Tuesday, 09 December 2025, 3:15:30 PM. Agra, Uttar Pradesh
आगरा नगर निगम में मंगलवार को एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई। सहायक नगर आयुक्त अशोक प्रिय गौतम के साथ अभद्रता, मारपीट और धमकी देने के आरोपी महापौर के भतीजे हर्ष दिवाकर पर तीन दिन बीत जाने के बावजूद एफआईआर दर्ज न होने से कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा। अधिकारियों और कर्मचारियों ने एकजुट होकर नगर निगम परिसर में तालाबंदी कर दी। सभी चैनल गेटों पर ताले जड़ दिए गए और जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी गई। कर्मचारियों ने साफ अल्टीमेटम दिया है कि जब तक हर्ष दिवाकर के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं होता और उसकी गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक नगर निगम में कोई काम नहीं होगा। इस हड़ताल से निगम का पूरा सिस्टम ठप हो गया है और शहर की व्यवस्था पर संकट मंडराने लगा है।

तीसरे दिन भी FIR नहीं, टूटा कर्मचारियों का धैर्य
यह विवाद पिछले रविवार सुबह एकलव्य स्टेडियम में शुरू हुआ था, जहां एक कार्यक्रम के दौरान महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाह के भतीजे हर्ष दिवाकर ने ड्यूटी पर तैनात सहायक नगर आयुक्त अशोक प्रिय गौतम के साथ सरेआम गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और मारपीट की थी। हर्ष ने खुलेआम धमकी दी थी कि अगर उन्होंने नगर आयुक्त का साथ नहीं छोड़ा तो उनकी पिटाई कराई जाएगी और जान से हाथ धोना पड़ेगा।
घटना के तुरंत बाद पीड़ित अधिकारी ने पुलिस आयुक्त और अन्य शीर्ष अधिकारियों को तहरीर दी थी। उम्मीद थी कि एक राजपत्रित अधिकारी के साथ हुई ऐसी गंभीर घटना पर पुलिस तुरंत कार्रवाई करेगी। लेकिन, बीते कल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगरा दौरे की व्यस्तता के कारण एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी। आज तीसरे दिन भी जब पुलिस ने मुकदमा नहीं लिखा, तो निगम कर्मचारियों का धैर्य जवाब दे गया।
तालाबंदी और ‘गुंडागर्दी नहीं चलेगी’ के नारे
मंगलवार सुबह दफ्तर खुलते ही कर्मचारियों के बीच चर्चा शुरू हो गई कि एक अधिकारी पर हमला होने के बाद भी पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। देखते ही देखते सभी कर्मचारी अपने दफ्तरों से बाहर निकल आए। आक्रोशित कर्मचारियों ने नगर निगम के मुख्य द्वार सहित सभी चैनल गेटों को बंद कर ताले लगा दिए।
परिसर में “मेयर के भतीजे की गुंडागर्दी नहीं चलेगी” और “पुलिस प्रशासन होश में आओ” के नारे गूंजने लगे। अधिकारियों ने भी इस विरोध प्रदर्शन में कर्मचारियों का साथ दिया। उनका कहना है कि अगर एक सहायक नगर आयुक्त सुरक्षित नहीं है, तो सामान्य कर्मचारी कैसे सुरक्षित रहेगा? यह लड़ाई अब केवल एक अधिकारी की नहीं, बल्कि पूरे नगर निगम के स्वाभिमान की बन गई है।
पुलिस पर दबाव की आशंका और शहर पर संकट
सहायक नगर आयुक्त जैसे जिम्मेदार पद पर तैनात अधिकारी के साथ मारपीट के मामले में तीन दिन तक एफआईआर दर्ज न होना पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। चर्चा है कि पुलिस पर मामले को दबाने के लिए भारी राजनीतिक दबाव है।
अब जब कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं, तो प्रशासन के लिए दोहरी चुनौती है। एक तरफ एफआईआर दर्ज करने का दबाव है, तो दूसरी तरफ शहर की व्यवस्था को संभालने की जिम्मेदारी। अगर यह आंदोलन सफाई कर्मचारियों तक फैल गया, तो आगरा शहर में गंदगी और अव्यवस्था का बड़ा संकट पैदा हो सकता है। फिलहाल, नगर निगम पूरी तरह से ठप है और गेंद अब पुलिस प्रशासन के पाले में है।
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मेयर के भतीजे का तांडव: स्टेडियम में अधिकारी से हाथापाई, नगर आयुक्त को पीटने की धमकी
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