'ऑस्ट्रेलिया का हीरो' अहमद; आतंकी से निहत्थे भिड़े, राइफल छीनी

Monday, 15 December 2025, 6:10:00 PM. Sydney/New Delhi

सिडनी। इंसानियत का कोई धर्म नहीं होता, और बहादुरी किसी हथियार की मोहताज नहीं होती। यह साबित कर दिखाया है ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में रहने वाले 44 वर्षीय अहमद अल-अहमद ने। रविवार को बॉन्डी बीच (Bondi Beach) पर जब आतंकी मौत बनकर बरस रहे थे, तब सीरियाई मूल के अहमद अपनी जान की परवाह किए बिना ‘मसीहा’ बनकर सामने आए। उन्होंने निहत्थे ही एक आतंकी को दबोच लिया और उसकी राइफल छीनकर सैकड़ों लोगों की जान बचाई।

इस साहसिक कारनामे के दौरान उन्हें कई गोलियां लगीं, लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा। आज पूरा ऑस्ट्रेलिया उन्हें अपना ‘नया हीरो’ मान रहा है और उनके इलाज के लिए करोड़ों रुपये जुटाए गए हैं।

‘अगर मुझे कुछ हुआ तो परिवार को बताना…’

रविवार को यहूदी समुदाय के लोग हनुक्का (Hanukkah) उत्सव मना रहे थे, तभी दो आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। अहमद अपने चचेरे भाई जोजाय अलकंज के साथ वहां कॉफी पीने गए थे। गोलियों की आवाज सुनते ही लोग भागने लगे, लेकिन अहमद ने भागने के बजाय आतंकियों से लोहा लेने की ठानी।

जब उनके भाई ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो अहमद ने जो शब्द कहे, वे अब हर किसी की जुबां पर हैं। उन्होंने कहा, “अगर मुझे कुछ हुआ तो परिवार को बताना कि मैं लोगों की जान बचाते हुए गया”। इसके बाद वे कारों की आड़ लेते हुए सीधे आतंकी की ओर दौड़ पड़े।

निहत्थे छीनी राइफल, लेकिन आतंकी के बेटे ने मार दी गोली

अहमद ने गजब की फुर्ती दिखाते हुए 50 वर्षीय आतंकी साजिद अकरम को पीछे से दबोच लिया और उसे धक्का देकर गिरा दिया। उन्होंने आतंकी के हाथ से राइफल छीन ली, जिससे वह डरकर भागने लगा। अहमद को बंदूक चलानी नहीं आती थी, इसलिए उन्होंने फायर नहीं किया, बस आतंकी को डराया।

उन्होंने राइफल एक पेड़ के पास रखी ही थी कि तभी दूसरे आतंकी (साजिद के बेटे) नवीद अकरम ने उन पर हमला कर दिया। अहमद के बाएं कंधे और हाथ में गोलियां लगीं और वे वहीं गिर पड़े। डॉक्टरों के मुताबिक, उनके बाएं हाथ में करीब 5 गोलियां लगी हैं और एक गोली कंधे की हड्डी में फंसी है।

सीरिया से शरणार्थी बनकर आए, अब बने राष्ट्र नायक

अहमद मूल रूप से सीरिया के हैं और 2006 में गृहयुद्ध के कारण भागकर ऑस्ट्रेलिया आए थे। वे यहाँ एक तंबाकू की दुकान चलाते हैं और दो बेटियों के पिता हैं। 2022 में ही उन्हें ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता मिली थी।

अस्पताल में होश में आने के बाद अहमद ने कहा, “ईश्वर ने मुझे उस वक्त ऐसी शक्ति दी जो मैंने पहले कभी महसूस नहीं की थी। अगर दोबारा ऐसा हुआ, तो मैं फिर से लोगों को बचाऊंगा”

दुनिया कर रही सलाम, 3.43 करोड़ की मदद

अहमद की बहादुरी की गूंज अमेरिका तक सुनाई दी। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने उनकी जमकर तारीफ की है। वहीं, जनता ने अपने हीरो के लिए खजाना खोल दिया है। क्राउडफंडिंग के जरिए अहमद के लिए अब तक 3.43 करोड़ रुपये (570,000 डॉलर) जुटाए जा चुके हैं।

Photo Gallery : –

अहमद ने आतंकी साजिद अकरम की राइफल छीनने के बाद उसे धक्का मारकर दूर गिरा दिया।
अहमद को देख कर हमलावर साजिद डर गया और दूर भागने लगा।

अहमद को बंदूक चलानी नहीं आती थी, इसलिए वे आतंकी पर फायरिंग नहीं कर पाए।

तस्वीर अस्पताल में भर्ती अहमद अल अहमद की है।

आतंकी के बेटे नवीद अकरम ने अहमद पर हमला कर दिया। दो गोलियां अहमद के बाएं कंधे में लगीं।

अहमद के बाएं हाथ में करीब पांच गोलियां लगी हैं। इसके अलावा एक गोली बाएं कंधे के पीछे की हड्डी में फंसी हुई है।

बॉन्डी बीच के पास आतंकी साजिद और नवीद ने एक ब्रिज से हनुक्का त्योहार मना रहे लोगों पर अंधाधुंध फायरिंग की।

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By Thakur Pawan Singh

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