
Friday, 02 January 2026, 10:43 AM. Indore, Madhya Pradesh
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दूषित और जहरीले पानी ने गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा कर दिया है। भागीरथपुरा इलाके में पिछले कई दिनों से फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप ने भयावह रूप ले लिया है। गुरुवार को 338 नए मरीज सामने आए, जबकि 32 मरीजों की हालत गंभीर होने के चलते उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया है। अब तक करीब 2800 से अधिक लोग इस बीमारी से प्रभावित हो चुके हैं और कई लोगों की मौत की भी पुष्टि हुई है।

भागीरथपुरा बना संक्रमण का केंद्र
भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में तेजी से बीमारी फैल रही है। स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों पर सुबह से देर रात तक मरीजों की भीड़ लगी रही। उल्टी, दस्त, तेज बुखार और कमजोरी की शिकायत लेकर लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। कई परिवारों के सभी सदस्य बीमार पड़ चुके हैं, जिससे इलाके में दहशत का माहौल है।

ICU में 32 मरीज, हालात गंभीर
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, वर्तमान में विभिन्न अस्पतालों में 201 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से 32 मरीजों की हालत नाजुक बनी हुई है और उन्हें आईसीयू में रखा गया है। अब तक 272 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिनमें से 71 मरीजों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग की 21 टीमें मैदान में
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने 21 मेडिकल टीमें गठित की हैं। इन टीमों में डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, एएनएम और आशा कार्यकर्ता शामिल हैं। टीमें घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही हैं और उबला हुआ पानी पीने तथा बाहर का भोजन न करने की सलाह दे रही हैं।
गुरुवार को 1714 घरों का सर्वे किया गया, जिसमें 8571 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई। इनमें से 338 मरीज चिन्हित किए गए, जिन्हें मौके पर प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया।
पानी के टैंकर से भी डर रहे लोग
नगर निगम द्वारा इलाके में पानी के टैंकर भेजे जा रहे हैं, लेकिन रहवासी उस पानी को भी इस्तेमाल करने से डर रहे हैं। अधिकांश लोग आरओ या बोतलबंद पानी मंगवाकर पीने को मजबूर हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि निगम और जलप्रदाय विभाग की लापरवाही के चलते यह स्थिति बनी है।
जल शिकायतों में अचानक उछाल
दूषित पानी से हुई मौतों और बीमारियों के बाद नगर निगम की इंदौर-311 हेल्पलाइन पर जल संबंधी शिकायतों की बाढ़ आ गई है। पिछले 24 घंटों में 206 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें सबसे ज्यादा शिकायतें जोन नंबर-5 से आई हैं। इसके बाद निगम अधिकारियों ने जल आपूर्ति व्यवस्था की जांच तेज कर दी है।
रहवासियों में आक्रोश
इलाके के लोगों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद जल आपूर्ति की लाइनों की समय रहते जांच नहीं की गई। यदि पहले ही दूषित पानी की समस्या को गंभीरता से लिया गया होता, तो इतनी बड़ी संख्या में लोग बीमार न पड़ते।
प्रशासन पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग मांग कर रहे हैं कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी समाधान निकाला जाए।
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