानून से नहीं, अन्याय और अपमान से डरती है’
अपनी पोस्ट के माध्यम से गौरी शंकर सिंह सिकरवार ने सरकार को एक बहुत ही स्पष्ट और सख्त संदेश देने का प्रयास किया है। उन्होंने लिखा है कि जनता कभी भी कानून के राज से नहीं डरती, बल्कि वह अन्याय और अपनी धार्मिक भावनाओं के अपमान से आहत होती है। यदि धर्म की सर्वोच्च परंपराओं को लेकर किसी भी प्रकार की असावधानी बरती गई या किसी छिपे हुए पूर्वाग्रह (Prejudice) के तहत निर्णय लिए गए, तो इसके परिणाम केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं रहेंगे।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में एकतरफा कार्रवाई से जनविश्वास का भारी क्षरण (Loss of public trust) होता है, जो अंततः सड़कों पर सामाजिक असंतोष के रूप में फूट सकता है। उत्तर प्रदेश, जिसे धर्म और आस्था की हृदय स्थली कहा जाता है, वहां सरकार से यह अपेक्षा की जाती है कि वह धर्म की रक्षा भी पूरी सत्यनिष्ठा से करे और न्याय की भी।
सोशल मीडिया पर मिला भारी जनसमर्थन
इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर आम जनता, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों का भारी समर्थन मिल रहा है। पोस्ट के कमेंट सेक्शन में लोग खुलकर अपनी भावनाएं व्यक्त कर रहे हैं। पंचशील शर्मा ने लिखा, “गौरी शंकर सिंह सिकरवार, सहमत।” वहीं अवधेश दुबे ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा, “आदरणीय भाई साहब की सोच को हृदय से प्रणाम करता हूं।” प्रशांत तोमर और भानु प्रताप सिंह जैसे लोगों ने भी इस विचार से अपनी पूर्ण सहमति जताई है।
दिलचस्प बात यह है कि जब वरिष्ठ पत्रकार भानु प्रताप सिंह ने केवल ‘सहमत’ लिखकर अपनी बात खत्म की, तो गौरी शंकर सिंह सिकरवार ने उन्हें रिप्लाई करते हुए तंज कसा- “एक जागरूक सिद्धहस्त पत्रकार की मात्र इतनी संक्षिप्त टिप्पणी?” यह दर्शाता है कि लोग इस मुद्दे पर पत्रकारों और मीडिया से एक विस्तृत और मुखर रुख अपनाने की उम्मीद कर रहे हैं।
इतिहास लिखेगा: समय रहते सत्य की जांच जरूरी
लेख के अंत में एक बहुत ही गंभीर चेतावनी और अपील छिपी है। पोस्ट में कहा गया है कि आज भी समय है कि सत्य की पूरी गहराई से जांच हो और संदेहास्पद स्रोतों (Dubious sources) को न्याय का आधार न बनाया जाए। उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को यह कड़ा संदेश देना होगा कि राज्य में न्याय अंधा नहीं है, बल्कि वह सत्य की कसौटी पर परखा जाता है।
“जनता देख रही है। इतिहास लिखेगा। जय धर्म। जय राष्ट्र।” इन अंतिम वाक्यों के साथ यह पोस्ट समाप्त होती है, लेकिन यह सरकार के सामने एक यक्ष प्रश्न छोड़ जाती है कि क्या आपराधिक छवि वाले लोगों की साजिशों के आगे धर्म की प्रतिष्ठा को इस तरह से दांव पर लगने दिया जाएगा? अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन इस भारी जन-दबाव और उठ रही सीबीआई (CBI) जांच की मांग पर क्या कदम उठाता है।
Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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