🕰️ Friday, 05 December 2025 | दोपहर 01:45 PM IST | नई दिल्ली, भारत।
✍️ रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिवसीय भारत दौरे पर हैं और इस दौरान वह 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ उनकी बैठकें दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और गहराई देने का अवसर बनेंगी। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक भू-राजनीति में बड़े बदलाव देखे जा रहे हैं और भारत-रूस संबंधों की अहमियत पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।

🌍 वैश्विक परिप्रेक्ष्य और पुतिन की यात्रा का महत्व
यूक्रेन युद्ध ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को गहराई से प्रभावित किया है। अमेरिका और यूरोप ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे रूस को एशिया की ओर झुकना पड़ा है। भारत, जो पारंपरिक रूप से रूस का मित्र रहा है, इस समय रूस के लिए एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभर रहा है।
भारत ने यूक्रेन युद्ध पर संतुलित रुख अपनाया है। उसने रूस की आलोचना करने से परहेज़ किया और पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद रूस से ऊर्जा और रक्षा सहयोग जारी रखा। यही कारण है कि पुतिन की यात्रा को दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग का प्रतीक माना जा रहा है।
🛡️ रक्षा सहयोग: S-400 और Su-57 पर चर्चा
भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग दशकों पुराना है।
- S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली भारत की वायु रक्षा का केंद्रबिंदु है।
- Su-57 स्टील्थ जंगी जेट पर भी बातचीत चल रही है। यदि यह सौदा होता है तो भारत एशिया में उन चुनिंदा देशों में शामिल होगा जिनके पास अत्याधुनिक स्टील्थ तकनीक होगी।
- परमाणु पनडुब्बी और अन्य रक्षा उपकरणों की खरीद पर भी चर्चा हो सकती है।
रूस ने हाल ही में भारत के साथ सैन्य रसद समझौते (RELOS) को मंजूरी दी है। इसके तहत दोनों देश एक-दूसरे की भूमि, जहाज और विमानों का उपयोग कर सकेंगे। इससे भारत को आर्कटिक क्षेत्र तक पहुँचने का अवसर मिलेगा।
💬 पुतिन का भारत समर्थन और मोदी की प्रशंसा
पुतिन ने इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में कहा कि “प्रधानमंत्री मोदी दबाव में आने वालों में से नहीं हैं।” यह बयान अमेरिका द्वारा भारत पर टैरिफ और अन्य दबावों की चर्चाओं के बीच आया है। पुतिन ने मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत ने दुनिया को दिखा दिया है कि वह स्वतंत्र और आत्मनिर्भर निर्णय लेने वाला देश है।
यह टिप्पणी भारत की विदेश नीति की स्वतंत्रता को रेखांकित करती है। भारत ने हमेशा अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर निर्णय लिए हैं, चाहे वह ऊर्जा सुरक्षा हो, रक्षा सहयोग हो या व्यापार।
📊 व्यापार संतुलन की चुनौती
भारत-रूस व्यापार वर्तमान में 70 बिलियन डॉलर का है।
- भारत रूस से 65 बिलियन डॉलर का आयात करता है।
- बदले में भारत केवल 5 बिलियन डॉलर का निर्यात करता है।
यह असंतुलन भारत के लिए चिंता का विषय है। दोनों देशों ने रुपया-रूबल निपटान तंत्र पर चर्चा की है ताकि डॉलर पर निर्भरता कम हो और व्यापार संतुलित हो सके।
🌾 उर्वरक और कृषि सहयोग
भारत अपने कृषि क्षेत्र के लिए रूसी उर्वरकों पर निर्भर है।
- 2025 की पहली छमाही में भारत ने रूस से 25 लाख टन उर्वरक आयात किया।
- यह भारत के कुल उर्वरक आयात का 33% है।
- रूस से मुख्य रूप से DAP और NPK उर्वरकों की आपूर्ति होती है।
यह सहयोग भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
⛽ ऊर्जा सहयोग: तेल और गैस
यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ा दिया है।
- नवंबर 2025 में भारत ने औसतन 1.27 मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल प्रतिदिन आयात किया।
- इनमें से अधिकांश शिपमेंट बिचौलियों के माध्यम से आए।
रूस भारत के लिए ऊर्जा का एक स्थायी स्रोत बन गया है।
🌐 सांस्कृतिक और शैक्षिक सहयोग
पुतिन की यात्रा केवल रक्षा और ऊर्जा तक सीमित नहीं है। दोनों देश स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, संस्कृति और मीडिया में भी सहयोग बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।
- रूस में भारतीय छात्रों की संख्या बढ़ रही है।
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान से दोनों देशों के लोगों के बीच संबंध मजबूत हो रहे हैं।
- मीडिया सहयोग से दोनों देशों की जनता को एक-दूसरे के दृष्टिकोण को समझने का अवसर मिलेगा।
🌍 भू-राजनीतिक संदर्भ और एशिया की ओर रूस का झुकाव
यूरोप और अमेरिका ने रूस से दूरी बना ली है। नाटो देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। ऐसे में रूस एशिया की ओर झुक रहा है।
- भारत और चीन रूस के लिए सबसे बड़े साझेदार बन रहे हैं।
- पुतिन ने कहा कि भारत और चीन के साथ संबंध आज की भू-राजनीति में और भी ज्यादा अहम हो गए हैं।
🔑 पुतिन की भारत यात्रा केवल एक औपचारिक दौरा नहीं है। यह भारत-रूस संबंधों की गहराई और मजबूती का प्रतीक है। रक्षा, ऊर्जा, कृषि और सांस्कृतिक सहयोग से दोनों देशों के बीच साझेदारी और भी मजबूत होगी।
भारत ने हमेशा अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर जोर दिया है और पुतिन की यात्रा इस नीति की सफलता को दर्शाती है। आने वाले समय में भारत-रूस संबंध वैश्विक राजनीति में एक नई मिसाल बन सकते हैं।
पुतिन के बॉडी डबल्स: हकीकत और फसाना
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✍️ संपादन: ठाकुर पवन सिंह
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