Wednesday, 03 December 2025, 11:24:51 AM. Agra, Uttar Pradesh
आरबीएस कॉलेज बिचपुरी कैंपस में पिछले कई दिनों से होते तनाव ने मंगलवार को उबाल ले लिया, जब ग्रामीणों और किसान नेताओं ने प्रबंधन की कथित मनमानी, नियुक्तियों में अनियमितता, किसानों की जमीन अधिग्रहण से जुड़े वादों के उल्लंघन और कर्मचारियों की बर्खास्तगी के विरोध में ‘बुद्धि–शुद्धि हवन’ किया। प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन ने इस विरोध को “राजनीतिक प्रेरित” बताया है, जबकि प्रदर्शनकारी इसे अपनी अस्तित्व की लड़ाई बता रहे हैं।
यह विरोध बीते पांच दिनों से लगातार जारी है। बिचपुरी कैंपस के मुख्य गेट पर एक दर्जन से अधिक गांवों के लोग धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि कॉलेज की संचालक संस्था “बलवंत एजुकेशनल सोसाइटी” मनमानी पर उतर आई है और कर्मचारियों को बिना किसी उचित प्रक्रिया के नौकरी से निकाला जा रहा है। ग्रामीणों की मांगों की संख्या कुल 12 बिंदुओं पर आधारित है, जिनमें बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली, किसानों को रोजगार में वरीयता, जमीन अधिग्रहण के मुआवजे और वादों का पालन, तथा कैंपस की नियुक्तियों और प्रक्रियाओं की पारदर्शिता शामिल है।
हवन से तेज हुआ आंदोलन — ग्रामीणों ने कहा: “प्रबंधन की बुद्धि शुद्ध हो”
मंगलवार को आंदोलनकारियों ने धरनास्थल पर ही हवन का आयोजन किया। सामूहिक रूप से ‘बुद्धि–शुद्धि’ की आहुतियाँ डाली गईं। मंच से ग्रामीण नेताओं ने आरोप लगाया कि कॉलेज प्रबंधन ने वर्षों पुरानी पारदर्शी व्यवस्था को ध्वस्त करके कैंपस को निजी हितों की प्रयोगशाला बना दिया है।
किसान मजदूर नेता चौधरी दिलीप सिंह ने कहा कि
“कॉलेज में जो नियुक्तियाँ हो रही हैं, वे न तो नियमों में आती हैं और न ही नैतिकता में। जिन कर्मचारियों ने वर्षों सेवा दी, उन्हें बाहर कर दिया गया और मनमानी भर्ती शुरू कर दी गई। यह अन्याय अब नहीं सहा जाएगा।”
ग्रामीणों ने इसके बाद सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। उनका कहना था कि प्रबंधन “अहंकार और मनमानी” में डूबा हुआ है और हवन–पाठ का उद्देश्य है कि उनकी बुद्धि सही दिशा में लौटे।
किसानों ने उठाए गंभीर आरोप — “हमसे जमीन ली, वादे पूरे नहीं किए”
कैंपस से जुड़े गांवों — लउवाबस्ती, अमृतपुर, लखावली, झखारा और अंबेथी — के ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों पहले जब कॉलेज विस्तार के नाम पर किसानों से जमीन ली गई थी, तब प्रबंधन ने उन्हें कई आश्वासन दिए थे:
- परिवार के सदस्यों को नौकरी
- भर्ती में वरीयता
- कॉलेज में प्रवेश में विशेष अंक
- अधिग्रहित भूमि के बदले आलौंडा क्षेत्र में जमीन पर कब्जा
ग्रामीणों का आरोप है कि इनमें से अधिकांश वादे पूरे नहीं किए गए।
किसानों ने कहा कि जमीन चली गई, लेकिन बदले में न नौकरी मिली, न कोई वरीयता।
भाजपा नेता भरत सिंह फौजी ने कहा:
“किसानों की जमीन लेकर कॉलेज खड़ा किया गया और अब उन्हीं किसानों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। यह सरासर धोखा है।”
टेंट लगाने पर रोक से आंदोलन भड़का, प्रशासन पर पक्षपात का आरोप
सोमवार रात ग्रामीणों ने धरनास्थल पर टेंट लगाने की कोशिश की, लेकिन प्रशासन ने टेंट लगाने की अनुमति नहीं दी।
इस रोक के विरोध में मंगलवार को प्रदर्शन और तेज हो गया।
