By: Taj News National Desk | tajnews.in | 25 Feb 2026, 01:30 pm IST
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श्रीनगर/नई दिल्ली (Srinagar/New Delhi): केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की जुड़वां राजधानियों (श्रीनगर और जम्मू) के बीच सफर को आसान बनाने वाली बहुप्रतीक्षित ‘श्रीनगर-जम्मू वंदे भारत एक्सप्रेस’ (Srinagar-Jammu Vande Bharat Express) के शुभारंभ का इंतजार कर रहे यात्रियों को बड़ा झटका लगा है। भारतीय रेलवे बोर्ड ने 1 मार्च 2026 से शुरू होने वाली इस सेमी-हाई स्पीड ट्रेन की लॉन्चिंग पर फिलहाल रोक लगा दी है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, कुछ ‘अपरिहार्य कारणों’ (Unavoidable Circumstances) के चलते इस सेवा को अगली सूचना तक के लिए स्थगित किया गया है। इस अचानक लिए गए फैसले से उन हजारों दैनिक यात्रियों, कारोबारियों और पर्यटकों को भारी निराशा हुई है, जो इस ट्रेन के चलने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।
अचानक आया रेलवे बोर्ड का आदेश और टली लॉन्चिंग
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर रेलवे (Northern Railway) के अधिकारियों ने 28 फरवरी को एक आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी करते हुए इस बात की पुष्टि की थी कि 1 मार्च से श्रीनगर और जम्मू के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस का नियमित संचालन शुरू हो जाएगा। रेलवे प्रशासन की तरफ से स्टेशनों की सजावट, सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और टिकट बुकिंग के सॉफ्टवेयर अपडेट को लेकर सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई थीं। लेकिन मंगलवार देर रात, रेलवे बोर्ड (नई दिल्ली) की तरफ से एक आपातकालीन संदेश प्राप्त हुआ, जिसमें “अगले आदेश तक” सेवाओं को रोकने का स्पष्ट निर्देश दिया गया था।
उत्तर रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया, “सेवाओं की शुरुआत के लिए कार्यक्रम अधिसूचना जारी करने को फिलहाल निलंबित कर दिया गया है। जैसे ही उच्च स्तर से कोई नया निर्देश प्राप्त होगा, इसकी जानकारी आम जनता के साथ साझा की जाएगी।” हालांकि, रेलवे बोर्ड ने इन ‘अपरिहार्य कारणों’ का स्पष्ट रूप से कोई खुलासा नहीं किया है, लेकिन विभागीय सूत्रों का मानना है कि तकनीकी क्लीयरेंस, सुरक्षा ऑडिट के अंतिम चरण या फिर किसी बड़े वीआईपी मूवमेंट (VIP Movement) के शेड्यूलिंग को लेकर यह देरी हुई है।
20 आधुनिक कोचों से लैस है कश्मीर की नई वंदे भारत
श्रीनगर-जम्मू वंदे भारत एक्सप्रेस भारतीय रेलवे की इंजीनियरिंग और आधुनिक सोच का एक नायाब नमूना है। यह ट्रेन सीधे जम्मू तवी तक चलेगी, जिससे दोनों राजधानियों के बीच तेज और निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी। अब तक श्रीनगर से कटरा (Srinagar-Katra) रूट पर चलने वाली वंदे भारत में केवल 8 कोच होते थे, लेकिन यात्रियों की भारी भीड़, पर्यटन के दबाव और इस रूट की व्यापारिक अहमियत को देखते हुए श्रीनगर-जम्मू वंदे भारत को पूरे 20 आधुनिक और वातानुकूलित (AC) कोचों के साथ संचालित करने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया था।
इन 20 कोचों में ऑटोमैटिक स्लाइडिंग दरवाजे, जीपीएस (GPS) आधारित यात्री सूचना प्रणाली, हर कोने को कवर करने वाले सीसीटीवी कैमरे, गंध-मुक्त बायो-वैक्यूम शौचालय और आरामदायक रिक्लाइनिंग (मुड़ने वाली) सीटें जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं मौजूद हैं। कश्मीर घाटी की कड़ाके की ठंड और बर्फबारी को ध्यान में रखते हुए, इस ट्रेन के इंटीरियर में विशेष हीटिंग सिस्टम (Heating System) भी लगाया गया है ताकि शून्य से नीचे के तापमान (Sub-zero Temperature) में भी यात्री एक आरामदायक और सुरक्षित सफर का आनंद ले सकें।
