Mahashivratri 2026 Puja Vidhi Shiv Parvati Vivah Katha Thakur Pawan Singh Taj News

Religion Desk, Taj News Reported by: Thakur Pawan Singh | Updated: Sun, 15 Feb 2026 06:00 AM IST

नई दिल्ली/आगरा: “ॐ नमः शिवाय…” आज देशभर के शिवालयों में ‘हर हर महादेव’ की गूंज है। आज 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि (Mahashivratri) का महापर्व मनाया जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार, यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि शिव और शक्ति (प्रकृति और पुरुष) के मिलन की रात्रि है। आज के दिन ही भोलेनाथ और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। इस खास अवसर पर सर्वार्थ सिद्धि योग समेत कई शुभ संयोग बन रहे हैं।

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🕉️ महाशिवरात्रि 2026: एक नज़र में

  • 🕒 निशिता काल (पूजा का सर्वोत्तम समय): रात 11:55 से 12:56 तक।
  • शुभ योग: सर्वार्थ सिद्धि योग (सुबह 7:00 से शाम 7:48 तक)।
  • 🚫 वर्जित: शिवलिंग पर तुलसी, हल्दी, कुमकुम और केतकी के फूल न चढ़ाएं।
Mahashivratri 2026 Shivling Puja Thakur Pawan Singh
महाशिवरात्रि पर शिवलिंग का जलाभिषेक करने से समस्त दुखों का नाश होता है। (फोटो: ताज न्यूज़)

चार प्रहर की पूजा और मंत्र

महाशिवरात्रि पर रात्रि जागरण और चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है। यदि आप पूरी रात पूजा करना चाहते हैं, तो इन मुहूर्तों और मंत्रों का ध्यान रखें:

प्रहरसमय (15-16 Feb)विशेष मंत्र
प्रथम प्रहरशाम 06:39 से 09:45ह्रीं ईशानाय नमः
द्वितीय प्रहररात 09:45 से 12:52ह्रीं अघोराय नम:
तृतीय प्रहररात 12:52 से 03:59ह्रीं वामदेवाय नमः
चतुर्थ प्रहरसुबह 03:59 से 07:06ह्रीं सद्योजाताय नमः

🌺 शिव-पार्वती विवाह की अद्भुत कथा

महाशिवरात्रि केवल व्रत और पूजा का दिन नहीं है, यह उस अलौकिक प्रेम की विजय का उत्सव है, जिसने वैरागी शिव को गृहस्थ बना दिया।

माता पार्वती की कठोर तपस्या:
पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता सती के आत्मदाह के बाद भगवान शिव वैराग्य में चले गए थे और समाधिस्थ हो गए थे। दूसरी ओर, माता सती ने पर्वतराज हिमालय के घर ‘पार्वती’ के रूप में पुनर्जन्म लिया। शिवजी को पति रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने हजारों वर्षों तक कठोर तपस्या की। उन्होंने अन्न-जल त्याग दिया और बेलपत्र खाकर दिन बिताए। उनकी इस निष्ठा को देखकर अंततः भोलेनाथ प्रसन्न हुए और विवाह के लिए मान गए।

शिव की अनोखी बारात:
विवाह का दिन आया। देवता, गंधर्व और अप्सराएं सज-धज कर पहुंचे। लेकिन दूल्हे राजा शिव का स्वरूप तो निराला था! भस्म रमाए, गले में सांप लपेटे, नंदी पर सवार और साथ में भूत-प्रेत, पिशाच और डाकिनियों की बारात। जब यह बारात माता पार्वती के द्वार पर पहुंची, तो उनकी मां मैना देवी शिवजी का यह रौद्र रूप देखकर मूर्छित हो गईं।

चंद्रशेखर स्वरूप और विवाह:
स्थिति को बिगड़ता देख माता पार्वती ने शिवजी से प्रार्थना की कि वे अपने सुंदर स्वरूप में आएं। भक्तों की पुकार सुनकर महादेव ने अपना अलौकिक ‘चंद्रशेखर’ रूप धारण किया— करोड़ों कामदेवों से भी सुंदर। यह रूप देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया। इसके बाद विधि-विधान से शिव और शक्ति का विवाह संपन्न हुआ। यही मिलन सृष्टि के संतुलन का आधार बना।

इसलिए महाशिवरात्रि पर शिव-पार्वती के विवाह का उत्सव मनाया जाता है, जो हमें सिखाता है कि सच्चे प्रेम और तपस्या से ईश्वर को भी पाया जा सकता है।

व्रत पारण का समय

जो भक्त आज (15 फरवरी) व्रत रख रहे हैं, वे अपने व्रत का पारण अगले दिन यानी 16 फरवरी 2026 को सुबह 06:42 से दोपहर 03:10 के बीच कर सकते हैं। पारण से पहले स्नान कर भगवान शिव को जल चढ़ाना न भूलें।

📸 महाशिवरात्रि 2026: भक्तिमय झलकियाँ

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(तस्वीरें: ताज न्यूज़)

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