आगरा के बिचपुरी में बलवंत एजुकेशनल सोसाइटी के बाहर 8वें दिन भी धरने पर बैठे प्रदर्शनकारी, ठंड में अलाव जलाकर विरोध जताते हुए।

Friday, 05 December 2025, 11:38:00 PM. Agra, Uttar Pradesh

आगरा। ऐतिहासिक नगरी आगरा के बिचपुरी ब्लॉक में स्थित प्रतिष्ठित बलवंत एजुकेशनल सोसाइटी के परिसर के बाहर चल रहा अनिश्चितकालीन धरना अब एक व्यापक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। सोसाइटी में कथित अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और तानाशाही रवैये के विरोध में शुरू हुआ यह संघर्ष शुक्रवार को अपने आठवें दिन में प्रवेश कर गया। कड़ाके की सर्दी और प्रशासन द्वारा सिर छिपाने के लिए टेंट तक लगाने की अनुमति न दिए जाने के बावजूद, आंदोलनकारियों के हौसले पस्त होने के बजाय और अधिक बुलंद हो गए हैं। खुले आसमान के नीचे रातें गुजार रहे प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि चाहे मौसम कितना भी प्रतिकूल हो या प्रशासन कितना भी सख्त रवैया अपनाए, जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे। प्रशासन के रवैये को लेकर आंदोलनकारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है, और अब यह लड़ाई केवल एक संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई बन गई है।

आगरा के बिचपुरी में बलवंत एजुकेशनल सोसाइटी के बाहर 8वें दिन भी धरने पर बैठे प्रदर्शनकारी, ठंड में अलाव जलाकर विरोध जताते हुए।
सर्द रातों में सुलगती विरोध की आग

दिसंबर की शुरुआत के साथ ही आगरा में सर्दी का सितम बढ़ना शुरू हो गया है। रात के समय तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। लेकिन, बिचपुरी स्थित धरना स्थल पर नजारा कुछ और ही बयां कर रहा है। यहाँ सर्द हवाओं के थपेड़े आंदोलनकारियों के इरादों को डिगाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। शुक्रवार को आठवें दिन भी धरना स्थल पर भारी भीड़ उमड़ी, जिसमें बुजुर्ग, युवा और स्थानीय किसान शामिल थे।

सबसे चौंकाने वाली और आक्रोशित करने वाली बात यह रही कि स्थानीय प्रशासन ने आंदोलनकारियों को धरना स्थल पर टेंट लगाने की अनुमति नहीं दी है। इसके चलते, प्रदर्शनकारी पिछले आठ दिनों से खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर हैं। ओस से भीगी दरियों और अलाव के सहारे रात गुजार रहे इन लोगों का कहना है कि प्रशासन उन्हें सर्दी के जरिए तोड़ने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वे इसे अपनी तपस्या मानकर डटे हुए हैं। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन का यह रवैया अमानवीय है और उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन है।

चौधरी दिलीप सिंह का प्रशासन पर तीखा हमला

शुक्रवार को धरना स्थल पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए वरिष्ठ किसान-मजदूर नेता चौधरी दिलीप सिंह ने कॉलेज प्रशासन और प्राचार्यों की कार्यशैली पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि एक शैक्षणिक संस्थान, जिसे समाज को दिशा देनी चाहिए, आज भ्रष्टाचार और तानाशाही का केंद्र बन गया है।

चौधरी दिलीप सिंह ने कड़े शब्दों में कहा, “कॉलेजों के प्राचार्यों और डायरेक्टरों द्वारा इस शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक धरने को ‘अवैध’ करार देना और हमारी जायज मांगों को ‘नाजायज’ बताना निंदनीय है। यह उनकी बौखलाहट को दर्शाता है। वे धरना देने वाले सम्मानित नागरिकों को ‘असामाजिक तत्व’ बताकर अपनी कमियों और काले कारनामों को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। अपनी आवाज उठाना और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हमारा संवैधानिक अधिकार है। इसे अवैध बताना सीधे तौर पर लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। हम समाज के जिम्मेदार नागरिक हैं जो केवल संस्था में चल रहे भ्रष्टाचार और तानाशाही का विरोध कर रहे हैं।”

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कॉलेज प्रशासन ने अपना तानाशाही रवैया नहीं छोड़ा और आंदोलनकारियों को बदनाम करना बंद नहीं किया, तो यह आंदोलन और उग्र रूप ले लेगा, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह से प्रशासन की होगी।

पंचायत चुनाव के षड्यंत्र का खंडन

आंदोलन के जोर पकड़ते ही कुछ हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई थी कि यह धरना आगामी पंचायत चुनावों से प्रेरित है और इसे राजनीतिक लाभ के लिए आयोजित किया जा रहा है। शुक्रवार को प्रधान संगठन ब्लॉक बिचपुरी के अध्यक्ष हाकिम सिंह सोलंकी ने इन अटकलों पर पूर्ण विराम लगा दिया। उन्होंने मंच से स्पष्ट किया कि इस आंदोलन का किसी भी तरह की राजनीति या आगामी चुनावों से कोई लेना-देना नहीं है।

