आम आदमी पार्टी की राघव चड्ढा पर गाज: रिएक्शन में पोस्ट किया वीडियो

National Desk, Taj News | 📍नई दिल्ली, भारत | Friday, April 3, 2026, 08:35:10 AM IST

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नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी ने अपने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा पर बहुत बड़ी कार्रवाई की है। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, पार्टी नेतृत्व ने उच्च सदन में उनके उपनेता पद को तत्काल प्रभाव से छीन लिया है। गौरतलब है कि, राघव कभी अरविंद केजरीवाल के सबसे खास और करीबी नेताओं में गिने जाते थे। इसलिए, इस अचानक हुई कार्रवाई ने पूरी दिल्ली की राजनीति में एक भूचाल ला दिया है। इसके बाद, पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को भी एक सख्त चिट्ठी लिखी है। पार्टी ने सचिवालय से राघव चड्ढा को सदन में बोलने का समय न देने का स्पष्ट अनुरोध किया है। नतीजतन, राजनीतिक गलियारों में इस बड़े फैसले को लेकर अब हलचल काफी ज्यादा तेज हो गई है।

HIGHLIGHTS
  • बड़ी कार्रवाई: आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता के अहम पद से अचानक हटा दिया है।
  • अशोक मित्तल बने उपनेता: राघव चड्ढा की जगह अब पंजाब के राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल यह बड़ी जिम्मेदारी संभालेंगे।
  • राघव का रिएक्शन: पद से हटने के बाद राघव ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर ‘बुरी नजर’ वाले इमोजी के साथ एक वीडियो पोस्ट किया।
  • बढ़ते मतभेद: राघव चड्ढा पिछले कुछ महीनों से लगातार पार्टी लाइन से अलग चलकर अपनी एक नई सियासी राह बना रहे थे।

राघव चड्ढा पर गाज: आप ने छीना राज्यसभा में बोलने का हक

आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा के पर कतरने के लिए कई कड़े कदम एक साथ उठाए हैं। गौरतलब है कि, सिर्फ उपनेता का पद छीनना ही पार्टी का अंतिम लक्ष्य बिल्कुल नहीं था। इसके अलावा, पार्टी ने गुरुवार को राज्यसभा सचिवालय को एक बहुत ही कड़ा पत्र लिखा। पार्टी ने उस पत्र में स्पष्ट तौर पर अपनी बात रखी है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि राघव को अब आम आदमी पार्टी के कोटे से बोलने का कोई समय न मिले। चूंकि संसदीय नियमों में पार्टी कोटे का समय आलाकमान तय करता है, इसलिए राघव अब सदन में लगभग मौन रहेंगे।

इसके बाद, आम आदमी पार्टी ने उद्योगपति से सांसद बने अशोक मित्तल को अपना नया उपनेता नियुक्त कर दिया है। इसलिए, अशोक मित्तल अब उच्च सदन में पार्टी की रणनीति और समन्वय का पूरा जिम्मा संभालेंगे। हालांकि, यह फैसला राजनीतिक पंडितों के लिए भी बहुत ही ज्यादा चौंकाने वाला है। क्योंकि, राघव चड्ढा राष्ट्रीय स्तर पर हमेशा पार्टी की एक मजबूत और युवा आवाज माने जाते थे। नतीजतन, इस कार्रवाई ने पार्टी के अंदरूनी कलह को पूरी तरह से सड़क पर ला दिया है।

राघव चड्ढा का रिएक्शन: ‘बुरी नजर’ वाले इमोजी का गहरा सच

राघव चड्ढा ने पार्टी की इस बड़ी कार्रवाई के बाद अपनी चुप्पी बहुत ही रहस्यमयी तरीके से तोड़ी है। गौरतलब है कि, पद से हटने के कुछ ही घंटों बाद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर अपना एक खास वीडियो साझा किया। उन्होंने इस वीडियो में उच्च सदन में दिए गए अपने पुराने और दमदार भाषणों के कई क्लिप जोड़े हैं। इसके अलावा, उन्होंने इस वीडियो के कैप्शन में ‘बुरी नजर’ से बचने वाला एक खास इमोजी (🧿) भी लगाया है। आप इस लिंक पर क्लिक करके वह वीडियो देख सकते हैं।

