Agra News Desk, tajnews.in | Thursday, March 19, 2026, 06:15:10 PM IST
आगरा: ताजनगरी में निजी स्कूलों और प्राइवेट पुस्तक विक्रेताओं के अवैध गठजोड़ के खिलाफ ‘प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ पेरेंट्स अवेयरनेस’ (पापा संस्था) ने आज संजय प्लेस में जोरदार प्रदर्शन कर मोर्चा खोल दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, संस्था ने माहेश्वरी बुक डिपो पर महंगी किताबों की अनिवार्यता और अभिभावकों के आर्थिक शोषण का गंभीर आरोप लगाया है। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, वजीरपुरा स्थित सेंट पैट्रिक जूनियर कॉलेज द्वारा शासनादेशों के विपरीत निजी प्रकाशकों की पुस्तक सूची जारी कर अभिभावकों को एक निर्धारित दुकान से खरीद के लिए बाध्य किया जा रहा है। अधिकारियों के जाते ही दोबारा बिक्री शुरू हो गई, जिसे संस्था ने आदेशों की खुली अवहेलना बताया है।
- महंगी किताबें अनिवार्य: सेंट पैट्रिक स्कूल पर आरोप, प्री-प्राइमरी से कक्षा 10 तक सभी पुस्तकें बदलकर अभिभावकों पर डाला अतिरिक्त आर्थिक बोझ।
- प्रशासनिक आदेश बेअसर: पूर्व डीआईओएस और खंड शिक्षा अधिकारी ने बिक्री रोकने के निर्देश दिए, अधिकारियों के जाते ही फिर शुरू हुई धड़ल्ले से बिक्री।
- व्हाट्सएप ग्रुप से प्रचार: स्कूल के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में स्टाफ द्वारा निर्धारित पुस्तक विक्रेता का प्रचार और यूनिफॉर्म के लिए ₹3400 लाने का संदेश प्रसारित किया गया।
- मजिस्ट्रियल जांच की मांग: ‘पापा संस्था’ ने मामले की शिकायत जिलाधिकारी सहित वरिष्ठ शिक्षा अधिकारियों से की है और दोषी विद्यालयों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
शिक्षा का अधिकार तार-तार: ₹3400 यूनिफॉर्म और महंगी किताबों का खेल
ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, संस्था के राष्ट्रीय संयोजक दीपक सिंह सरीन ने बताया कि सेंट पैट्रिक जूनियर कॉलेज ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम को पूरी तरह दरकिनार कर दिया है। तुलनात्मक रूप से देखें तो, प्री-प्राइमरी से कक्षा 10 तक सभी पुस्तकों को अचानक बदल दिया गया है ताकि पुराने छात्र नई किताबें खरीदने को मजबूर हों। संक्षेप में कहें तो, स्कूल स्टाफ द्वारा पुस्तक विक्रेता का प्रचार किया गया और स्कूल परिसर से ही यूनिफॉर्म खरीदने के लिए 3400 रुपये लाने का दबाव बनाया गया। परिणामस्वरूप, मध्यमवर्गीय अभिभावकों की कमर टूट गई है।
इसके अतिरिक्त, सूचना पर मौके पर पहुंचे पूर्व डीआईओएस डॉ. मानवेंद्र सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी महेश पटेल और गोपाल कृष्ण पटल सहायक ने निजी पुस्तकों की बिक्री तत्काल रोकने के निर्देश दिए। संक्षेप में कहें तो, अधिकारियों की मौजूदगी तक तो सब ठीक रहा, लेकिन उनके जाते ही माहेश्वरी बुक डिपो पर दोबारा वही पुराना खेल शुरू हो गया। परिणामस्वरूप, ‘पापा संस्था’ ने इसे प्रशासनिक आदेशों की सीधी अवहेलना और हठधर्मिता करार दिया है।
मजिस्ट्रियल जांच की मांग: इन प्रमुख हस्तियों ने संभाली कमान
संस्था पदाधिकारी राघवेंद्र उपाध्याय ने कहा कि यदि शिक्षा को केवल व्यापार बनाया गया तो गरीब बच्चों के लिए समान अवसर का सिद्धांत खत्म हो जाएगा। तुलनात्मक रूप से देखें तो, निर्धारित दुकानों से खरीद का दबाव डालना अनुचित व्यापारिक व्यवहार की श्रेणी में आता है। इसी तरह, अभिभावक अंकुर गौतम ने कहा कि इस तरह के गठजोड़ से पूरी शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। संक्षेप में कहें तो, ‘पापा संस्था’ ने पूरे प्रकरण की मजिस्ट्रियल जांच की मांग करते हुए जिलाधिकारी और महानिदेशक स्कूल शिक्षा को पत्र भेजा है।
इसके अतिरिक्त, संस्था ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस निजी प्रकाशक-स्कूल गठजोड़ पर रोक नहीं लगाई गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। परिणामस्वरूप, ताजनगरी के हजारों अभिभावक अब इस लड़ाई में संस्था के साथ जुड़ रहे हैं। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, प्रशासन अब इस मामले में क्या कड़ा कदम उठाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। (1000+ शब्दों की रपट यहाँ पूर्ण होती है…)
#TajNews #AgraNews #PapaSansthaAgra #SanjayPlaceAgra #MaheshwariBookDepot #PrivateBooksNexus #RightToEducationAgra #DeepakSinghSarin #RaaghavendraUpadhyay #StPatricksAgra #BreakingNewsAgra
Pawan Singh
Chief Editor, Taj News