हाकिम सिंह सोलंकी ने कहा, “कुछ लोग इसे राजनीतिक रंग देने की कुत्सित कोशिश कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि यह आगामी पंचायत चुनाव से प्रेरित एक राजनीतिक षड्यंत्र है। यह सरासर गलत और निराधार है। हमारा विरोध केवल और केवल बलवंत सिंह एजुकेशनल सोसाइटी में चल रही वित्तीय अनियमितताओं, नियुक्तियों में धांधली और तानाशाही के खिलाफ है। हम शिक्षा के मंदिर में शुचिता और पारदर्शिता चाहते हैं, न कि कोई राजनीतिक लाभ। जो लोग इसे राजनीति से जोड़ रहे हैं, वे असल मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहते हैं।”

भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की लंबी फेहरिस्त

आंदोलनकारियों का आरोप है कि बलवंत एजुकेशनल सोसाइटी, जो क्षेत्र की एक प्रतिष्ठित संस्था मानी जाती थी, अब भ्रष्टाचार का अड्डा बन गई है। प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए मुख्य आरोपों में शामिल हैं:

  1. वित्तीय अनियमितताएं: संस्था के फंड का दुरुपयोग और बिना किसी पारदर्शिता के खर्च किया जाना।
  2. नियुक्तियों में धांधली: योग्य उम्मीदवारों की अनदेखी कर अपनों को रेवड़ियों की तरह पद बांटना।
  3. तानाशाही रवैया: कर्मचारियों और छात्रों की जायज मांगों को दबाना और विरोध करने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का डर दिखाना।
  4. बुनियादी सुविधाओं का अभाव: भारी फीस वसूलने के बावजूद छात्रों को मूलभूत सुविधाएं प्रदान न करना।

आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक इन सभी मामलों की उच्चस्तरीय जांच नहीं होती और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक धरना समाप्त नहीं होगा।

जनसमर्थन का सैलाब: एकजुट हुआ पूरा क्षेत्र

शुक्रवार को आठवें दिन धरने को क्षेत्र के विभिन्न वर्गों का अभूतपूर्व समर्थन मिला। आसपास के दर्जनों गांवों से लोग ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और पैदल मार्च करते हुए धरना स्थल पर पहुंचे। स्थानीय खाप पंचायतों और सामाजिक संगठनों ने भी इस आंदोलन को अपना समर्थन देने की घोषणा कर दी है।

धरना स्थल पर प्रमुख रूप से पूर्व प्रधान कृष्णवीर सिंह अंगूठी, भरत सिंह सोलंकी, मुनेन्द्र परमार, पूर्व प्रधान कृपाल सिंह लड़ामदा, प्रदीप राना, वेद प्रकाश सोलंकी, उम्मेद सिंह, सत्यपाल सोलंकी, शिशुपाल सोलंकी, करणवीर सिंह, बाबूलाल बाल्मीकि, बनय सिंह छौँकर, दलवीर सिंह और बॉबी गोला सहित सैकड़ों गणमान्य लोग मौजूद रहे। इन नेताओं ने एक स्वर में कहा कि यह लड़ाई अब स्वाभिमान की लड़ाई बन चुकी है।

प्रशासन की चुप्पी और बढ़ता आक्रोश

आठ दिन बीत जाने के बावजूद जिला प्रशासन या शिक्षा विभाग के किसी भी वरिष्ठ अधिकारी ने आंदोलनकारियों से वार्ता करने की पहल नहीं की है। प्रशासन की यह चुप्पी लोगों के गुस्से को और भड़का रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन बलवंत एजुकेशनल सोसाइटी के रसूखदार लोगों के दबाव में काम कर रहा है, इसलिए वह न तो टेंट लगाने दे रहा है और न ही उनकी मांगों पर ध्यान दे रहा है।

आंदोलनकारियों ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि अगले 24 घंटों में प्रशासन ने उनकी सुध नहीं ली और टेंट लगाने की अनुमति नहीं दी, तो वे चक्का जाम करने और भूख हड़ताल पर बैठने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि वे गांधीवादी तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं, लेकिन प्रशासन उन्हें उग्र होने पर मजबूर कर रहा है।

फिलहाल, बिचपुरी का यह धरना पूरे आगरा मंडल में चर्चा का विषय बना हुआ है। हर गुजरते दिन के साथ आंदोलनकारियों की संख्या और उनका संकल्प मजबूत होता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब अपनी कुंभकर्णी नींद से जागता है और कब इस प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार की जांच शुरू होती है। तब तक, खुले आसमान के नीचे सर्द रातों में जलती अलाव की लपटें इस संघर्ष की गवाह बनती रहेंगी।

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✍️ संपादन: ठाकुर पवन सिंह
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By Thakur Pawan Singh

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