झांसी डेस्क, Taj News | Published by: ठाकुर पवन सिंह | Updated: Sunday, 11 Jan 2026 12:30 PM IST
उत्तर प्रदेश के झांसी में खाकी को शर्मसार करने वाला एक पुराना मामला फिर से सुर्खियों में है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले एक छात्र को साजिश के तहत झूठे मुकदमे में फंसाने के आरोप में एक दारोगा और दो सिपाहियों समेत पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश पर हुई है, जिसमें पुलिस ने धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र समेत आईपीसी की 12 अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है।

90 हजार की रिश्वत और खुन्नस की कहानी
सदर बाजार के भट्टागांव निवासी पीड़ित वीर गौतम के अनुसार, 2020 में सदर बाजार थाने में तैनात दारोगा देवराज मौर्य ने उसकी मां से 90 हजार रुपये की रिश्वत ली थी। जब वीर गौतम ने इसकी शिकायत आला अफसरों से की, तो दारोगा ने उससे खुन्नस पाल ली और 16 जून 2020 को उसके खिलाफ पहली झूठी रिपोर्ट दर्ज कर दी। पुलिस की छानबीन में यह मामला पूरी तरह फर्जी पाया गया था।
तमंचा थमाकर खींची तस्वीर, आर्म्स एक्ट में फंसाया
बदले की आग में जल रहे दारोगा देवराज ने 7 सितंबर 2020 को सिपाही सत्येंद्र और विजय कुमार के साथ मिलकर वीर गौतम को दतिया से पकड़ लिया और गोदन थाने ले गए। आरोप है कि छात्र को दूसरे झूठे मुकदमे में फंसाने के लिए उसे जबरन तमंचा और कारतूस थमाकर उसकी तस्वीरें खींची गईं। इसके बाद सदर बाजार थाने में ही उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत फर्जी मुकदमा दर्ज कर दिया गया।
कोर्ट के आदेश के बाद अब दर्ज हुई रिपोर्ट
पीड़ित छात्र का आरोप है कि आंतरिक जांच में तीनों पुलिसकर्मी दोषी पाए गए थे, लेकिन उन पर सिर्फ एक साल के पे-ग्रेड में कटौती जैसी मामूली कार्रवाई की गई। वर्तमान में दारोगा देवराज ललितपुर में तैनात है, जबकि दोनों सिपाही झांसी में ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं। एसपी सिटी ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर अब आईपीसी की 12 धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर मामले की गंभीरता से छानबीन की जा रही है।
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