Swami Avimukteshwaranand Saraswati Shankaracharya Magh Mela Prayagraj controversy notice 2026

धर्म/अध्यात्म डेस्क, Taj News | Updated: Tuesday, 20 Jan 2026 08:00 PM IST

प्रयागराज: संगम नगरी प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान धर्म और प्रशासन के बीच टकराव अब चरम पर पहुँच गया है। अपना रथ रोके जाने के विरोध में पिछले तीन दिनों से धरने पर बैठे ज्योतिषपीठ के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर माघ मेला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रशासन ने उन्हें 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए यह प्रमाणित करने को कहा है कि वे वास्तव में ‘शंकराचार्य’ हैं। इस नोटिस ने संतों के बीच हलचल तेज कर दी है।

Swami Avimukteshwaranand Saraswati Shankaracharya Magh Mela Prayagraj controversy notice 2026
HIGHLIGHTS
  1. माघ मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को जारी किया कड़ा नोटिस।
  2. सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर शंकराचार्य पद के इस्तेमाल पर उठाए सवाल।
  3. नोटिस लेने से शिष्यों का इनकार, प्रशासन ने शिविर के गेट पर चस्पा किया आदेश।
  4. स्वामी का पलटवार: ‘प्रशासन तय नहीं कर सकता कौन है शंकराचार्य, फुटपाथ पर सोएंगे’।

आधी रात को पहुंचा प्रशासन, गेट पर चस्पा किया नोटिस

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार आधी रात को एक राजस्व अधिकारी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में नोटिस लेकर पहुंचे थे, लेकिन शिष्यों ने इसे लेने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद मंगलवार सुबह अधिकारियों ने शिविर के मुख्य द्वार पर नोटिस चस्पा कर दिया। यह कार्रवाई माघ मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के आदेश पर की गई है। प्रशासन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2022 को आदेश दिया था कि अंतिम फैसला आने तक ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य पद पर किसी को भी नियुक्त या घोषित नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का आरोप

मेला प्रशासन द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने शिविर के बोर्ड और प्रचार सामग्री में खुद को ‘ज्योतिषपीठ शंकराचार्य’ (Jyotishpeeth Shankaracharya) लिखा है। प्रशासन ने इसे कोर्ट के आदेशों की अवहेलना मानते हुए पूछा है कि वे किस अधिकार से इस पदवी का उपयोग कर रहे हैं।

‘माफी मांगे प्रशासन, वरना फुटपाथ पर सोऊंगा’

दूसरी ओर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन की इस कार्रवाई को खारिज कर दिया है। उन्होंने तीखे तेवर दिखाते हुए कहा, “शंकराचार्य कौन है, यह तय करने का अधिकार प्रशासन या राष्ट्रपति के पास भी नहीं है। मुझे अन्य पीठों की मान्यता प्राप्त है।” रथ रोके जाने से नाराज स्वामी ने ऐलान किया है कि जब तक प्रशासन सार्वजनिक माफी नहीं मांगता, वे शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे और कड़ाके की ठंड में फुटपाथ पर ही सोएंगे।

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✍️ संपादन: ठाकुर पवन सिंह
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By Thakur Pawan Singh

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