भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रभाव और रोजगार पर ओपिनियन

तेरा मन दर्पण कहलाए…. भारत का मानसिक स्वास्थ्य संकट: बढ़ते मामले, 90% इलाज का अभाव

ओपिनियन

Edited by: Thakur Pawan Singh | tajnews.in | 27 Feb 2026, 10:30 am IST

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Taj News Editorial & Opinion Desk

निष्पक्ष विचार, गहरा विश्लेषण और आपकी आवाज़

लेखक और लेख के बारे में: यह विशेष ओपिनियन लेख देश के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार और विश्लेषक बृज खंडेलवाल द्वारा लिखा गया है। लेखक पिछले कई दशकों से भारत के सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी बदलावों को बेहद करीब से देख रहे हैं और उन्होंने इस पर कई शोधपरक लेख भी प्रकाशित किए हैं। इस प्रासंगिक और विचारोत्तेजक लेख में उन्होंने भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते कदम और रोजगार बाजार पर इसके वास्तविक प्रभाव का गहराई से विश्लेषण किया है। आज हर युवा के मन में यह सवाल है कि क्या मशीनें उनकी जगह ले लेंगी? लेखक ने न केवल इस डर की वास्तविकता को सामने रखा है, बल्कि उन नए और असीमित अवसरों पर भी प्रकाश डाला है जो AI क्रांति के साथ भारत के दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं। यह लेख नीति निर्माताओं, छात्रों और कॉर्पोरेट जगत के लिए एक नई दिशा तय करने वाला साबित होगा।

Writer Brij Khandelwal

बृज खंडेलवाल

वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार

क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारत में नौकरियां खा रहा है या नए अवसर गढ़ रहा है?

साल 2026 में हम एक ऐसे तकनीकी युग के मुहाने पर खड़े हैं जहां मशीनें केवल हमारे आदेशों का पालन नहीं कर रही हैं, बल्कि वे खुद सोच रही हैं, लिख रही हैं और बड़े-बड़े फैसले ले रही हैं। भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence in India) अब केवल हॉलीवुड की विज्ञान कथाओं का हिस्सा नहीं रह गया है; यह हमारे ऑफिस की डेस्क, हमारे स्मार्टफोन और हमारी पूरी अर्थव्यवस्था की धड़कन बन चुका है। लेकिन इस अभूतपूर्व तकनीकी क्रांति के साथ एक बड़ा डर भी समाज में तेजी से पनप रहा है— क्या AI हमारी मेहनत से कमाई गई नौकरियां छीन लेगा?

नौकरियों का बदलता स्वरूप: डरने के बजाय खुद को तैयार करें

अगर हम इतिहास के पन्नों को पलटें, तो पाएंगे कि जब 90 के दशक में भारत के अंदर कंप्यूटर और इंटरनेट का प्रवेश हुआ था, तब भी देश में यही हो-हल्ला मचा था कि अब लाखों लोग हमेशा के लिए बेरोजगार हो जाएंगे। कंप्यूटर का भारी विरोध हुआ था। लेकिन इतिहास गवाह है कि उसी कंप्यूटर ने आईटी (IT) सेक्टर के रूप में करोड़ों नई और हाई-पेइंग नौकरियां पैदा कीं, जिससे भारत का मध्य वर्ग आर्थिक रूप से मजबूत हुआ। भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का वर्तमान प्रवेश भी बिल्कुल वैसा ही है। यह कड़वा सच है कि डेटा एंट्री, कॉल सेंटर, और क्लेरिकल जॉब्स जैसी ‘रूटीन’ और दोहराव वाली नौकरियां AI के कारण गंभीर खतरे में हैं। आज के अत्याधुनिक एआई टूल्स अब कुछ सेकंड में वह काम कर देते हैं जिसे करने में एक इंसान को कई घंटे या दिन लगते थे。

लेकिन सिक्के का दूसरा और अधिक उज्जवल पहलू यह है कि AI को मैनेज करने, उसे सही निर्देश (Prompts) देने और उसकी खामियों को सुधारने के लिए लाखों नए पेशेवरों की तत्काल आवश्यकता पड़ रही है। आज प्रॉम्प्ट इंजीनियर्स, एआई एथिक्स ऑफिसर्स, मशीन लर्निंग एक्सपर्ट्स और डेटा एनालिस्ट्स की मांग आसमान छू रही है। अब सवाल यह नहीं है कि “क्या AI मेरी नौकरी खा जाएगा?” बल्कि आज के कॉर्पोरेट जगत का असली सवाल यह है कि “क्या मैं उस स्मार्ट इंसान से रिप्लेस हो जाऊंगा जिसे AI का बेहतरीन इस्तेमाल करना आता है?”

भारत के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक स्वर्णिम अवसर क्यों है?

पश्चिमी देशों और यूरोप की तुलना में भारत के पास एक बहुत बड़ा जनसांख्यिकीय लाभ (Demographic Dividend) है— हमारी विशाल युवा आबादी। भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल बड़े कॉरपोरेट्स या बेंगलुरु के एयर-कंडीशंड ऑफिस तक सीमित नहीं रह गया है। आज टियर-2 और टियर-3 शहरों के युवा स्टार्टअप्स के जरिए कृषि, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा में एआई का जमीनी स्तर पर उपयोग कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, एआई आधारित एग्री-टेक (Agri-tech) टूल्स आज भारतीय किसानों को मौसम के बदलाव, मिट्टी की गुणवत्ता और फसल की बीमारियों की सटीक जानकारी उनकी अपनी स्थानीय भाषा में दे रहे हैं। अगर भारत सरकार और हमारे शैक्षणिक संस्थान अपने पुराने पाठ्यक्रम को बदलकर उसमें एआई को स्कूल स्तर से ही अनिवार्य कर दें, तो भारत जल्द ही दुनिया का सबसे बड़ा ‘एआई वर्कफोर्स’ (AI Workforce) निर्यातक देश बन सकता है।

Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

Thakur Pawan Singh

Chief Editor, Taj News

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