इसलिए, राजनीतिक विश्लेषक उनके इस ‘बुरी नजर’ वाले तंज को बहुत ही गहराई से देख रहे हैं। चूंकि राघव चड्ढा सीधे तौर पर पार्टी नेतृत्व का नाम नहीं ले सकते हैं, इसलिए उन्होंने इशारों में अपना दर्द बयां किया है। इसके बाद, इंटरनेट पर उनके समर्थक इस वीडियो को भारी संख्या में शेयर कर रहे हैं। दूसरी ओर, कुछ लोग इसे पार्टी के अंदर उनके बढ़ते अकेलेपन की एक साफ निशानी मान रहे हैं। नतीजतन, उनका यह वीडियो अब एक बहुत बड़े राजनीतिक विवाद का मुख्य केंद्र बन गया है।

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आम आदमी पार्टी की राजनीति: क्यों खड़े हुए इतने बड़े सवाल

राघव चड्ढा पर हुई यह सख्त कार्रवाई कई बड़े और तीखे सवाल जरूर खड़े करती है। गौरतलब है कि, राघव चड्ढा हमेशा से अरविंद केजरीवाल के ‘ब्लू-आइड बॉय’ माने जाते रहे हैं। उन्होंने पंजाब विधानसभा चुनाव में भी पार्टी के लिए एक बहुत ही शानदार और अहम भूमिका निभाई थी। इसलिए, पार्टी के अंदर उनका रुतबा किसी कैबिनेट मंत्री से कम बिल्कुल नहीं था। लेकिन, हाल के कुछ महीनों में दोनों के बीच की दूरियां बहुत ही तेजी से बढ़ने लगी थीं।

इसके अलावा, पार्टी सूत्रों का कहना है कि राघव चड्ढा अब पार्टी के मुख्य कोर ग्रुप का हिस्सा नहीं रह गए थे। चूंकि वे राष्ट्रीय मीडिया में पार्टी का बचाव करने से बचने लगे थे, इसलिए आलाकमान उनसे काफी ज्यादा नाराज था। इसके बाद, पार्टी ने धीरे-धीरे उनसे कई अहम जिम्मेदारियां वापस लेना शुरू कर दिया। नतीजतन, राघव चड्ढा ने भी अपनी अलग जनसंपर्क राजनीति शुरू कर दी थी। दूसरी ओर, विपक्षी दल इस अंदरूनी घमासान का बहुत ज्यादा मजे ले रहे हैं।

राघव चड्ढा की अलग राह: पार्टी लाइन से तोड़ा अपना नाता

राघव चड्ढा ने पिछले कुछ समय में अपनी एक बिल्कुल नई और अलग छवि बनाने की भरपूर कोशिश की है। गौरतलब है कि, उन्होंने हाल ही में सार्वजनिक मंचों पर ‘पेड पैटरनिटी लीव’ जैसे पश्चिमी मुद्दों को काफी प्रमुखता से उठाया था। इसके अलावा, उन्होंने एयरपोर्ट पर महंगे खाने-पीने की कीमतों और बड़े शहरों के ट्रैफिक की भारी समस्या पर भी कई बहसें छेड़ीं। उन्होंने गिग वर्कर्स (Gig Workers) के अधिकारों के लिए भी अपनी मजबूत आवाज बुलंद की थी।

