Rajendra Sharma political satire article on PM Modi Israel visit

मोदी जी का मास्टर स्ट्रोक ही मास्टर स्ट्रोक!

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Edited by: Thakur Pawan Singh | tajnews.in | 02 Mar 2026, 01:16 pm IST

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Taj News Opinion Desk

विशेष संपादकीय लेख

Rajendra Sharma Writer

राजेंद्र शर्मा

वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक, ‘लोकलहर’

वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र शर्मा ने अपने इस तीखे राजनैतिक व्यंग्य में प्रधानमंत्री के हालिया इज़रायल दौरे, ईरान पर हुए हमले की टाइमिंग और वहाँ मिले ‘विशेष सम्मान’ पर करारा प्रहार किया है। पढ़िए ‘मास्टर स्ट्रोक’ की राजनीति का यह बेबाक विश्लेषण:

अब बोलें क्या कहते हैं, मोदी जी के मास्टर स्ट्रोक का मास्टर होने पर सवाल उठाने वाले। कम से कम मोदी जी के इज़रायल दौरे और ईरान पर इज़रायल के हमले की क्रोनोलॉजी सामने आने के बाद तो ऐसे सवाल उठाने वालों के मुंह बंद ही हो जाने चाहिए। आखिरकार, ऐसी कमाल की टाइमिंग किसी नेहरू, किसी इंदिरा की थी क्या? सिर्फ दो दिन का दौरा — 25 की सुबह रवानगी और 26 की शाम वापसी। और 28 की सुबह, ईरान पर इज़रायल का हमला चालू, बल्कि हमला भी कहां, महज ‘निवारक प्रहार’।

यानी लड़ाई की सारी तनातनी के बीचो-बीच, मोदी जी इज़रायल पहुंच भी गए, अपने पक्के दोस्त बीबी उर्फ नेतन्याहू से झप्पी-पप्पी भी कर ली, इज़रायल की संसद को सदा साथ देने का भरोसा भी दे दिया। और इससे पहले कि इज़रायल अपना हमला शुरू करता, लौटकर सुरक्षित घर भी आ गए। बल्कि जब ईरान पर इज़रायल का हमला शुरू हुआ, तब तक तो मोदी जी अजमेर में कई सरकारी उद्घाटनों के साथ, अपने एआई ईवेंट का मजा किरकिरा करने वाले नौजवानों के बहाने, विरोधियों पर एक बार फिर हमला भी कर चुके थे। अगर तेल अवीव में मोदी जी का ‘‘डीयर फ्रेंड’’ अपने हमले में ईरान के तबाह हो जाने के दावे कर रहा था, तो अजमेर में नेतन्याहू का ‘‘ब्रदर’’ विपक्षी प्रदर्शनकारियों पर हमला करने वालों की पीठ ठोक रहा था। मोदी जी ने ऐन मौके पर पहुंच कर नेतन्याहू के कान में जो शांति का मंत्र दिया था, वह युद्ध के मैदान में बखूबी काम कर रहा था — मंत्र पाने वाले पर ही नहीं, मंत्र देने वाले पर भी! घर में घुसकर मारने का शांति मंत्र है ही ऐसा!

लेकिन, यह विरोधियों का झूठा प्रचार है कि मोदी जी, ईरान पर हमले के लिए ‘‘डीयर फ्रेंड’’ को अपना समर्थन देने के लिए ही दौड़े-दौड़े इज़रायल गए थे। सोचने की बात है, समर्थन देने के लिए मोदी जी को निजी हवाई जहाज लेकर, दौड़े-दौड़े तेल अवीव जाने की क्या जरूरत थी? डियर फ्रेंड चाहे वाशिंगटन में बैठता हो या तेल अवीव में, डीयर फ्रेंडों के लिए मोदी जी का समर्थन हमेशा ही बना रहा है। मोदी जी को कम से कम बार-बार मिलकर, अपने समर्थन का भरोसा दिलाने की जरूरत तो नहीं ही पड़ती है। फिर नेतन्याहू के ‘‘जो ठीक समझे करने’’ के लिए मोदी जी का समर्थन पिछले दो-ढाई साल से यानी हमास के सफाए के नाम पर फिलिस्तीनियों के सफाए की डियर फ्रेंड की मुहिम की शुरुआत से ही बना हुआ है।

और रही ईरान पर हमले की बात, तो पिछले साल भी तो इज़रायल ने ईरान पर हमला किया था, जिसके पीछे-पीछे अमेरिका ने भी हमला किया था। तब क्या मोदी जी ने इज़रायल को हमला करने से मना किया था? तब तो हमले से पहले मोदी जी को दौड़े-दौड़े इज़रायल जाने की जरूरत नहीं पड़ी थी। साफ है कि यह इल्जाम झूठा है कि हमले से ठीक पहले इज़रायल को समर्थन देने के लिए ही मोदी जी दौड़े-दौड़े तेल अवीव गए थे।

