क्राइम/स्टेट डेस्क, Taj News | Updated: Thursday, 22 Jan 2026 09:15 AM IST
रतलाम (Ratlam): मध्य प्रदेश के रतलाम से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने हर माता-पिता को सोचने पर मजबूर कर दिया है। शहर के औद्योगिक क्षेत्र थाना अंतर्गत विरियाखेड़ी इलाके में 12 वर्षीय छात्र सनी उर्फ शेखर ने अपने ही घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह कक्षा 5वीं का छात्र था और रूह कंपा देने वाली बात यह है कि उसने स्कूल की यूनिफॉर्म में ही मौत को गले लगा लिया। सनी अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसकी मौत ने न केवल परिवार बल्कि पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन शुरुआती जांच में मोबाइल गेमिंग की लत और परीक्षा का तनाव अहम कारण माने जा रहे हैं।

माता-पिता काम पर गए, पीछे से बेटा झूल गया फंदे पर
घटना बुधवार दोपहर करीब 2 बजे की है। पुलिस के मुताबिक, सनी के पिता मोहनलाल डामोर राम मंदिर क्षेत्र में एक मिठाई की दुकान पर काम करते हैं, जबकि मां शारदा भी अपने काम पर गई हुई थीं। बुधवार सुबह 8 बजे दोनों काम पर निकल गए थे। सनी घर पर अकेला था। दोपहर करीब 2 बजे जब मां शारदा घर लौटीं, तो मंजर देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उनका लाडला बेटा घर के हॉल में दरवाजे के ऊपर दुपट्टे का फंदा बनाकर लटका हुआ था। मां की चीख सुनकर पड़ोसी दौड़े। पड़ोसी विकास डामोर और दोलसिंह ने तुरंत उसे नीचे उतारा और निजी अस्पताल लेकर भागे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
आखिरी विषय का था टेस्ट, लेकिन स्कूल नहीं गया
परिजनों और दोस्तों से पूछताछ में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। सनी के दोस्तों ने बताया कि बुधवार को स्कूल में आखिरी विषय का टेस्ट था। सनी ने सुबह स्कूल यूनिफॉर्म भी पहन ली थी। रिश्तेदार कृष्णा ने बताया कि सुबह करीब 10 बजे सनी के पिता ने पड़ोस की काकी के मोबाइल पर फोन कर उससे बात की थी। तब सनी ने झूठ बोला कि “आज छुट्टी है” और वह स्कूल नहीं गया। शायद वह एग्जाम के डर से घर पर ही रुक गया था। शाम को उसे एक शादी समारोह में भी जाना था, लेकिन उससे पहले ही उसने यह खौफनाक कदम उठा लिया।
मोबाइल गेम में ‘लेवल’ बढ़ाने की थी जिद्द
जांच में ‘मोबाइल गेमिंग’ का एक खतरनाक पहलू भी सामने आ रहा है। परिजनों ने पुलिस को बताया कि सनी को मोबाइल पर गेम खेलने का बहुत शौक था। वह अक्सर गेम में ‘लेवल’ (Level) बढ़ाने और आगे बढ़ने की जिद्द करता था। आशंका जताई जा रही है कि गेमिंग की इसी लत या किसी टास्क के दबाव ने उसे अवसाद (Depression) में धकेल दिया हो।
परिवार का इकलौता सहारा था सनी
यह घटना इसलिए भी दर्दनाक है क्योंकि सनी अपने परिवार का इकलौता बेटा था। पिता मोहनलाल ने बताया कि इससे पहले उनकी एक संतान की डेढ़ साल की उम्र में निमोनिया से मौत हो चुकी थी। सनी ही उनके बुढ़ापे का एकमात्र सहारा था, जो अब उनसे छिन गया है। एक हंसते-खेलते परिवार में अब सिर्फ सन्नाटा पसरा है।
मनोचिकित्सक की चेतावनी: बच्चों पर ध्यान दें
रतलाम के मनोचिकित्सक डॉ. प्रहलाद पाटीदार ने इस घटना को बेहद चिंताजनक बताया है। उन्होंने कहा, “आजकल कम उम्र के बच्चों में मानसिक तनाव तेजी से बढ़ रहा है। 10 से 15 साल की उम्र में बच्चे भावनात्मक रूप से परिपक्व (Mature) नहीं होते। वे समस्याओं को स्थायी मान लेते हैं और असफलता से डरते हैं।” डॉ. पाटीदार ने कहा कि मोबाइल गेमिंग की लत बच्चों के दिमाग को हाइजैक कर रही है। वर्चुअल दुनिया में हार-जीत का असर उन पर इतना गहरा होता है कि वे रियल लाइफ में भी खुद को खत्म करने जैसा कदम उठा लेते हैं।
पुलिस का बयान
औद्योगिक क्षेत्र थाना प्रभारी सत्येंद्र रघुवंशी ने बताया कि पुलिस को घटना की सूचना थोड़ी देरी से मिली। जब तक पुलिस पहुंची, परिजन शव को अस्पताल ले जा चुके थे। शव का पोस्टमार्टम मेडिकल कॉलेज में कराया गया है। पुलिस हर एंगल से मामले की जांच कर रही है कि क्या किसी ने उसे उकसाया था या यह गेमिंग और पढ़ाई के दबाव का परिणाम है।
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