हालांकि, ये सभी मुद्दे आम आदमी पार्टी की मुख्य और आक्रामक राजनीतिक लाइन से बिल्कुल अलग थे। क्योंकि, पार्टी इस समय केंद्र सरकार के साथ बहुत ही भारी राजनीतिक टकराव में उलझी हुई है। इसलिए, पार्टी चाहती थी कि राघव चड्ढा सरकार पर सीधे राजनीतिक हमले करें। लेकिन, उन्होंने पार्टी के मुख्य राजनीतिक मुद्दों पर अपनी एक लंबी और रहस्यमयी चुप्पी साधे रखी। नतीजतन, पार्टी नेतृत्व को उनका यह व्यक्तिगत एजेंडा बिल्कुल भी पसंद नहीं आया और उनके बीच भारी असहजता बढ़ने लगी।

राघव चड्ढा हुए हाशिये पर: स्टार प्रचारकों की सूची से थे बाहर

राघव चड्ढा को हाशिये पर धकेलने के संकेत आलाकमान ने काफी पहले ही देना शुरू कर दिए थे। गौरतलब है कि, हाल ही में आम आदमी पार्टी ने असम और अन्य राज्यों के चुनावी अभियानों के लिए अपनी नई सूची जारी की थी। पार्टी ने उस महत्वपूर्ण स्टार प्रचारकों की सूची से राघव चड्ढा का नाम पूरी तरह से काट दिया था। इसलिए, यह बात उसी समय एकदम साफ हो गई थी कि अब पार्टी में सब कुछ बिल्कुल ठीक नहीं है।

इसके बाद, चुनावी अभियानों में उनकी भारी गैरमौजूदगी ने इन अटकलों को और भी ज्यादा तेज हवा दे दी। चूंकि राघव एक बहुत ही बेहतरीन और युवा वक्ता हैं, इसलिए उनका चुनाव प्रचार से दूर रहना सबको काफी अजीब लगा। इसके अलावा, वे पार्टी के कई अहम सम्मेलनों और प्रेस वार्ताओं में भी दिखाई देना बिल्कुल बंद हो गए थे। नतीजतन, राजनीति के जानकारों ने यह भांप लिया था कि राघव चड्ढा के पर कभी भी काटे जा सकते हैं। दूसरी ओर, अशोक मित्तल लगातार अपना कद पार्टी में बढ़ाते जा रहे थे।

दिल्ली चुनाव हार का असर: स्वाति मालीवाल भी हैं पूरी तरह बागी

आम आदमी पार्टी के भीतर इन सभी बड़े बदलावों का एक बहुत गहरा कारण 2025 का दिल्ली विधानसभा चुनाव भी है। गौरतलब है कि, उस चुनाव में करारी हार के बाद पार्टी के अंदरूनी समीकरण बहुत ही तेजी से बदल गए हैं। इसलिए, आलाकमान अब पार्टी में किसी भी तरह की गुटबाजी या अनुशासनहीनता को बर्दाश्त करने के बिल्कुल मूड में नहीं है। चूंकि राघव चड्ढा ने नेतृत्व के प्रति सार्वजनिक रूप से अपनी सक्रियता कम कर दी थी, इसलिए उन पर यह भारी गाज गिराई गई है।

इसके अलावा, दिल्ली से ही एक अन्य राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल भी पहले से ही पूरी तरह बागी रुख अपनाए हुए हैं। वे लगातार पार्टी नेतृत्व की बहुत ही तीखी आलोचना करती रही हैं। नतीजतन, आम आदमी पार्टी अब अपने घर को पूरी तरह से दुरुस्त करने में जुट गई है। हालांकि, पार्टी ने अभी तक राघव चड्ढा पर की गई कार्रवाई का कोई भी आधिकारिक कारण बिल्कुल स्पष्ट नहीं किया है। लेकिन, मीडिया रिपोर्ट्स इसे सिर्फ और सिर्फ अनुशासनहीनता और मतभेद का नतीजा ही बता रही हैं। ताज न्यूज़ इस राजनीतिक घटनाक्रम की हर पल की खबर आप तक पहुंचाता रहेगा।

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Pawan Singh

Pawan Singh

Chief Editor, Taj News

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