
Sunday, 04 January 2026, 11:21:00 AM. Agra, Uttar Pradesh
आगरा। अछनेरा थाना क्षेत्र के दक्षिणी बाईपास स्थित रायभा टोल प्लाजा पर शनिवार शाम टोल कर्मियों की कथित दबंगई का गंभीर मामला सामने आया है। मथुरा दर्शन कर लौट रहे मध्य प्रदेश के एक परिवार की कार का शीशा तोड़ने, विरोध करने पर महिलाओं से अभद्रता करने और बाद में पुलिस द्वारा निष्पक्ष कार्रवाई न करने के आरोपों ने पूरे घटनाक्रम को और संवेदनशील बना दिया है।
घटना के बाद पीड़ित परिवार भय और आक्रोश की स्थिति में है। उनका कहना है कि टोल प्लाजा जैसे सार्वजनिक स्थान पर इस तरह की गुंडागर्दी और उसके बाद पुलिस की कथित निष्क्रियता आम नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है।

मथुरा दर्शन से लौटते समय शुरू हुआ विवाद
पीड़ित गजेंद्र सिंह भदौरिया और रिंकी साहू, निवासी ग्वालियर (मध्य प्रदेश), ने बताया कि शनिवार शाम करीब चार बजे वे मथुरा-गोवर्धन परिक्रमा के बाद परिवार के साथ कार से लौट रहे थे। रायभा टोल प्लाजा पर आगे खड़ी गाड़ी निकलने के बाद उन्होंने कुछ सेकंड के लिए अपनी कार रोकी।
पीड़ितों के अनुसार, इसके बाद टोल बैरियर स्वतः ऊपर उठ गया। बैरियर खुला देखकर उन्होंने वाहन आगे बढ़ा दिया। इसी बात को लेकर पीछे मौजूद टोल कर्मियों से विवाद शुरू हो गया।
टोल कर्मी ने कड़े से तोड़ा कार का शीशा
परिवार का आरोप है कि जैसे ही कार आगे बढ़ी, पीछे से आए एक टोल कर्मी ने हाथ में पहने कड़े से कार पर जोरदार प्रहार कर दिया। हमले में कार का शीशा चकनाचूर हो गया। अचानक हुए इस हमले से कार में बैठी महिलाएं और बच्चे बुरी तरह डर गए।
पीड़ितों का कहना है कि शीशा टूटते ही परिवार में अफरा-तफरी मच गई और कुछ देर के लिए किसी को समझ ही नहीं आया कि क्या हो रहा है।
विरोध करने पर गाली-गलौज और महिलाओं से अभद्रता
जब पीड़ित परिवार ने कार रोककर टोल कर्मियों से जवाब मांगा, तो कई कर्मचारी एकत्र हो गए। आरोप है कि उन्होंने टोल न कटने का आरोप लगाते हुए गाली-गलौज शुरू कर दी।
पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने बार-बार समझाने की कोशिश की कि बैरियर खुलने के बाद ही गाड़ी आगे बढ़ाई गई थी, लेकिन टोल कर्मियों ने उनकी एक नहीं सुनी। आरोप है कि इसी दौरान महिलाओं के साथ भी अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।
पुलिस पर निष्क्रियता और पक्षपात के आरोप
घटना की सूचना पर कुकथला चौकी पुलिस मौके पर पहुंची। पीड़ितों का आरोप है कि उन्होंने पुलिस से टोल प्लाजा पर लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच कराने की मांग की, ताकि सच्चाई सामने आ सके, लेकिन पुलिस ने कैमरे चेक कराने से साफ इनकार कर दिया।
परिवार का कहना है कि चौकी क्षेत्र के एक दरोगा ने यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि सीसीटीवी फुटेज की जांच उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आती। पीड़ितों का आरोप है कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेने के बजाय टोल कर्मियों का पक्ष लिया।
“जब पुलिस ही नहीं सुनती, तो न्याय कहां मिलेगा?”
पीड़ित परिवार का कहना है कि घटना के बाद वे लगातार न्याय की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन जब पुलिस ही साक्ष्य देखने से मना कर दे, तो आम नागरिक किससे उम्मीद करे।
परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास किया और टोल कर्मियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
पुलिस आयुक्त से शिकायत की तैयारी
पीड़ित परिवार ने बताया कि वे सोमवार को आगरा पहुंचकर पुलिस आयुक्त दीपक कुमार से मुलाकात करेंगे और पूरे मामले की लिखित शिकायत सौंपेंगे। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो वे उच्च अधिकारियों और मानवाधिकार आयोग तक भी अपनी बात पहुंचाएंगे।
घटना ने एक बार फिर टोल प्लाजा पर तैनात कर्मियों के व्यवहार और पुलिस की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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