लोगों ने इसे आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश बताया और उसी विरोध के बीच हवन का निर्णय लिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने प्रबंधन के इशारे पर टेंट लगाने से रोका।
कॉलेज प्रबंधन की सफाई — “नियुक्ति, हटाना, निलंबन… सब नियमबद्ध प्रक्रिया है”
दूसरी ओर, आरबीएस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. विजय श्रीवास्तव ने कहा कि
“किसी की नियुक्ति या निलंबन कॉलेज एक्ट और सोसाइटी नियमों के तहत निर्धारित प्रक्रिया में ही होता है। कुछ लोग राजनीतिक उद्देश्य से गलत माहौल बना रहे हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि
“किसी व्यक्ति या समूह को बिना अधिकार कॉलेज के प्रशासनिक फैसलों में हस्तक्षेप का हक नहीं है।”
कॉलेज प्रबंधन का दावा है कि पूरा मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है और कैंपस की स्वायत्तता को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
ग्रामीणों की 12 सूत्रीय मांगें — बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली से लेकर जमीन पर कब्जा दिलाने तक
ग्रामीणों की सूची में प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों की बहाली
- मृतक आश्रितों को नौकरी
- किसानों के परिजनों को नियुक्ति में प्राथमिकता
- जमीन समझौतों में किए वादों का पालन
- पूर्व में वादा किए 17 अतिरिक्त वेटेज अंक लागू करना
- अधिग्रहित भूमि के बदले आलौंडा में भूमि पर कब्जा दिलाना
- कॉलेज की नियुक्तियों और सेवाओं की ऑडिट रिपोर्ट
- चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता
प्रबंधन पर आरोप है कि सभी मांगों पर संवाद की जगह “एकतरफा फैसले” थोपे जा रहे हैं।
इलाके में तनाव — पुलिस बल तैनात, प्रशासन ने कहा: “स्थिति नियंत्रण में”
धरना स्थल पर भीड़ बढ़ती जा रही है।
गांवों से ट्रैक्टर–ट्रॉलियाँ भी पहुंचाई गईं।
प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है।
एसडीएम और सीओ लगातार कैंपस के आसपास चक्कर लगा रहे हैं।
अधिकारियों ने कहा कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और संवाद के जरिए ही समाधान होगा।
आंदोलन में महिलाएँ भी उतरीं मैदान में — “बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं”
बिचपुरी आंदोलन का सबसे उल्लेखनीय पक्ष यह रहा कि मंगलवार को बड़ी संख्या में महिलाएँ भी धरने पर आ बैठीं।
कुछ महिलाओं ने कहा कि उनके परिवार के युवा वर्षों से कैंपस में काम कर रहे थे, लेकिन अचानक बिना कारण बताए उन्हें नौकरी से हटा दिया गया।
अमृतपुर निवासी गीता देवी ने कहा—
“कॉलेज में हमारे घर के लोग 10–12 साल से काम कर रहे थे। किसी की गलती भी नहीं थी। एक दिन अचानक बाहर कर दिया। क्या हम लोग इंसान नहीं हैं? बच्चों का भविष्य किसके भरोसे चलाएं?”
महिलाओं ने प्रबंधन से यह भी पूछा कि
कैंपस की भर्ती प्रक्रिया में बाहर के जिलों के बजाय स्थानीय लोगों को प्राथमिकता क्यों नहीं दी जाती?
उनका आरोप है कि वर्षों से कॉलेज प्रबंधन “बाहरी प्रभावों” के आधार पर गैर-स्थानीय व्यक्तियों को नौकरी दे रहा है, जिससे स्थानीय परिवारों का रोजगार छिन रहा है।
पूर्व कर्मचारियों के आरोप — “बिना नोटिस, बिना कारण, सीधे बाहर”
धरने पर बैठे कई कर्मचारी ऐसे थे जिन्हें 8 से 20 वर्ष तक की सेवा के बाद हटाया गया है।
पूर्व कर्मचारी मोहित पांडे ने बताया—
“हमने पूरा जीवन कॉलेज को दिया है। सुबह 8 बजे से रात तक कॉलेज के लिए काम किया। अब कहा जा रहा है कि आपकी जरूरत नहीं है। यह कौन सा न्याय है?”
