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Opinion: 12 की उम्र और पहला नशा; क्या हम अपनी पीढ़ी को ड्रग्स के हवाले कर चुके हैं? बृज खंडेलवाल का बेबाक आलेख

Opinion Desk, Taj News आलेख: बृज खंडेलवाल | Reported by: Thakur Pawan Singh | Updated: Sun, 15 Feb 2026 09:30 AM IST “आगरा कैंट स्टेशन हो या यमुना किनारा, छोटे बच्चों का केमिकल सूंघना अब आम हो गया है। नामी स्कूलों के बाहर ‘पुड़िया गैंग’ की फुसफुसाहट है। क्या 12 साल की उम्र क्रिकेट और […]

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Opinion: वर्दी का डर या भरोसे का हाथ? लोकतंत्र में पुलिस की नई परिभाषा की तलाश; बृज खंडेलवाल का विशेष आलेख

Opinion Desk, Taj News आलेख: बृज खंडेलवाल | Reported by: Thakur Pawan Singh | Updated: Sun, 15 Feb 2026 08:15 AM IST “क्या हमारे थाने इंसाफ़ के दरवाज़े हैं, या डर की दहलीज़? जब एक आम आदमी किसी मुसीबत में थाने की ओर बढ़ता है, तो क्या उसके कदमों में भरोसा होता है या दिल […]

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विशेष आलेख: लुप्त हुए ब्रज के वन; बांसुरी की तान से कंक्रीट के शोर तक सिसकती श्री कृष्ण की लीला भूमि

Opinion Desk, Taj News आलेख: बृज खंडेलवाल | Published: Friday, 13 Feb 2026 “राधा-कृष्ण की लीलाएं प्रकृति से अलग नहीं थीं। ब्रज को बचाना केवल पर्यावरण की हिफ़ाज़त नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की रक्षा भी है। पढ़िए वरिष्ठ पत्रकार और पर्यावरण प्रेमी बृज खंडेलवाल का यह विशेष आलेख…” बृज खंडेलवाल (Brij Khandelwal) […]

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Opinion: ‘ताली दो हाथों से बजती है’… संसद के शोर में क्यों दम तोड़ रहा लोकतंत्र? वरिष्ठ पत्रकार बृज खंडेलवाल का विश्लेषण

Opinion Desk, Taj News Written by: Brij Khandelwal | Published: Wed, 11 Feb 2026 आगरा/नई दिल्ली: “लोकतांत्रिक व्यवस्था सत्ता और विपक्ष, दोनों की समझ, संयम और संवाद से ही चलती है।” यह कहना है देश के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार और चिंतक बृज खंडेलवाल (Brij Khandelwal) का। अपने इस विशेष लेख में उन्होंने संसद के शोर […]

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विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025: क्या फाइलों के बोझ से मुक्त होगी भारतीय शिक्षा? बृज खंडेलवाल का विश्लेषण

Published: Friday, 02 January 2026, 08:30 AM IST | New Delhi विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025 (Viksit Bharat Shiksha Adhishthan Bill 2025) क्या सच में भारतीय उच्च शिक्षा की जमी हुई बर्फ को तोड़ पाएगा? यह सवाल वरिष्ठ पत्रकार बृज खंडेलवाल ने अपने ताजा विश्लेषण में उठाया है। उन्होंने लिखा है कि देश के […]

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‘विकास-प्रदत्त ऑक्सीजन’ या मौत का सामान? बृज खंडेलवाल का तंज- जब हंसना भी हो जाए जानलेवा; पढ़िए ‘जहरीली तरक्की’ का कड़वा सच

Friday, 19 December 2025, 07:45:00 PM. Agra, Uttar Pradesh आगरा। उत्तर भारत इन दिनों घनी धुंध और जहरीली हवा की चादर में लिपटा हुआ है। सुबह की शुरुआत ताजी हवा से नहीं, बल्कि आंखों की जलन और गले की खराश से हो रही है। इस गंभीर और जानलेवा स्थिति पर वरिष्ठ पत्रकार और प्रख्यात पर्यावरणविद […]

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‘ज़हरीली सांसों का समाजवाद’: अमीर-गरीब में फर्क कर रही हवा; 85% शहर प्रदूषण घटाने में फेल, अब सांस लेना ‘मौलिक अधिकार’ नहीं, जोखिम बन गया

Wednesday, 17 December 2025, 11:45:00 PM. Agra/New Delhi आगरा/नई दिल्ली। उत्तर भारत में सर्दियां अब गुलाबी नहीं, बल्कि ‘काली’ और ‘दमघोंटू’ हो चुकी हैं। सुबह की धुंध कोहरा नहीं, बल्कि वो ज़हर है जो आपके फेफड़ों को छलनी कर रहा है। वरिष्ठ पत्रकार और पर्यावरणविद बृज खंडेलवाल ने अपने आलेख “ज़हरीली सांसों का समाजवाद” में […]

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आस्था का फ़कीर, मुनाफ़े का सौदागर: भारत में ‘नकली बाबा’ कैसे आस्था को बना रहे कैश मशीन? वरिष्ठ पत्रकार बृज खंडेलवाल का विश्लेषण

Tuesday, 16 December 2025, 1:30:00 PM. Agra, Uttar Pradesh आगरा। शाम ढलते ही भव्य टेंट रोशनी से नहा उठता है। अगरबत्तियों का धुआं और ढोल-नगाड़ों की थाप एक सम्मोहक माहौल बनाती है। बीचोंबीच ऊंचे सिंहासन पर बैठा शख्स—आधा संत, आधा सेल्समैन—उम्मीदें बेच रहा है। यह दृश्य भारत के किसी एक शहर का नहीं, बल्कि पूरे […]

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मानव अधिकार दिवस विशेष: अगर प्रकृति मरी, तो इंसान के अधिकार भी हो जाएंगे दफन; वक्त है जागने का

Wednesday, 10 December 2025, 02:15:00 PM. Agra, Uttar Pradesh धरती सांस ले रही है, मगर हाँफते हुए। आसमान पीला हो चुका है, नदियाँ रो रही हैं और जंगलों की चीख अब शहरों की गलियों में गूंजने लगी है। लेकिन अफ़सोस, इंसान अब भी खुद को उस प्रकृति का ‘मालिक’ समझे बैठा है जिसके बिना उसका […]

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