Raipur News: सांप्रदायिक फासीवाद के खिलाफ कलमकारों की हुंकार, छत्तीसगढ़ जनवादी लेखक संघ में कामेश्वर पांडेय अध्यक्ष और पूर्णचंद्र रथ बने सचिव

सिटी डेस्क, Taj News | Published by: ठाकुर पवन सिंह | Updated: Sunday, 08 Feb 2026 11:35 PM IST

रायपुर (Raipur News): साहित्य और संस्कृति केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली मशाल है। इसी विचार को बुलंद करते हुए छत्तीसगढ़ जनवादी लेखक संघ (जलेस) का चौथा राज्य सम्मेलन 7 फरवरी को रायपुर में संपन्न हुआ। सम्मेलन का मुख्य स्वर ‘सांप्रदायिक फासीवाद’ और ‘कॉर्पोरेट पूंजी’ के गठजोड़ के खिलाफ रचनात्मक प्रतिरोध खड़ा करना था। इस मौके पर सर्वसम्मति से प्रसिद्ध कहानीकार कामेश्वर पांडेय (कोरबा) को अध्यक्ष और लेखक-पत्रकार पूर्णचंद्र रथ (रायपुर) को राज्य सचिव चुना गया।

सम्मेलन में प्रदेश के 17 जिलों से आए साहित्यकारों, कलाकारों और बुद्धिजीवियों ने हिस्सा लिया और संकल्प लिया कि वे अपनी लेखनी और कला के माध्यम से देश के जनवादी मूल्यों की रक्षा करेंगे।

Chhattisgarh Janwadi Lekhak Sangh 4th conference Raipur, Kameshwar Pandey elected president.
HIGHLIGHTS
  1. नई टीम: कामेश्वर पांडेय अध्यक्ष और पूर्णचंद्र रथ सचिव चुने गए, 17 जिलों के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा।
  2. तीखा हमला: राष्ट्रीय महासचिव नलिन रंजन सिंह ने आरएसएस और कॉर्पोरेट पूंजी के गठजोड़ को देश के लिए खतरा बताया।
  3. संकल्प: लेखकों और कलाकारों ने ‘रचनात्मक प्रतिरोध’ के जरिए फासीवाद से लड़ने का आह्वान किया।
  4. सांस्कृतिक रंग: हबीब तनवीर के नया थियेटर के अमर सिंह गंधर्व और शेखर नाग ने जनगीतों से जगाया जोश।

विस्तृत रिपोर्ट: कॉर्पोरेट लूट और नफरत की राजनीति पर तीखा प्रहार

जनवाद की रक्षा के लिए एकजुटता का आह्वान सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय महासचिव नलिन रंजन सिंह ने अपने विचारोत्तेजक वक्तव्य से माहौल को गरमा दिया। उन्होंने कहा कि आज सत्ता में बैठे लोग आरएसएस के एजेंडे को लागू कर रहे हैं, जो देश की साझी संस्कृति (Ganga-Jamuni Tehzeeb) और वैज्ञानिक चेतना को कुचलने का काम कर रही है। उन्होंने प्रेमचंद के 1936 के ऐतिहासिक भाषण को याद दिलाते हुए कहा, “साहित्य को राजनीति के आगे चलने वाली मशाल बनना होगा।” नलिन ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आरएसएस वेदों और पुराणों की कबीलाई संस्कृति को थोपना चाहता है, जबकि हम कबीर, प्रेमचंद, भगत सिंह और मुक्तिबोध की उस परंपरा के वारिस हैं जो तर्क और समानता की बात करती है।

सड़क पर उतरने का वक्त: प्रो. जयप्रकाश “कॉर्पोरेट पूंजी, सांप्रदायिक फासीवाद और रचनात्मक प्रतिरोध” विषय पर बोलते हुए आलोचक प्रो. जयप्रकाश और नवनिर्वाचित अध्यक्ष कामेश्वर पांडेय ने कहा कि अब समय आ गया है जब कलाकारों को अपनी कला को ‘ड्राइंग रूम’ से निकालकर सड़कों पर लाना होगा। उन्होंने कहा कि कला का असली मकसद तब पूरा होता है जब वह आम जनता के संघर्षों से जुड़ती है और उनके सौंदर्यबोध को निखारती है।

नई कार्यकारिणी का गठन संगठन को मजबूती देने के लिए सर्वसम्मति से नई राज्य कार्यकारिणी का चुनाव किया गया:

  • अध्यक्ष: कामेश्वर पांडेय (कोरबा)
  • उपाध्यक्ष: डॉ. सुखनंदन सिंह नंदन (रायपुर), भास्कर चौधरी (कोरबा)
  • राज्य सचिव: पूर्णचंद्र रथ (रायपुर)
  • उप सचिव: राकेश बम्बोर्डे (दुर्ग), अजय चंद्रवंशी (कवर्धा), नूतनलाल साहू (गरियाबंद)
  • कोषाध्यक्ष: शायर मुमताज (भिलाई)
  • कार्यकारिणी सदस्य: शेखर नाग, शिज्जू शकूर, समयलाल विवेक, सोनिया नायडू।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और सम्मान सम्मेलन में विचारों के साथ-साथ जनगीतों की गूंज भी रही। शेखर नाग और वर्षा बोपचे ने क्रांतिकारी गीत प्रस्तुत किए। वहीं, हबीब तनवीर के मशहूर ‘नया थियेटर’ समूह के कलाकार अमर सिंह गंधर्व ने अपनी प्रस्तुति से समां बांध दिया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार दिवाकर मुक्तिबोध, ‘ढाई आखर प्रेम का’ के निसार अली, आसिफ इकबाल, रजत कृष्ण और संजय पराते सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। स्वागत भाषण अरूणकांत शुक्ला और राजकुमार सोनी ने दिया, जबकि अध्यक्षता परदेशी राम वर्मा ने की।

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✍️ संपादन: ठाकुर पवन सिंह
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