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ईरान में स्कूल पर अमेरिकी हमला: पेंटागन की जांच में बड़ा खुलासा, ट्रंप की बढ़ी टेंशन

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Edited by: Pawan Singh | tajnews.in | 12 March 2026, 02:45 AM IST

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वाशिंगटन/तेहरान (Washington/Tehran): ईरान में स्कूल पर अमेरिकी हमला आधुनिक सैन्य इतिहास की सबसे भयानक भूल बन गया है। ईरान के मिनाब शहर में 28 फरवरी को एक बड़ा मिसाइल हमला हुआ था। इस हमले में शजराह तैय्यबेह स्कूल पूरी तरह से मलबे में तब्दील हो गया। अब अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन की एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। शुरुआती सैन्य जांच में इस बात के पुख्ता संकेत मिले हैं। यह विनाशकारी हमला अमेरिकी सेना की एक बड़ी और गंभीर गलती का नतीजा था। इस दर्दनाक घटना ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की भारी आलोचना हो रही है।

HIGHLIGHTS
  • बड़ी सैन्य चूक: ईरान में स्कूल पर अमेरिकी हमला पुराने और गलत टारगेटिंग डेटा के इस्तेमाल के कारण हुआ।
  • 175 मासूमों की मौत: इस दर्दनाक टॉमहॉक मिसाइल हमले में कम से कम 175 लोगों की जान गई है।
  • पेंटागन का खुलासा: हमले का शिकार बनी यह इमारत पहले एक ईरानी नौसैनिक परिसर का हिस्सा थी।
  • ट्रंप का यू-टर्न: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुरुआत में इस भीषण हमले का पूरा दोष ईरान पर ही मढ़ दिया था।

पेंटागन की जांच में हुआ अमेरिकी खुफिया तंत्र की बड़ी नाकामी का सनसनीखेज खुलासा

अमेरिकी सेना की शुरुआती जांच रिपोर्ट ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच के मुताबिक अमेरिकी सेना एक ईरानी नौसैनिक ठिकाने को निशाना बनाना चाहती थी। लेकिन उन्होंने इस हमले के लिए बेहद पुराने और गलत टारगेटिंग डेटा का इस्तेमाल किया। इसी तकनीकी और खुफिया नाकामी के कारण एक विनाशकारी घटना घटी। अमेरिकी टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइल अपने लक्ष्य से भटक गई। वह मिसाइल सीधे शजराह तैय्यबेह स्कूल की इमारत पर जा गिरी। यह हाल के दशकों की सबसे भयानक सैन्य गलतियों में से एक मानी जा रही है। इस बड़ी चूक ने अमेरिकी खुफिया तंत्र की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञ इस घटना को लेकर काफी हैरान हैं।

इमारत का पुराना इतिहास बना मौत का कारण, स्कूल को समझ लिया सैन्य अड्डा

पेंटागन की रिपोर्ट के अनुसार यह स्कूल वाली इमारत हमेशा से स्कूल नहीं थी। यह इमारत पहले एक बड़े ईरानी सैन्य परिसर का ही एक अहम हिस्सा हुआ करती थी। साल 2013 से 2016 के बीच इस इमारत को सैन्य अड्डे से अलग किया गया था। बाद में इसे एक नागरिक स्कूल में पूरी तरह बदल दिया गया था। लेकिन अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) के पास यह नया अपडेट नहीं पहुंचा। उन्होंने अपने पुराने नक्शे और डेटा के आधार पर ही हमले की योजना बना ली। इसी भयंकर भ्रम के कारण एक स्कूल को सैन्य अड्डा समझकर मिसाइल दाग दी गई। यह खुफिया जानकारी जुटाने और उसे अपडेट करने की बहुत बड़ी विफलता है।

हमले में 175 लोगों ने गंवाई जान, मरने वालों में मासूम स्कूली बच्चों की संख्या सबसे अधिक

मिनाब शहर के इस स्कूल पर हुए हमले के परिणाम बेहद भयानक और हृदयविदारक रहे हैं। इस भीषण हमले में कम से कम 175 लोगों की बेहद दर्दनाक मौत हुई है। मारे गए लोगों में सबसे बड़ी संख्या मासूम स्कूली बच्चों और उनके शिक्षकों की बताई जा रही है। मिसाइल गिरने के वक्त स्कूल में बच्चे अपनी पढ़ाई कर रहे थे। पलक झपकते ही पूरा स्कूल एक बड़े मलबे के ढेर में तब्दील हो गया। बचाव कर्मियों को मलबे से शव निकालने में कई दिनों का लंबा समय लगा। पूरे मिनाब शहर में इस घटना के बाद से मातम का माहौल छाया हुआ है। ईरान के अस्पतालों में अभी भी कई दर्जन घायल बच्चे अपनी जिंदगी से जूझ रहे हैं। यह एक ऐसा घाव है जिसे भरने में कई पीढ़ियां लग जाएंगी।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिया था बेतुका बयान, शुरुआत में ईरान पर ही मढ़ा था पूरा दोष

