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इंटरनेशनल डेस्क, Taj News | Updated: Thursday, 22 Jan 2026 06:15 PM IST

इस्लामाबाद/वॉशिंगटन: कंगाली की कगार पर खड़े पाकिस्तान (Pakistan) ने अमेरिका को खुश करने के लिए एक और बड़ा फैसला लिया है, जिस पर उसके अपने ही देश में बवाल मच गया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) की सरकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के नवगठित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) में शामिल होने का आधिकारिक ऐलान किया है। सरकार इसे कूटनीतिक जीत बता रही है, लेकिन पाकिस्तानी अवाम और विपक्षी दलों ने इसे “गुलामी की नई किस्त” करार दिया है। सोशल मीडिया पर शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर (Asim Munir) को जमकर ट्रोल किया जा रहा है, जहां लोग तंज कसते हुए कह रहे हैं कि “शहबाज की बूट-पॉलिश की पुरानी आदत ने देश को फिर गिरवी रख दिया है।”

Shahbaaz Shariff
HIGHLIGHTS
  1. पाकिस्तान सरकार ने ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का किया फैसला।
  2. पाकिस्तानी अवाम का फूटा गुस्सा, शहबाज शरीफ पर कसा ‘बूट पॉलिश’ का तंज।
  3. आर्मी चीफ आसिम मुनीर भी निशाने पर, लोगों ने कहा- डॉलर्स के लिए देश बेचा।
  4. आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान की मजबूरी है अमेरिका को खुश रखना।

क्या है ट्रंप का ‘बोर्ड ऑफ पीस’?

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के नाम पर ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का गठन किया है। आलोचकों का मानना है कि यह बोर्ड असल में अमेरिकी हितों को साधने और मुस्लिम देशों पर अमेरिका की पकड़ मजबूत करने का एक जरिया है। पाकिस्तान ने बिना किसी शर्त के इसमें शामिल होने की सहमति दे दी है, जिसे वहां की जनता “संप्रभुता का सौदा” मान रही है।

सोशल मीडिया पर आई बाढ़: ‘बैगर्स कांट बी चूजर्स’

जैसे ही यह खबर सामने आई, पाकिस्तान में ट्विटर (X) और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर गुस्से का ज्वार फूट पड़ा।

  • एक यूजर ने लिखा, “शहबाज शरीफ की बूट-पॉलिश करने की आदत कभी नहीं जाएगी। पहले फौज के बूट चमकते थे, अब ट्रंप के चमक रहे हैं।”
  • इमरान खान की पार्टी पीटीआई (PTI) के समर्थकों ने फिर से “बैगर्स कांट बी चूजर्स” (भिखारी अपनी मर्जी नहीं चला सकते) का नारा ट्रेंड करा दिया।
  • लोगों का कहना है कि चंद डॉलर्स और आईएमएफ (IMF) लोन के लिए सरकार ने देश की विदेश नीति को अमेरिका के कदमों में रख दिया है।

जनरल आसिम मुनीर भी निशाने पर

पाकिस्तान की विदेश और रक्षा नीति में सेना का सीधा दखल माना जाता है। इसलिए, जनता का गुस्सा सिर्फ पीएम तक सीमित नहीं है। लोग आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर पर भी सवाल उठा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यह फैसला रावलपिंडी (सेना मुख्यालय) से लिया गया है ताकि अमेरिका का समर्थन हासिल कर इमरान खान को जेल में रखा जा सके और अपनी सत्ता बचाई जा सके।

ट्रंप की वापसी और पाकिस्तान की मजबूरी

डोनाल्ड ट्रंप का पिछला कार्यकाल पाकिस्तान के लिए बहुत अच्छा नहीं रहा था, जब उन्होंने पाकिस्तान की सहायता रोक दी थी। अब आर्थिक संकट में फंसा पाकिस्तान ट्रंप को नाराज करने का जोखिम नहीं उठा सकता। विश्लेषकों का मानना है कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होना पाकिस्तान की मजबूरी है, ताकि अमेरिका के जरिए अंतरराष्ट्रीय कर्ज और मदद का रास्ता खुला रहे।

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