कई कर्मचारियों ने दावा किया कि उन्हें न तो शो-कॉज़ नोटिस दिया गया और न ही डिपार्टमेंटल जांच हुई। वे कहते हैं कि:
- हटाना एकतरफा फैसला था
- कारण स्पष्ट नहीं बताए गए
- नियमों के तहत अपील का मौका भी नहीं दिया गया
उनका आरोप है कि प्रबंधन अपने पसंदीदा लोगों को जगह देने के लिए पुरानी टीम को हटाना चाहता है।
आंदोलनस्थल पर राजनीतिक हलचल — नेता पहुंचे समर्थन में
बिचपुरी कैंपस का आंदोलन धीरे-धीरे राजनीतिक रंग भी लेने लगा है।
कई स्थानीय नेताओं ने धरने पर पहुंचकर ग्रामीणों को समर्थन दिया।
भाजपा नेता भरत सिंह फौजी, कांग्रेस के अरुण चौबे, और दर्जनों प्रभावशाली सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी वहाँ पहुंचे।
हालांकि कुछ नेताओं की उपस्थिति पर ग्रामीणों का कहना था कि
“मुद्दा राजनीतिक नहीं, सामाजिक और रोजगार का है।”
लेकिन कॉलेज प्रबंधन इसे पूरी तरह “राजनीतिक दबाव का खेल” बता रहा है।
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ हवन
धरनास्थल पर हुए ‘बुद्धि–शुद्धि’ हवन के वीडियो और फोटो शाम तक सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गए।
फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप ग्रुपों में ग्रामीणों ने आंदोलन का विवरण साझा किया।
कई युवाओं ने #BichpuriCampusProtest और #RBSCollege tags के साथ पोस्ट किया।
ग्रामीणों का कहना है कि—
“जब तक प्रबंधन हमसे संवाद नहीं करेगा, आंदोलन इसी तरह चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगा।”
प्रशासन की कोशिश — “बात–चीत कराएंगे, लेकिन कानून–व्यवस्था बिगड़ने नहीं देंगे”
एसडीएम ने कहा कि प्रशासन वार्ता की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने कहा—
“यदि प्रदर्शन शांतिपूर्वक चलता है तो प्रशासन किसी को रोकेगा नहीं।
लेकिन अगर कोई कानून हाथ में लेने की कोशिश करेगा, तो कार्रवाई की जाएगी।”
कॉलेज गेट पर पीएसी और पुलिस बल तैनात रहने के कारण आसपास के छात्रों और ग्रामीणों में तनाव का माहौल बना हुआ है।
कैंपस के छात्र भी नाराज़ — “कक्षाएँ प्रभावित, माहौल खराब”
कैंपस के छात्र भी इस माहौल से प्रभावित हैं।
कई छात्रों ने कहा कि:
- कक्षाएँ बाधित हो रही हैं
- व्यावहारिक परीक्षाएँ प्रभावित हैं
- प्रशासनिक कार्य ठप पड़े हैं
एमएससी छात्र अभिषेक कुमार ने बताया—
“कैंपस में तनावपूर्ण माहौल है। हम चाहते हैं कि प्रबंधन और ग्रामीण जल्दी समाधान निकालें।”
छात्रों ने प्रबंधन से अपील की कि वे ग्रामीणों और कर्मचारियों की मांगों पर विचार करें ताकि माहौल सामान्य हो सके।
क्या है बलवंत एजुकेशनल सोसाइटी? — कॉलेज प्रबंधन की जड़ में यह संस्था
आरबीएस कॉलेज की संचालक संस्था “बलवंत एजुकेशनल सोसाइटी” है, जिसे लेकर ग्रामीणों के मन में वर्षों से अविश्वास की भावना बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि सोसाइटी:
- मनमाने तरीके से नियुक्तियाँ करती है
- चयन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता नहीं रखती
- जमीन अधिग्रहण के वादों को भूल गई है
सोसाइटी के खिलाफ पहले भी समय–समय पर विवाद उठते रहे हैं, लेकिन इस बार आंदोलन अधिक संगठित और व्यापक दिखाई दे रहा है।
क्या आंदोलन और भड़केगा? — कई गांवों ने किया 48 घंटे का अल्टीमेटम
धरने पर बैठे प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि प्रबंधन ने अगले 48 घंटे में वार्ता नहीं की, तो:
- कैंपस का प्रवेश पूरी तरह बंद किया जाएगा
- ट्रैक्टरों से जाम लगाया जाएगा
- जिला मुख्यालय तक कूच किया जाएगा
- आरबीएस कैंपस के कई विभागों का संचालन रोका जाएगा
कई गांवों ने भी सहमति जताई है कि वे अब अविरत आंदोलन करेंगे।
कुल मिलाकर बिचपुरी कैंपस का विवाद अब केवल प्रशासन बनाम ग्रामीण नहीं, बल्कि कॉलेज प्रबंधन बनाम समाज जैसा रूप लेने लगा है।
क्या कहता है कानून? — अधिग्रहित जमीन पर रोजगार के वादों का पालन जरूरी
कानूनी जानकारों का कहना है कि
यदि कृषि भूमि अधिग्रहण के समय किसानों से लिखित या मौखिक वादे किए गए थे, तो प्रबंधन को उन्हें निभाना होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार:
- भूमि के बदले रोजगार देना
- शिक्षा में रियायत
- वेटेज अंक
- पुनर्वास
जैसे वादों को “कॉन्ट्रैक्चुअल दायित्व” माना जाता है और इन्हें पूरा करना आवश्यक होता है।
ग्रामीण इन्हीं दायित्वों का हवाला देते हुए आंदोलन चला रहे हैं।
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समाधान बातचीत से ही निकलेगा
बिचपुरी कैंपस का विवाद गहराता जा रहा है।
ग्रामीणों की नाराज़गी जमीन और रोजगार से जुड़ी है, जबकि प्रबंधन इसे राजनीतिक बता रहा है।
धरने में हवन, हनुमान चालीसा, और महिलाओं–कर्मचारियों की बड़े पैमाने पर भागीदारी यह दिखाती है कि मामला केवल नाराज़गी का नहीं बल्कि आत्मसम्मान और विश्वास का हो चुका है।
अब पूरे क्षेत्र की निगाहें इस पर हैं कि
क्या प्रबंधन वार्ता के लिए आगे आता है
या आंदोलन अगले चरण में प्रवेश करता है।
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✍️ संपादन: ठाकुर पवन सिंह
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