इस घटना के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रवैया काफी आक्रामक और हैरान करने वाला था। ट्रंप ने शुरुआत में इस पूरी घटना का दोष सीधे तौर पर ईरान पर ही मढ़ दिया था। उन्होंने दावा किया था कि ईरान ने खुद मिनाब शहर के अपने ही स्कूल पर हमला किया है। ट्रंप ने यहां तक कहा था कि ईरान को कहीं से अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल मिल गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान ने अमेरिका को बदनाम करने के लिए यह झूठा हमला करवाया है। लेकिन जल्द ही उनके इन दावों की पूरी तरह से हवा निकल गई। स्वतंत्र जांच एजेंसियों और पत्रकारों ने हमले के कई असली वीडियो दुनिया के सामने रख दिए। इन वीडियो में साफ दिख रहा था कि मिसाइल आसमान से स्कूल पर आकर गिरी है।

वीडियो सामने आने के बाद ट्रंप को आना पड़ा बैकफुट पर, देनी पड़ी मामले पर सफाई

जब टॉमहॉक मिसाइल के हमले का असली और पुख्ता वीडियो दुनिया के सामने आया, तो हड़कंप मच गया। इस अकाट्य सबूत के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को तुरंत बैकफुट पर आना पड़ा। उन्होंने अपने पहले के दावों से पलटते हुए मामले पर नई सफाई पेश की। ट्रंप ने मीडिया से कहा कि उन्हें बताया गया है कि मामले की अभी गहन जांच चल रही है। उन्होंने बचाव की मुद्रा में आते हुए कहा कि इसमें सिर्फ अमेरिका को ही दोष नहीं देना चाहिए। ट्रंप का यह बदला हुआ रुख अमेरिकी राजनीति में भी चर्चा का एक बड़ा विषय बन गया है। विपक्षी पार्टियां ट्रंप प्रशासन पर लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये का कड़ा आरोप लगा रही हैं। व्हाइट हाउस के अधिकारियों को भी प्रेस के सवालों का जवाब देने में काफी पसीना छूट रहा है।

तकनीकी खुफिया जानकारी और एआई (AI) मॉडल की भूमिका की हो रही है गहन जांच

अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक मानवीय भूल नहीं हो सकती। इसमें बहुत बड़ी तकनीकी विफलता भी शामिल है। रक्षा खुफिया एजेंसी का डेटा जब पुराना हो जाता है तो उसे दोबारा जाँचना अनिवार्य होता है। खुफिया अधिकारियों को किसी भी टारगेट को हिट करने से पहले उसे फिर से वेरीफाई करना होता है। अमेरिकी अधिकारी अब इस बात की कड़ाई से पड़ताल कर रहे हैं कि यह चूक आखिर कहाँ हुई। पेंटागन की इस उच्च स्तरीय जांच में एआई (AI) मॉडल की भूमिका भी परखी जा रही है। क्या डेटा विश्लेषण कार्यक्रम ने स्कूल को सैन्य अड्डा बताने की गलत जानकारी दी थी? क्या अन्य तकनीकी खुफिया जानकारी जुटाने वाले साधनों ने भी गलत इनपुट दिए थे? इन सभी अहम सवालों के जवाब अब सैन्य अदालत खोज रही है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की भारी फजीहत, मानवाधिकार संगठनों ने उठाया कड़ा कदम

इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका को भारी और तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भी इस हमले पर अपनी गहरी चिंता और दुख व्यक्त किया है। दुनिया भर के कई मानवाधिकार संगठनों ने इस घटना की एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि युद्ध के नियमों का सरेआम उल्लंघन किया गया है। नागरिकों और विशेष रूप से स्कूली बच्चों पर हमला किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। कई यूरोपीय देशों ने भी अमेरिका से इस घटना पर स्पष्टीकरण मांगा है। मध्य पूर्व के देशों में अमेरिका के खिलाफ भारी रोष और गुस्सा देखने को मिल रहा है। इस एक गलती ने अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय छवि को बहुत बड़ा और गहरा नुकसान पहुंचाया है।

ईरान में भारी उबाल, अमेरिकी सेना के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की हो रही है जोरदार मांग

इस हमले के बाद पूरे ईरान में भारी उबाल और गुस्सा देखा जा रहा है। तेहरान सहित कई प्रमुख शहरों में लोग सड़कों पर उतरकर भारी प्रदर्शन कर रहे हैं। वे अमेरिका के खिलाफ जोरदार नारेबाजी कर रहे हैं और न्याय की गुहार लगा रहे हैं। ईरानी सरकार ने भी इस घटना को एक बड़ा युद्ध अपराध करार दिया है। ईरान ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में अमेरिका के खिलाफ कड़ा मुकदमा दर्ज करने की धमकी दी है। दोनों देशों के बीच पहले से ही चल रहा तनाव अब अपने चरम बिंदु पर पहुंच गया है। कूटनीतिक हलकों में इस बात की भारी चर्चा है कि इसका बदला ईरान कैसे लेगा। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि वे जांच के अंतिम निष्कर्षों को पूरी तरह स्वीकार करेंगे। लेकिन क्या जांच की रिपोर्ट उन मासूम बच्चों की जान वापस ला पाएगी? यह एक ऐसा सवाल है जो आज पूरी मानवता से पूछा जा रहा है।

Pawan Singh Editor in Chief Taj News

Pawan Singh

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