जाहिर है कि मोदी जी पर ऐसे इल्जाम लगाने वाले यह दिखाना चाहते हैं कि मोदी जी के दौरे से जो भी मिला है, इज़रायल को ही मिला है ; भारत को कुछ नहीं मिला है। सच पूछिए तो यह एक फैशन सा ही हो गया है, बल्कि यह भी एक अंतर्राष्ट्रीय षडयंत्री टूल किट का हिस्सा है कि मोदी जी जब भी किसी डियर फ्रेंड से मिलने जाते हैं, सोशल मीडिया में उनके गले पड़ने और खी-खी-खी करने के वीडियो चलाए जाते हैं और विरोधी सुर में सुर मिलाकर पूछने लगते हैं — इस दौरे से भारत को क्या मिला? इसीलिए तो मोदी जी जहां भी जाते हैं, जाने से पहले कोई न कोई सम्मान पाने का जुगाड़ जरूर बैठाकर जाते हैं। मोदी जी के सम्मान के बाद, विरोधियों के मुंह अगर बंद नहीं भी हो जाएं, तब भी कमচেতন से कम वे यह नहीं कह पाते हैं कि भारत को क्या मिला? सम्मान! सम्मान से बढ़कर, कोई विश्व गुरु को और दे भी क्या सकता है?

इस बार इज़रायल की यात्रा में तो मोदी जी ने कमाल ही कर दिया। यह तो मास्टर स्ट्रोक का भी मास्टर स्ट्रोक हो गया। मोदी जी सिर्फ सम्मान ही नहीं लेकर आए, वह एकदम नया-निकोरा सम्मान लेकर आए हैं। मोदी जी एक ऐसा सम्मान लेकर आए हैं, जो न उनसे पहले किसी को मिला है और न उनके बाद ही किसी को मिलने की संभावना है। मोदी जी विश्व में इस सम्मान को पाने वाले अकेले हैं और बीबी से दोस्ती बनी रहे, मोदी जी विश्व में इस सम्मान को पाने वाले अकेले ही बने रहेंगे। विरोधी जलते हैं, जो यह प्रचार कर रहे हैं कि इस डीयर फ्रेंड ने भी मोदी जी को सस्ते में निपटा दिया, बल्कि एक तरह से ठग ही लिया। पुरस्कृत करने का लालच देकर, लड़ाई छेड़ने से ठीक पहले बुला लिया, अपना समर्थन भी करा लिया और पुरस्कार के नाम पर, इज़रायल का सर्वोच्च सम्मान देने के बजाए, एक झूठा मैडल थमा दिया। पर सच पूछिए तो झूठा तो वह मैडल होता है, जो पहले किसी और को दिया गया हो, जिस पर पहले किसी और के हाथ लगे हों। नया-निकोरा मैडल, झूठा हो ही कैसे सकता है? बल्कि हम तो कहते हैं कि जो सम्मान पहले किसी को दिया जा चुका हो, उसे सर्वोच्च कहना ही गलत है? वहां तो बराबर में दूसरे लोग, पहले से बैठे हुए हैं। सम्मान तो नया निकोरा ही सर्वोच्च हो सकता है, वह भी तब, जब इसकी गारंटी हो कि आगे किसी को दिया भी नहीं जाएगा。

फिर मोदी जी इज़रायल से सिर्फ पुरस्कार थोड़े ही लेकर आए हैं? इज़रायली संसद का पुरस्कार याद रहा, पर संसद में मोदी जी का भाषण कैसे भूल गए — इज़रायल फादरलैंड एंड इंडिया मदरलैंड वाला भाषण। बेशक, भाषण दिया जाता है, पर उसमें बजी तालियां तो मोदी जी देश तक लेकर आए ही हैं। और पूर्व-सांसदों की मोदी-मोदी भी! माना कि विपक्ष का बहिर्गमन भी साथ आया है, पर एक नेहरू पछाड़ रिकार्ड भी तो मोदी ने अपने नाम करा लिया है बल्कि अपने से पहले के सभी प्रधानमंत्रियों को पछाड़ने वाला रिकार्ड। मोदी जी भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं, जिसने इज़रायल की संसद को संबोधित किया है और वह भी मोदी-मोदी कराने के साथ। सच पूछिए, तो यह तो विश्व रिकॉर्ड ही हो गया। ट्रंप के संबोधन के टैम पर भी ट्रंप-ट्रंप थोड़े ही हुआ था! वैसे लाने को तो मोदी जी पेगासस टाइप और भी कुछ न कुछ अपनी गुप्त जेब में डालकर लाए होंगे, पर राष्ट्र की और अपनी भी सुरक्षा की खातिर उसकी चर्चा हम नहीं करें, तो ही बेहतर है。

विश्व रिकॉर्ड बनाकर, एक नया पुरस्कार गढ़वा कर, अपनी शॉपिंग लिस्ट पहुंचाकर, लड़ाई छिड़ने से ऐन पहले मोदी जी सुरक्षित लौट आए, देश को यह हकीकत बताने कि उनके एआई इवेंट में उनके भक्तों ने विरोध प्रदर्शन करने वालों पर जूते भी चलाए थे! यह मास्टर स्ट्रोक नहीं, तो और क्या है!?

Thakur Pawan Singh

Thakur Pawan Singh

Chief Editor, Taj News

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