खत्म होगा जम्मू-श्रीनगर हाईवे का थका देने वाला सफर
जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) पर सफर करना हमेशा से स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए एक चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है। सर्दियों के मौसम में भारी बर्फबारी, बारिश और पहाड़ों से होने वाले भूस्खलन (Landslides) के कारण यह राजमार्ग अक्सर कई-कई दिनों तक पूरी तरह बंद रहता है। इसके कारण कश्मीर घाटी का संपर्क देश के बाकी हिस्सों से कट जाता है, जिससे आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी बाधित होती है। सामान्य दिनों में भी सड़क मार्ग से जम्मू से श्रीनगर पहुंचने में 8 से 10 घंटे का लंबा समय लगता है। भारी ट्रैफिक जाम या खराब मौसम की स्थिति में यह सफर 12 से 14 घंटे तक भी खिंच जाता है।
वंदे भारत एक्सप्रेस के शुरू होने से यह थकाऊ और अनिश्चितता भरा सफर इतिहास बन जाएगा। यह सेमी-हाई स्पीड ट्रेन ऊंचे पहाड़ों, गहरी खाइयों और अंधेरी सुरंगों से सुरक्षित गुजरते हुए महज कुछ ही घंटों में यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचा देगी। यह केवल समय की बचत नहीं होगी, बल्कि हादसों से मुक्त, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल एक शानदार यात्रा का विकल्प भी साबित होगा।
USBRL प्रोजेक्ट: कश्मीर को शेष भारत से जोड़ने का महास्वप्न
श्रीनगर-जम्मू वंदे भारत का निर्बाध संचालन उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस मेगा रेल प्रोजेक्ट को भारतीय रेलवे के इतिहास का सबसे मुश्किल, खर्चीला और चुनौतीपूर्ण कार्य माना जाता है। हिमालय के सीने को चीरकर बनाए गए इसी रूट पर दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज ‘चिनाब ब्रिज’ (Chenab Bridge – एफिल टावर से भी ऊंचा) और भारत की सबसे लंबी रेलवे सुरंग ‘टी-49’ (T-49 Tunnel) स्थित है। इन दुर्गम रास्तों पर पटरियां बिछाने के लिए भारतीय इंजीनियरों ने कई सालों तक दिन-रात अपनी जान जोखिम में डालकर काम किया है। वंदे भारत का इस ट्रैक पर पूरी रफ्तार से दौड़ना न केवल कश्मीर के निवासियों के लिए, बल्कि पूरे भारतवर्ष के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवशाली क्षण होगा।
पर्यटन, व्यापार और अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान
भले ही अभी 1 मार्च की लॉन्चिंग टल गई हो, लेकिन भविष्य में जब भी यह ट्रेन पटरियों पर दौड़ेगी, यह जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था के लिए ‘गेम चेंजर’ (Game Changer) साबित होगी। कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा जाता है, लेकिन कनेक्टिविटी की कमी और लंबे सफर के कारण कई पर्यटक वहां जाने से कतराते थे। अब दिल्ली, पंजाब या देश के किसी भी हिस्से से आने वाले पर्यटक सीधे जम्मू पहुंचकर वहां से आरामदायक वंदे भारत पकड़कर सीधे कश्मीर घाटी का रुख कर सकेंगे।
इससे न सिर्फ पर्यटन उद्योग (होटल, हाउसबोट, टूर गाइड) को भारी बढ़ावा मिलेगा, बल्कि कश्मीर के मशहूर हैंडीक्राफ्ट्स (हस्तशिल्प), सेब के व्यापार और पश्मीना शॉल के कारोबारियों को भी अपना माल आसानी से देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे। फिलहाल, घाटी के लोगों को उस ‘भविष्य की तारीख’ (Future Date) का इंतजार है, जब रेलवे बोर्ड सारी तकनीकी बाधाओं को दूर करके इस शानदार ट्रेन को हरी झंडी दिखाएगा।
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