Political Desk, Taj News | Published by: ठाकुर पवन सिंह | Updated: Friday, 17 January 2026 11:40 PM IST
उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित मणिकर्णिका घाट को लेकर इन दिनों सियासी और प्रशासनिक हलकों में तीखी बहस छिड़ी हुई है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो के बाद विपक्ष ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार पर निशाना साधा, जबकि राज्य सरकार ने आरोपों को भ्रामक बताते हुए इसे एआई-जनरेटेड कंटेंट करार दिया। मामले ने तूल पकड़ा तो पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

मणिकर्णिका घाट का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
काशी, बनारस या वाराणसी — नाम चाहे जो हो, मणिकर्णिका घाट सनातन आस्था का केंद्र रहा है। मान्यता है कि यहां अंतिम संस्कार होने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। पौराणिक, धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से यह स्थल अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी घाट के नवीनीकरण की एक परियोजना की आधारशिला जुलाई 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी थी।
वायरल वीडियो से शुरू हुआ विवाद
10 जनवरी 2026 से सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में मणिकर्णिका घाट के निचले हिस्से में बनी एक मढ़ी को ड्रिल मशीन से तोड़े जाने का दृश्य दिखाया गया। इस मढ़ी में भित्तियों पर देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित थीं और ऊपरी हिस्से पर पंडा-पुरोहित कर्मकांड कराते थे। वीडियो सामने आते ही विपक्षी नेताओं ने दावा किया कि धार्मिक प्रतीकों और मूर्तियों को तोड़ा जा रहा है।
विपक्ष का आरोप और सियासी बयानबाज़ी
वायरल वीडियो को आधार बनाकर विपक्ष ने भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री पर हमला बोला। आरोप लगाया गया कि पौराणिक महत्व वाले स्थल पर आस्था से खिलवाड़ किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वीडियो को साझा करते हुए सरकार पर संवेदनहीनता के आरोप लगाए गए, जिससे मामला और भड़क गया।
अहिल्याबाई होल्कर से जुड़ा इतिहास
इतिहासकारों के अनुसार, मुगल शासक औरंगजेब द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर के विध्वंस के बाद इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने काशी में व्यापक पुनर्निर्माण कार्य कराए थे। मणिकर्णिका घाट का जीर्णोद्धार भी उसी कालखंड में हुआ था। इसी दौरान बनी मढ़ी के निचले हिस्से में अहिल्याबाई होल्कर सहित अन्य प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। निर्माण कार्य के दौरान इन्हीं प्रतिमाओं को हटाने के तरीके पर स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई।
प्रशासन का पक्ष: मूर्तियां सुरक्षित
वीडियो वायरल होने के बाद अहिल्याबाई परिवार से जुड़े ट्रस्ट के प्रतिनिधि वाराणसी पहुंचे। मंडल आयुक्त से मुलाकात के बाद प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सभी प्रतिमाएं सुरक्षित हैं और उन्हें विधिवत हटाकर पुनः स्थापित किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि नवीनीकरण कार्य नियमों के तहत हो रहा है।
सीएम योगी का जवाब
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रेस वार्ता कर विपक्ष पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण के समय भी इसी तरह भ्रामक दावे किए गए थे। इस बार मणिकर्णिका घाट मामले में एआई-जनरेटेड वीडियो और फोटो का सहारा लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है।
AI जनरेटेड कंटेंट का आरोप
सीएम योगी ने दावा किया कि वायरल वीडियो और तस्वीरों में तकनीकी छेड़छाड़ की गई है। उनका कहना है कि कुछ तत्व योजनाबद्ध तरीके से सनातन विरासत के विकास कार्यों को रोकना चाहते हैं। दाल मंडी सड़क चौड़ीकरण सहित अन्य परियोजनाओं को लेकर भी इसी तरह का विरोध किया जा रहा है।
पुलिस की कार्रवाई
मामले के तूल पकड़ने के बाद वाराणसी पुलिस हरकत में आई। निर्माण कंपनी की शिकायत पर 8 लोगों और एक सोशल मीडिया हैंडल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद स्पष्ट होगा कि वीडियो और फोटो किस हद तक भ्रामक या एआई-जनरेटेड हैं।
आगे क्या?
फिलहाल मणिकर्णिका घाट विवाद राजनीतिक बयानबाज़ी और कानूनी जांच के बीच फंसा है। प्रशासन का दावा है कि आस्था और परंपरा से कोई समझौता नहीं किया गया है, जबकि विपक्ष जांच की मांग पर अड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच और तकनीकी रिपोर्ट से तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।
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