Sunday, 07 December 2025, 7:48:44 PM. Agra, Uttar Pradesh

आगरा। ऐतिहासिक बलवंत एजुकेशनल सोसाइटी में व्याप्त कथित अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और तानाशाही के विरोध में बिचपुरी में चल रहा जनआंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार को यह धरना अपने दसवें दिन में प्रवेश कर गया। कड़ाके की सर्दी और खुले आसमान के नीचे बैठे होने के बावजूद आंदोलनकारियों का जोश कम नहीं हुआ है। इस बीच, आंदोलन को एक नया मोड़ तब मिला जब किसानों का एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल फतेहपुर सीकरी के सांसद राजकुमार चाहर से मिला। जहाँ एक ओर सांसद ने न्याय का भरोसा दिलाया है, वहीं दूसरी ओर किसान नेताओं ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दे दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों का सहानुभूतिपूर्वक समाधान नहीं निकाला गया, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।

सांसद राजकुमार चाहर से मिला प्रतिनिधिमंडल, मिला न्याय का भरोसा

धरने के दसवें दिन आंदोलन की गूंज राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गई। किसानों और क्षेत्रीय लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल फतेहपुर सीकरी के सांसद राजकुमार चाहर से उनके आवास पर मिला। प्रतिनिधिमंडल ने सांसद को बलवंत एजुकेशनल सोसाइटी में चल रहे कथित भ्रष्टाचार, स्थानीय लोगों की अनदेखी और तानाशाही रवैये से विस्तार से अवगत कराया।

किसानों की व्यथा सुनने के बाद सांसद राजकुमार चाहर ने उन्हें आश्वस्त किया कि किसी भी पीड़ित के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा, “यह मामला मेरे संज्ञान में आया है। मैं सुनिश्चित करूंगा कि आपकी समस्याओं का जल्द से जल्द और उचित निराकरण हो। शिक्षण संस्थानों का उद्देश्य सेवा होना चाहिए, न कि शोषण।” सांसद के इस आश्वासन के बाद आंदोलनकारियों में उम्मीद की एक नई किरण जगी है, लेकिन उनका कहना है कि जब तक जमीनी स्तर पर कार्रवाई नहीं होती, धरना जारी रहेगा।

प्रशासन को खुली चेतावनी: समाधान नहीं तो सड़क पर संग्राम

भले ही सांसद ने आश्वासन दिया हो, लेकिन किसान-मजदूर नेताओं का धैर्य अब जवाब दे रहा है। धरना स्थल पर किसान-मजदूर नेता चौधरी दिलीप सिंह और बिचपुरी ब्लॉक संगठन के अध्यक्ष हाकिम सिंह सोलंकी ने हुंकार भरते हुए शासन और प्रशासन को कड़े शब्दों में चेताया।

हाकिम सिंह सोलंकी ने कहा, “हम पिछले 10 दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी जायज मांगों के लिए बैठे हैं। प्रशासन की चुप्पी और उदासीनता अब बर्दाश्त से बाहर हो रही है। हम प्रशासन को चेतावनी देते हैं कि वे आंदोलनकारियों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करें और तत्काल समाधान निकालें। यदि ऐसा नहीं होता है, तो हम उग्र होकर सड़कों पर उतरने और चक्का जाम करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।”

क्या हैं प्रमुख मांगें? जमीन के बदले हक और स्थानीय को वरीयता

आंदोलनकारियों ने रविवार को अपनी प्रमुख मांगों को पुनः दोहराया, जो इस संघर्ष की नींव हैं। उनका कहना है कि राजा बलवंत एजुकेशनल सोसाइटी के संस्थानों के लिए किसानों की बेशकीमती जमीनें अधिग्रहित की गई थीं। उस समय वादा किया गया था कि इसके बदले किसानों और उनके बच्चों को लाभ दिया जाएगा।

आंदोलनकारियों की मुख्य मांगें हैं:

  1. जमीन के बदले मुआवजा और अधिकार: जिन किसानों की जमीनें संस्थानों के लिए ली गई हैं, उन्हें उचित सम्मान और अधिकार मिले।
  2. स्थानीय छात्रों को वेटेज: राजा बलवंत एजुकेशनल सोसाइटी द्वारा संचालित संस्थानों में प्रवेश (एडमिशन) के दौरान स्थानीय छात्रों को पूर्व की भांति वेटेज (वरीयता) दिया जाए।
  3. नौकरियों में प्राथमिकता: संस्था में होने वाली नियुक्तियों में स्थानीय शिक्षित युवाओं को प्राथमिकता दी जाए।
  4. भ्रष्टाचार पर रोक: संस्था में चल रही वित्तीय अनियमितताओं और भाई-भतीजावाद की उच्च स्तरीय जांच हो।
धरने में जुटी भीड़, महिलाएं और बच्चे भी शामिल

रविवार को अवकाश का दिन होने के कारण धरना स्थल पर भारी भीड़ उमड़ी। आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से बिचपुरी पहुंचे। इस आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब इसमें न केवल बुजुर्ग और युवा, बल्कि महिलाएं और बच्चे भी शामिल हो गए हैं।

धरने में प्रमुख रूप से पूर्व प्रधान कृपाल सिंह, भाजपा नेता भरत सिंह सोलंकी, मुनेन्द्र परमार, प्रदीप राना, सहारा के प्रधान बॉबी, वेद प्रकाश सोलंकी, धर्मेंद्र पथोलीवाला, उम्मेद सिंह, दलवीर सोलंकी, शिशुपाल सोलंकी, करणवीर सिंह, बाबूलाल बाल्मीकि, मनोज माहौर, दलवीर सिंह, बॉबी गोला, मेघ सिंह सोलंकी, भूपाल सोलंकी, लप्पू पंडित, संजय चाहर, किशन सिंह ताऊ, त्रिलोकी सोलंकी, और चंद्रपाल राणा मौजूद रहे।

आंदोलनकारियों का कहना है कि यह लड़ाई अब केवल कुछ मांगों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के स्वाभिमान और भविष्य की पीढ़ियों के अधिकारों की लड़ाई बन चुकी है। 10वें दिन भी जारी यह धरना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

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By Thakur Pawan Singh

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