हेल्थ/सिटी डेस्क, Taj News | Updated: Wednesday, 21 Jan 2026 09:30 PM IST
आगरा: ताजनगरी आगरा के ऐतिहासिक सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (SNMC) ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया है। कॉलेज के 170 साल के इतिहास में पहली बार कार्डियोलॉजी विभाग ने बिना ‘ओपन हार्ट सर्जरी’ (Open Heart Surgery) के एक मरीज के दिल का छेद (Heart Hole) बंद करने में सफलता हासिल की है। इस जटिल प्रक्रिया को एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (ASD) डिवाइस क्लोज़र कहा जाता है। खास बात यह है कि इस सफल ऑपरेशन को मेडिकल कॉलेज की अपनी ही टीम ने बिना किसी बाहरी विशेषज्ञ की मदद के अंजाम दिया है।

क्या है यह उपलब्धि?
एसएन मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. हिमांशु यादव (Dr. Himanshu Yadav) और उनकी टीम ने यह कारनामा कर दिखाया है। अब तक सरकारी अस्पतालों में इस तरह की जटिल प्रक्रियाओं के लिए अक्सर दिल्ली या लखनऊ से विशेषज्ञों को बुलाना पड़ता था, लेकिन इस बार आगरा के ही डॉक्टरों ने अपनी दक्षता साबित कर दी।
डॉ. हिमांशु यादव ने बताया कि मेडिकल भाषा में इसे ‘ASD डिवाइस क्लोज़र’ कहते हैं। सरल शब्दों में समझें तो यह दिल के ऊपरी चैंबर्स के बीच मौजूद छेद को बंद करने की एक नॉन-सर्जिकल (Non-Surgical) प्रक्रिया है। इसमें मरीज का सीना चीरने की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि जांघ की नस के जरिए एक डिवाइस को दिल तक पहुंचाकर छेद को बंद कर दिया जाता है।
मरीज को मिला नया जीवन
जिस मरीज का इलाज किया गया, उसे लंबे समय से सांस फूलने और थकान की शिकायत थी। जांच में पता चला कि उसके दिल में छेद (ASD) है। आमतौर पर इसके लिए ओपन हार्ट सर्जरी की सलाह दी जाती है, जो काफी महंगी और जोखिम भरी होती है। साथ ही उसमें रिकवरी में महीनों लग जाते हैं। लेकिन डॉ. हिमांशु की टीम ने आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए डिवाइस क्लोज़र विधि अपनाई। डॉक्टरों के मुताबिक, ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है और उसकी स्थिति संतोषजनक है। उसे जल्द ही अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।
प्राचार्य बोले- यह ‘आत्मनिर्भर SNMC’ की मिसाल
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता (Dr. Prashant Gupta) ने पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा, “एसएनएमसी की उन्नत चिकित्सकीय क्षमता और हमारी टीम के समर्पण का ही नतीजा है कि आज हम जटिल से जटिल इलाज अपने ही संसाधनों से कर पा रहे हैं। इससे आगरा और आसपास के जिलों (मथुरा, फिरोजाबाद, एटा) के मरीजों को अब महंगे निजी अस्पतालों या दिल्ली-लखनऊ के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।”
क्यों खास है यह तकनीक?
- बिना चीर-फाड़: इसमें छाती पर कोई बड़ा निशान नहीं आता।
- कम खर्च: निजी अस्पतालों में इस प्रक्रिया का खर्च लाखों में आता है, जबकि सरकारी कॉलेज में यह बहुत कम खर्च में या आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त हो जाता है।
- जल्दी रिकवरी: ओपन हार्ट सर्जरी के मुकाबले इसमें मरीज 2-3 दिन में अपने काम पर लौट सकता है।
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