
Sunday, 04 January 2026, 7:05:00 PM. Thiruvananthapuram, Kerala
तिरुवनंतपुरम। केरल के सबरीमाला मंदिर से 4.5 किलो सोने की चोरी का मामला अब सिर्फ मंदिर की मूर्तियों से सोना गायब होने तक सीमित नहीं रह गया है। SIT जांच में मिले नए सबूतों और गवाहों ने इस प्रकरण को एक संभावित अंतरराष्ट्रीय मूर्ति तस्करी और अंडरवर्ल्ड नेटवर्क से जोड़ दिया है। बावजूद इसके, अब तक इस हाई-प्रोफाइल मामले में चार्जशीट दाखिल न हो पाना जांच की दिशा और रफ्तार दोनों पर सवाल खड़े कर रहा है।
जांच एजेंसियों का दावा है कि चोरी के पीछे केवल स्थानीय स्तर की गड़बड़ी नहीं, बल्कि इसमें मंदिर प्रशासन से जुड़े अधिकारी, रसूखदार राजनीतिक चेहरे और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच रखने वाले तस्कर शामिल हो सकते हैं। यही वजह है कि यह केस अब केरल हाईकोर्ट की सीधी निगरानी में है।

द्वारपाल मूर्तियों से शुरू हुई कहानी, गर्भगृह तक पहुंचा शक
SIT जांच के अनुसार, मंदिर के गर्भगृह के मुख्य द्वार और द्वारपालकों की मूर्तियों पर चढ़ी सोने की परतें योजनाबद्ध तरीके से हटाई गईं। शुरुआत में इसे मरम्मत या तकनीकी प्रक्रिया बताया गया, लेकिन बाद में सामने आए दस्तावेजों और गवाहियों ने इसे चोरी की साजिश की ओर मोड़ दिया।
12 दिसंबर को विशेष अदालत ने त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के पूर्व चेयरमैन और CPI(M) नेता ए. पद्मकुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद 17 दिसंबर को मंदिर बोर्ड से जुड़े प्रशासनिक अधिकारी श्रीकुमार की गिरफ्तारी ने मामले को और गंभीर बना दिया।
उन्नीकृष्णन पोट्टी: मंदिर से सोना बाहर भेजने का आरोप
SIT की रडार पर सबसे बड़ा नाम केरल निवासी नंबूदरी उन्नीकृष्णन पोट्टी का है। जांच में सामने आया है कि अगस्त 2019 में द्वारपाल मूर्तियों पर चढ़ी सोने की परत हटाकर उन्हें चेन्नई की एक फर्म में भेजा गया था। सरकारी दस्तावेजों में उस समय इन्हें तांबे के पैनल बताया गया, जबकि 1999 में इन्हीं पैनलों पर सोने की परत चढ़वाई गई थी।
यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—अगर पैनल तांबे के थे, तो वर्षों पहले उन पर सोना कैसे चढ़ा? और अगर वे सोने के थे, तो 2019 तक तांबे में कैसे बदल गए?
