Mon, 01 Dec 2025 10:34 AM IST, New Delhi.
संसद का शीतकालीन सत्र एक दिसंबर से आधिकारिक रूप से शुरू हो गया है और इसी से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन के बाहर मीडिया से बातचीत में विपक्ष को दृढ़ संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संसद देश की नीतियों और प्रगति को गति देने का स्थान है और यहां “ड्रामा नहीं, डिलीवरी होनी चाहिए।” प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सदन में नारेबाज़ी और प्रदर्शन के लिए जगह नहीं है, क्योंकि जनता ने अपने प्रतिनिधियों को यहां काम करने और परिणाम देने के लिए भेजा है।
पीएम मोदी ने कहा कि शीतकालीन सत्र कोई औपचारिकता नहीं है। यह वह समय है जब देश अगले चरण की प्रगति के लिए तैयारी करता है। उन्होंने कहा कि भारत ने दशकों तक लोकतंत्र की परंपरा को जिया है और इस सत्र में भी उसी भाव को आगे ले जाने की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री ने पहली बार चुने गए सांसदों और युवा प्रतिनिधियों की मुश्किलों का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि कई युवा सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र की समस्याएँ सदन के सामने रखना चाहते हैं, लेकिन उन्हें अवसर नहीं मिल पाता क्योंकि सदन का समय नारेबाज़ी और व्यवधानों में नष्ट हो जाता है। प्रधानमंत्री ने सभी दलों से आग्रह किया कि वे नई पीढ़ी के सांसदों को अभिव्यक्ति का अवसर दें।
उन्होंने यह भी कहा कि देश की विकास यात्रा में हर दल की भूमिका महत्वपूर्ण है। लेकिन यह तभी संभव है जब सदन में चर्चा नीतियों पर केंद्रित हो, न कि राजनीतिक नारों पर। उन्होंने याद दिलाया कि जो राजनीतिक दल वर्षों से सत्ता-विरोधी लहर झेल रहे हैं, वे सदन का इस्तेमाल अपनी निराशा प्रकट करने के मंच के रूप में न करें।
पीएम मोदी ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि नारे लगाने के लिए पूरा देश पड़ा है। जहां वे चुनाव हारकर आए हैं या जहां आगे चुनाव का दबाव है, वहां जाकर जितने नारे बुलवाने हों बुलवा लें, लेकिन संसद जैसे संवैधानिक मंच को नीतिगत बहसों का स्थान ही रहना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि नकारात्मक राजनीति देश निर्माण में मदद नहीं करती। किसी भी लोकतंत्र की मजबूती के लिए सकारात्मक तथा रचनात्मक सोच जरूरी है। उन्होंने कहा कि वह विपक्ष को बेहतर प्रदर्शन के सुझाव देने के लिए भी तैयार हैं, लेकिन सांसदों की आवाज़ को दबाने का कोई औचित्य नहीं है।
जीएसटी से जुड़े सुधारों पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नेक्स्ट-जेनरेशन जीएसटी रिफॉर्म्स ने देशवासियों के बीच विश्वास पैदा किया है और आगे भी कई महत्वपूर्ण काम होने हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ विपक्षी दल सदन को अपने राज्यों की राजनीतिक रणनीतियों के लिए इस्तेमाल करते रहे हैं, लेकिन पिछले दस वर्षों में जनता ने इस प्रवृत्ति को स्वीकार नहीं किया है।
प्रधानमंत्री का यह वक्तव्य आगामी शीतकालीन सत्र की टोन तय करता है, जिसमें सरकार 13 से अधिक महत्वपूर्ण विधेयक लाने जा रही है। विपक्ष भी एसआईआर, प्रदूषण, दिल्ली धमाके और आर्थिक मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। सत्र के पहले ही दिन प्रधानमंत्री द्वारा दिया गया यह संदेश संकेत देता है कि आने वाले हफ्तों में सदन में तीखी बहस और गंभीर विमर्श देखने को मिल सकता है।
संपादन: ठाकुर पवन सिंह | ताज न्यूज़ – आईना सच का | www.tajnews.in | pawansingh@tajnews.in
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