Tuesday, 09 December 2025, 2:23:03 PM. Agra, Uttar Pradesh
ताजनगरी आगरा में विकास कार्यों की आड़ में चल रहे भ्रष्टाचार पर महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाह ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। हेमा पेट्रोल पंप से पश्चिमपुरी चौराहे तक हुए बहुचर्चित सड़क निर्माण घोटाले में अधिकारियों द्वारा की जा रही लीपापोती को सोमवार को महापौर ने मौके पर पहुंचकर रंगे हाथों पकड़ लिया। पार्षदों की जांच कमेटी द्वारा अनियमितताओं की पुष्टि के बावजूद, ठेकेदार और विभागीय इंजीनियर रातों-रात कमियों को छिपाने के लिए पैचवर्क (पैबंद) लगा रहे थे। यह देख महापौर का पारा चढ़ गया। उन्होंने तत्काल प्रभाव से काम रुकवा दिया और स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि अब वह अधिकारियों की इस मनमानी और भ्रष्टाचार की फाइल लेकर सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास लखनऊ जाएंगी। महापौर के इस औचक निरीक्षण और सख्त तेवर से नगर निगम के भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों में हड़कंप मच गया है।

मौके पर रंगे हाथ पकड़ी ‘लीपापोती’, अधिकारियों की क्लास
आगरा के सिकंदरा-बोदला रोड स्थित हेमा पेट्रोल पंप से पश्चिमपुरी तक बनी सड़क पिछले कई महीनों से विवादों में है। स्थानीय निवासियों और पार्षदों की लगातार शिकायतों के बाद, सोमवार को महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाह बिना किसी पूर्व सूचना के निरीक्षण के लिए पहुंच गईं। वहां का नजारा देख वे सन्न रह गईं। जिस सड़क के निर्माण में गुणवत्ता की भारी कमी पाई गई थी और जिसकी जांच थर्ड पार्टी से कराने की सिफारिश की गई थी, वहां गुपचुप तरीके से मरम्मत का काम चल रहा था।
मौके पर मौजूद लेबर और सुपरवाइजर गड्ढों और उखड़ी हुई बजरी पर डामर का लेप लगाकर उसे छिपाने की कोशिश कर रहे थे। महापौर ने तुरंत काम रुकवाया और मौके पर मौजूद अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने सवाल किया कि जब जांच प्रक्रियाधीन है और थर्ड पार्टी ऑडिट होना बाकी है, तो सबूतों को मिटाने की यह कोशिश किसके इशारे पर हो रही है? महापौर ने कहा कि यह मरम्मत नहीं, बल्कि “भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की साजिश” है, जिसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा।
पार्षदों की जांच कमेटी ने खोली थी पोल
इस सड़क निर्माण में हुए खेल का पर्दाफाश नगर निगम के पार्षदों की एक विशेष जांच कमेटी ने किया था। शिकायतों के बाद गठित इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि सड़क निर्माण में मानकों की धज्जियां उड़ाई गई हैं।
जांच रिपोर्ट के अनुसार:
- सामग्री की गुणवत्ता: सड़क निर्माण में तय मानकों से बेहद कम बिटुमिन (डामर) का इस्तेमाल किया गया।
- बेस की कमजोरी: सड़क का बेस तैयार किए बिना ही ऊपर से लेयर बिछा दी गई, जिससे सड़क बनते ही धंसने लगी।
- अनियमितताएं: नाली निर्माण और इंटरलॉकिंग टाइल्स के काम में भी भारी वित्तीय अनियमितताएं पाई गईं।
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में इस सड़क की गुणवत्ता जांच किसी स्वतंत्र ‘थर्ड पार्टी’ एजेंसी (जैसे आईआईटी या पीडब्ल्यूडी) से कराने की संस्तुति की थी। लेकिन विभागीय अधिकारी इस जांच से पहले ही सड़क को ‘चकाचक’ दिखाकर अपनी खाल बचाने की फिराक में थे, जिसे महापौर की सतर्कता ने विफल कर दिया।
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस: अब लखनऊ तक गूंजेगा मामला
महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाह ने मौके पर ही स्पष्ट कर दिया कि आगरा नगर निगम में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत विकास कार्यों में पाई जाने वाली किसी भी कमी को बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मैंने खुद अपनी आंखों से देखा है कि कैसे जनता के पैसे की बर्बादी की जा रही है। जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद भी अधिकारियों का यह रवैया उनकी मिलीभगत को दर्शाता है। अब मैं इस मामले में स्थानीय स्तर पर कोई स्पष्टीकरण नहीं सुनूंगी। मैं सारे सबूतों और जांच रिपोर्ट के साथ सीधे मुख्यमंत्री जी से मिलूंगी और दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग करूंगी।”
महापौर के इस बयान के बाद नगर निगम के गलियारों में खलबली मची हुई है। माना जा रहा है कि सीएम योगी के पास शिकायत पहुंचने के बाद निर्माण विभाग के कई बड़े इंजीनियरों और ठेकेदार पर गाज गिरनी तय है।
जनता के पैसे की बर्बादी और शहर का विकास
आगरा में स्मार्ट सिटी और अन्य निधियों से करोड़ों रुपये की सड़कें बनाई जा रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अक्सर दावों से उलट होती है। हेमा पेट्रोल पंप से पश्चिमपुरी तक की यह सड़क लाखों लोगों के लिए लाइफलाइन है, लेकिन भ्रष्टाचार के चलते यह बनने के कुछ ही दिनों बाद जर्जर हो गई। स्थानीय लोगों ने महापौर के इस कदम की सराहना की है।
क्षेत्रीय नागरिक रमेश चंद्र ने कहा, “हम कई महीनों से धूल और गड्ढों से परेशान थे। जब सड़क बनी तो वह दो दिन भी नहीं टिक पाई। अधिकारियों की मिलीभगत से ठेकेदार मनमानी कर रहे थे। महापौर जी का यह एक्शन हमारे लिए उम्मीद की किरण है।”
महापौर ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जब तक थर्ड पार्टी जांच पूरी नहीं हो जाती और रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक किसी भी तरह का भुगतान ठेकेदार को नहीं किया जाएगा। इस प्रकरण ने यह साबित कर दिया है कि यदि जनप्रतिनिधि सजग हों, तो अफसरशाही की मनमानी पर लगाम लगाई जा सकती है। अब सबकी निगाहें लखनऊ पर टिकी हैं कि सीएम योगी इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं।
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