NRI बिजनेसमैन का बयान और अंतरराष्ट्रीय तस्करी का शक
SIT को दिए गए एक अहम बयान में एक मलयाली NRI बिजनेसमैन ने दावा किया है कि 2019–2020 के दौरान सबरीमाला में बड़े पैमाने पर मूर्तियों और कीमती धातुओं की तस्करी हुई। इस दौरान पंचधातु की दो मूर्तियां एक अंतरराष्ट्रीय मूर्ति तस्करी गिरोह को बेची गईं।
बयान के अनुसार, उन्नीकृष्णन पोट्टी इस सौदे में मिडिलमैन की भूमिका में था और मंदिर प्रशासन के एक शीर्ष अधिकारी ने मूर्तियां उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाई। SIT अब इस नेटवर्क की कड़ियां तमिलनाडु, खाड़ी देशों और यूरोप तक जोड़ने की कोशिश कर रही है।
डी मणि उर्फ बालमुरुगन पर नजर, लेकिन सबूत कमजोर
तमिलनाडु का मूर्ति व्यापारी डी मणि (असली नाम बालमुरुगन) इस केस का दूसरा बड़ा नाम है। NRI गवाह और कुछ राजनीतिक सूत्रों ने उसे अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह का हिस्सा बताया है। हालांकि, 30 और 31 दिसंबर को हुई पूछताछ में SIT को उसके खिलाफ ठोस सबूत नहीं मिल सके, जिसके बाद उसे छोड़ दिया गया।
SIT का मानना है कि डी मणि संभवतः इरिडियम धोखाधड़ी जैसे अन्य नेटवर्क से भी जुड़ा हो सकता है, इसलिए आगे की जांच के विकल्प खुले रखे गए हैं।
पद्मकुमार की भूमिका और राजनीतिक दबाव के आरोप
पूर्व TDB चेयरमैन ए. पद्मकुमार पर आरोप है कि मार्च 2019 में उनकी अध्यक्षता में हुई बोर्ड बैठक के बाद गर्भगृह के सोने से मढ़े द्वार उन्नीकृष्णन पोट्टी को सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। SIT को शक है कि इसी दौरान सोना बाहर निकाला गया।
29 दिसंबर को पूर्व TDB सदस्य एन. विजयकुमार के बयान ने पद्मकुमार की भूमिका को और संदिग्ध बना दिया। फिलहाल पद्मकुमार न्यायिक हिरासत में हैं और उन पर PMLA के तहत भी कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है।

गोल्ड कारोबारी भी रडार पर, छापेमारी जारी
जांच में कर्नाटक और तमिलनाडु के दो सोना कारोबारियों—गोवर्धन और पंकज भंडारी—के नाम भी सामने आए हैं। बेल्लारी स्थित गोवर्धन के ज्वेलरी शोरूम पर छापेमारी में 470 ग्राम सोना जब्त हुआ, हालांकि उसका सीधा संबंध सबरीमाला से साबित नहीं हो पाया।
SIT का मानना है कि मंदिर के मूल सोने की प्लेटें अब भी गायब हैं और उनकी बरामदगी के लिए आगे और छापेमारी हो सकती है।
हाईकोर्ट की सख्ती, वैज्ञानिक जांच के आदेश
केरल हाईकोर्ट ने जांच में हो रही देरी और चार्जशीट न दाखिल होने पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट के निर्देश पर मंदिर के सोने को वैज्ञानिक परीक्षण के लिए विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र भेजा गया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सोने में मिलावट हुई या असली प्लेटें बदली गईं।
हाईकोर्ट ने SIT में अतिरिक्त अधिकारियों की नियुक्ति का भी आदेश दिया है। अगली सुनवाई 14 जनवरी 2026 को होगी।
विशेषज्ञों की राय: दिशा सही, लेकिन रफ्तार सुस्त
सीनियर पत्रकारों और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जांच सही दिशा में जरूर बढ़ रही है, लेकिन जब तक मनी-ट्रेल और इंटरनेशनल लिंक सामने नहीं आते, तब तक यह केस सिर्फ गिरफ्तारियों की सूची बनकर रह जाएगा। उनका सुझाव है कि मंदिरों के दान और संपत्तियों का सार्वजनिक ऑडिट अनिवार्य किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर लगाम लग सके।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
इस मामले ने केरल की राजनीति को भी गर्मा दिया है। BJP ने CBI जांच की मांग करते हुए इसे धार्मिक और राजनीतिक साजिश बताया है। कांग्रेस का आरोप है कि SIT पर दबाव डालकर जांच को धीमा किया जा रहा है। वहीं, LDF का कहना है कि विपक्ष इस संवेदनशील मुद्दे पर झूठा प्रचार कर रहा है और चार्जशीट दाखिल होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाना चाहिए।
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