नागरिक परिक्रमा: 1 रुपये लीटर दूध का सच! फ्लिपकार्ट की ‘शिकारी नीति’ और सहकारिता पर संजय पराते का कड़ा प्रहार

आर्टिकल Desk, Taj News | Tuesday, April 07, 2026, 05:45:00 PM IST

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Sanjay Parate Writer
संजय पराते
उपाध्यक्ष, छत्तीसगढ़ किसान सभा
वरिष्ठ राजनैतिक विश्लेषक
वरिष्ठ राजनैतिक विश्लेषक और किसान नेता संजय पराते ने अपने इस बेहद मारक आलेख में ‘फ्लिपकार्ट’ (वॉलमार्ट) की आक्रामक नीतियों की पूरी पोल खोल दी है। दरअसल, उन्होंने बताया है कि कैसे कर्नाटक में महज़ ‘1 रुपये प्रति लीटर’ में दूध बेचकर ये विदेशी कंपनियाँ हमारे देसी किसानों और सहकारी संस्थाओं को पूरी तरह बर्बाद कर रही हैं। इसके अलावा, उन्होंने इस गंभीर संकट पर अमित शाह के सहकारिता मंत्रालय की चुप्पी पर भी बहुत कड़ा प्रहार किया है। इसलिए, पढ़िए यह विचारोत्तेजक राजनैतिक विश्लेषण:

मुख्य बिंदु

  • कर्नाटक में फ्लिपकार्ट (वॉलमार्ट) अपने आक्रामक प्रचार अभियान के तहत महज़ 1 रुपये प्रति लीटर की दर से दूध बेच रहा है।
  • विदेशी कॉर्पोरेट की इस ‘शिकारी’ नीति के कारण बेंगलुरु मिल्क यूनियन जैसी सहकारी संस्थाओं को रोज़ाना 50,000 लीटर की भारी कमी झेलनी पड़ रही है।
  • दरअसल, यह मुक्त व्यापार समझौतों की आड़ में तीसरी दुनिया के बाज़ार और घरेलू उत्पादन को पूरी तरह नष्ट करने की एक बड़ी साज़िश है।
  • हालाँकि डेयरी किसान इस संकट से जूझ रहे हैं, लेकिन अमित शाह के नेतृत्व वाला सहकारिता मंत्रालय अभी तक पूरी तरह खामोश बैठा है।

नागरिक परिक्रमा: एक रूपये प्रति लीटर में दूध!

है न चौंकाने वाली बात! लेकिन है सही। जी हां, कर्नाटक में फ्लिपकार्ट अपने प्रचारात्मक बिक्री अभियान के तहत एक रूपये प्रति लीटर की दर पर दूध बेच रहा है। इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का स्वामित्व अमेरिकी खुदरा दिग्गज वॉलमार्ट के पास है। प्रचार अवधि के दौरान लाखों लीटर दूध मिट्टी के भाव में फ्लिपकार्ट ने बेचा है, जिससे बेंगलुरु मिल्क यूनियन लिमिटेड जैसे सहकारी संघों की बिक्री में लगभग 50,000 लीटर प्रतिदिन की कमी दर्ज की गई है। इसका सीधा असर पशुपालक और दूध उत्पादक किसानों की आजीविका पर पड़ा है। ऐसा ही चलता रहा, तो कुछ दिनों में ही कर्नाटक की सहकारी समितियों के ठप्प होने का खतरा पैदा हो गया है।

यह तो केवल झांकी है। जब अमेरिका और विभिन्न विकसित देशों के साथ केंद्र की भाजपा सरकार ने जो मुक्त व्यापार समझौते किए हैं, उन पर अमल के कृषि क्षेत्र में जो परिणाम सामने आएंगे, वे हमारे किसानों और खेती-किसानी के लिए कितने विनाशकारी होंगे, कर्नाटक के दूध बाजार पर कब्जे के लिए वॉलमार्ट द्वारा की जा रही इस आक्रामक नीति से समझा जा सकता है। फ्लिपकार्ट द्वारा एक रूपये की कीमत पर दूध की बिक्री कोई साधारण मार्केटिंग अभ्यास नहीं है, बल्कि वैश्विक पूंजी से समर्थित बड़ी प्लेटफ़ॉर्म कंपनियों द्वारा अपनाई जाने वाली शिकारी मूल्य निर्धारण की एक क्लासिक मिसाल है, जिसका शिकार भारत और तीसरी दुनिया के गरीब देशों को बनाया जा रहा है। ऐसी रणनीतियाँ बाजार पर कब्ज़ा करने, मौजूदा सहकारी संस्थाओं को कमजोर करने और घरेलू उत्पादन प्रणाली को नष्ट करने और अंततः खरीद व वितरण पर कॉरपोरेट नियंत्रण स्थापित करने के उद्देश्य से अपनाई जाती हैं। तीसरी दुनिया का शोषण करने की यह साम्राज्यवादी रणनीति है。

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वालमार्ट-फ्लिपकार्ट की इस शिकारी रणनीति से पूरे कर्नाटक डेयरी किसानों में गुस्सा पैदा हुआ है, लेकिन अमित शाह के नेतृत्व वाला सहकारिता मंत्रालय अभी तक सोया हुआ है। उसने कर्नाटक के किसानों को बचाने के लिए अभी तक कोई कदम推进 नहीं उठाया है और ऐसा लगता है कि उसने विदेशी कॉरपोरेट कंपनियों और बाजार के दबाव के आगे समर्पण कर दिया है。

दूध बाजार पर यह आक्रमण ऐसे समय में और भी चिंताजनक है, जब डेयरी किसान पहले से ही बढ़ती लागत, भुगतान में देरी और दूध उत्पादन के लिए उचित लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। कर्नाटक के दूध बाजार पर कब्जे के लिए फ्लिपकार्ट के इस शिकारी अभियान के बाद किसानों के दूध के औसत विक्रय मूल्य में भारी गिरावट तो आई ही है, दूध बिक्री में गिरावट के मद्देनजर सोसायटियों ने किसानों का दूध खरीदना भी कम कर दिया है। इस प्रकार, किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। दूध बाजार पर कॉरपोरेट कंपनियों द्वारा आक्रमण की यह रणनीति भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग द्वारा निर्धारित मानदंडों का भी उल्लंघन करती है और इसकी जांच की जानी चाहिए。

यह तो साफ है कि भविष्य में सहकारी संस्थाओं पर और ज्यादा हमले होंगे। उतना ही यह भी साफ है कि न तो अमित शाह के हाथ में देश का सहकारिता क्षेत्र सुरक्षित है और न ही संघी गिरोह के हाथ में देश का भविष्य सुरक्षित है。

(टिप्पणीकार अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा के उपाध्यक्ष हैं। संपर्क : 94242-31650)

Pawan Singh

Pawan Singh

Chief Editor, Taj News
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