Thursday, 15 January 2026, 11:20:00 AM. Agra, Uttar Pradesh
आगरा। Rashtriya Swayamsevak Sangh के ब्रज प्रांत के पुनर्निर्मित प्रांत कार्यालय ‘माधव भवन’ का भव्य लोकार्पण समारोह गुरुवार को गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि संघ पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रश्नचिह्न खड़े किए जाते हैं, जिनका उत्तर भावनाओं से नहीं बल्कि बौद्धिक स्तर पर दिया जाना चाहिए।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि पुनर्निर्मित माधव भवन में ऐसे अध्ययनशील कार्यकर्ताओं की व्यवस्था होगी, जो समाज के सामने प्रभावी बौद्धिक उत्तर प्रस्तुत कर सकें। उन्होंने कहा कि चिंतन और वैचारिक सामर्थ्य सनातन परंपरा की शक्ति है और उसी के आधार पर विधर्मियों के दुष्प्रचार का करारा उत्तर दिया जा सकता है।

युगानुकूल विस्तार की आवश्यकता
इस अवसर पर संघ के सह सरकार्यवाह Krishna Gopal ने कहा कि समय के साथ किसी भी संगठन को युगानुकूल आगे बढ़ना पड़ता है। उन्होंने बताया कि जब वर्ष 1977 में पुराने माधव भवन की शुरुआत हुई थी, तब देशभर में संघ की लगभग 8 हजार शाखाएं थीं, जो वर्तमान में बढ़कर 90 हजार से अधिक हो चुकी हैं। कार्यविस्तार और गुणवत्ता को सुदृढ़ करने के लिए बड़े भवन और व्यापक योजना की आवश्यकता थी, इसी उद्देश्य से माधव भवन का पुनर्निर्माण किया गया है।
सेवा, संस्कार और समाज के लिए केंद्र
उन्होंने कहा कि इस भवन से संघ की विभिन्न गतिविधियां, सेवाकार्य, संस्कार, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े केंद्र संचालित किए जाएंगे। यह समाज के प्रति संघ की प्राथमिक जिम्मेदारी के साथ-साथ भविष्य की दिशा भी तय करेगा।

आगरा के गौरवशाली इतिहास का स्मरण
कार्यक्रम में आगरा से जुड़े हिंदू समाज के महापुरुषों के बलिदानों को स्मरण कराते हुए वक्ताओं ने कहा कि आगरा की भूमि से छत्रपति शिवाजी महाराज का औरंगजेब की कैद से मुक्त होना हिंदू इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। इसी तरह फुब्बारा कोतवाली पर गोकुला जाट का बलिदान और फतेहपुर सीकरी में राणा सांगा द्वारा हिंदू धर्म की रक्षा के लिए दिया गया बलिदान भी स्मरणीय है।
इतिहास को समाज के सामने लाने की आवश्यकता
वक्ताओं ने चिंता व्यक्त की कि आगरा और ब्रज क्षेत्र का समाज अपने गौरवशाली इतिहास को भूलता जा रहा है। वृंदावन, गोकुल और गोवर्धन के भक्ति आंदोलन से जुड़े संतों और सनातनियों द्वारा दिए गए बलिदानों को प्रभावी ढंग से समाज के सामने लाने की आवश्यकता है। उन्होंने आशा जताई कि माधव भवन में स्वाध्याय और शोध की ऐसी व्यवस्था बनेगी, जो ऐतिहासिक दस्तावेजों को संरक्षित कर समाज के सामने प्रस्तुत करेगी।
स्मारक और संग्रहालय बनाने का सुझाव
कार्यक्रम में सुझाव दिया गया कि छत्रपति शिवाजी महाराज, गोकुला जाट और राणा सांगा से जुड़े बलिदान स्थलों पर स्मारक और संग्रहालयों का निर्माण किया जाना चाहिए, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक ताजमहल के साथ-साथ भारत के गौरवशाली इतिहास से भी परिचित हो सकें।

बड़ी संख्या में गणमान्य लोग रहे उपस्थित
समारोह में अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल, अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. दिनेश, अखिल भारतीय गौ संयोजक अजीत महापात्रा, अखिल भारतीय शारीरिक प्रमुख जगदीश प्रसाद सहित संघ, भाजपा और विभिन्न सामाजिक संगठनों के वरिष्ठ पदाधिकारी, मंत्री, सांसद, विधायक, स्वयंसेवक और शहर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन विजय गोयल ने दिया। वंदे मातरम् के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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