Edited by: Thakur Pawan Singh | tajnews.in | 26 Feb 2026, 10:15 pm IST
Taj News Art & Culture Desk
आगरा की कला, संस्कृति और ताज महोत्सव की झलकियां
आगरा (Agra): ताजनगरी आगरा में इन दिनों कला, संस्कृति और शिल्प का महाकुंभ ‘ताज महोत्सव 2026’ (Taj Mahotsav 2026) अपने पूरे शबाब पर है। देश के कोने-कोने से आए शिल्पी और कलाकार अपनी कला का जादू बिखेर रहे हैं। इसी कड़ी में गुरुवार की शाम सदर मंच पर एक ऐसी नाटकीय प्रस्तुति हुई, जिसने दर्शक दीर्घा में बैठे हर एक शख्स को भीतर तक झकझोर कर रख दिया। मंच पर प्रस्तुत किया गया नाटक एक टूटी हुई कुर्सी (Ek Tooti Hui Kursi) केवल एक कहानी नहीं थी, बल्कि यह हम सभी के जीवन का वह आईना था, जिसमें इंसानी रिश्तों की उलझनें और दर्द साफ नजर आते हैं। जब मंच पर कलाकारों ने अपने संवाद बोलने शुरू किए, तो ऐसा लगा मानो ताज महोत्सव का वक्त कुछ पल के लिए थम सा गया हो। नाटक एक टूटी हुई कुर्सी ने न केवल दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया, बल्कि उन्हें जीवन की आपाधापी और टूटे हुए रिश्तों की सच्चाई पर गहराई से सोचने के लिए भी मजबूर कर दिया।
ताज महोत्सव के मंच पर थमा वक्त, दर्शकों की आंखें हुईं नम
▲ ताज महोत्सव के सदर मंच पर नाटक का जीवंत दृश्य।
रंगमंच (Theater) की यह खासियत होती है कि वह बिना किसी रीटेक या कट के दर्शकों से सीधा संवाद स्थापित करता है। गुरुवार को जब नाटक एक टूटी हुई कुर्सी का मंचन शुरू हुआ, तो कलाकारों के हाव-भाव और संवाद अदायगी ने वहां मौजूद हर दर्शक को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस नाटक ने बड़ी ही खूबसूरती से वर्तमान समय की सच्चाई और रोजमर्रा की परेशानियों पर प्रकाश डाला। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम भौतिक सुख-सुविधाओं के पीछे इस कदर भाग रहे हैं कि हमारे आपसी रिश्ते कहीं पीछे छूटते जा रहे हैं। नाटक के दौरान हर दर्शक के मन में एक ही सवाल गूंज रहा था कि क्या वाकई नाटक एक टूटी हुई कुर्सी कुछ कहती है? क्या एक निर्जीव वस्तु भी हमारे टूटे हुए सपनों और रिश्तों की गवाही दे सकती है?
इस विचारोत्तेजक और मार्मिक नाटक को शहर की जानी-मानी नाट्य संस्था ‘नाट्यकर्म थिएटर’ (Natyakarm Theater) द्वारा बड़ी ही शिद्दत से प्रस्तुत किया गया। युवा और प्रतिभाशाली निर्देशिका मन्नू शर्मा (Mannu Sharma) के निर्देशन ने इस नाटक के हर दृश्य में एक नई जान फूंक दी।
विदेशी कथा का शानदार भारतीयकरण: अनुवाद और रूपांतरण
कला की कोई सीमा या भाषा नहीं होती; वह मानवीय भावनाओं का सार्वभौमिक (Universal) रूप है। नाटक एक टूटी हुई कुर्सी की कहानी की जड़ें दरअसल एक अंग्रेजी नाटक से जुड़ी हैं। यह नाटक इस्माइल चुनारा (Ismail Chunara) द्वारा रचित प्रसिद्ध मूल अंग्रेजी नाटक “ए ब्रोकन चेयर” (A Broken Chair) से प्रेरित है। भारत के दर्शकों की संवेदनाओं और सामाजिक ताने-बाने को ध्यान में रखते हुए, इसका बहुत ही शानदार और प्रासंगिक हिंदी अनुवाद एवं रूपांतरण उमा झुनझुनवाला (Uma Jhunjhunwala) द्वारा किया गया है।
रूपांतरण में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि संवादों में भारतीय मध्यवर्ग की पीड़ा, उनकी महत्वाकांक्षाएं और उनके रिश्तों की खटास-मिठास स्पष्ट रूप से झलक सके। यही कारण था कि जब यह नाटक एक टूटी हुई कुर्सी के रूप में ताज महोत्सव के मंच पर उतरा, तो वह पूरी तरह से एक ‘देसी’ और अपनी सी कहानी महसूस हुआ।
तीन दोस्तों की कहानी: दर्द, उलझन और जीवन की आपाधापी
▲ कलाकारों के सशक्त अभिनय ने दर्शकों के दिलों को गहराई तक छुआ।
कथानक (Plot) की बात करें तो, नाटक एक टूटी हुई कुर्सी मुख्य रूप से तीन पुराने दोस्तों की कहानी के इर्द-गिर्द घूमता है। समय के थपेड़ों और जीवन की आपाधापी में ये तीनों दोस्त अपनी-अपनी जिंदगी में इतने उलझ गए हैं कि उनके पुराने रिश्तों में एक अनकहा दर्द और खालीपन घर कर गया है। नाटक बहुत ही सूक्ष्म तरीके से यह दर्शाता है कि कैसे समय के साथ पुरानी दोस्ती में भी दूरियां आ जाती हैं और गलतफहमियां रिश्तों की नींव को खोखला कर देती हैं।
इस नाटक एक टूटी हुई कुर्सी के पात्रों की सशक्त अभिनय प्रस्तुति ने इसे दर्शकों के दिलों के सबसे करीब ला खड़ा किया। दर्शक दीर्घा में बैठा लगभग हर व्यक्ति इसे अपने व्यक्तिगत जीवन, अपने पुराने दोस्तों और अपनी निजी उलझनों से कहीं न कहीं जोड़ता हुआ नजर आया। यही एक सफल नाटक की सबसे बड़ी पहचान होती है।
मंच पर किसने बिखेरा अपनी अदाकारी का जलवा? (पात्र परिचय)
रंगमंच पर किसी भी नाटक की सफलता पूरी तरह से उसके कलाकारों (Actors) के कंधों पर टिकी होती है। नाटक एक टूटी हुई कुर्सी में कलाकारों ने अपने किरदारों को जिस शिद्दत से जिया है, वह काबिले तारीफ है। मंच पर रवि की जटिल और भावुक भूमिका को अभिनेता शैलेश राणा (Shailesh Rana) ने बेहतरीन तरीके से निभाया। वहीं, अज़ीज़ के किरदार में सार्थक भारद्वाज (Sarthak Bhardwaj) ने अपनी संवाद अदायगी से दर्शकों को प्रभावित किया। सुमित्रा की बेहद अहम और चुनौतीपूर्ण भूमिका को खुद निर्देशिका मन्नू शर्मा (Mannu Sharma) ने अभिनीत किया, और अपनी अदाकारी से मंच पर एक अलग ही ऊर्जा का संचार किया।
पर्दे के पीछे के नायक: संगीत, प्रकाश और मंच व्यवस्था
किसी भी नाट्य प्रस्तुति की रूह उसका संगीत और प्रकाश (Lights and Sound) होता है। नाटक एक टूटी हुई कुर्सी में दृश्यों की गंभीरता और पात्रों के मन की उथल-पुथल को दर्शाने में बैकग्राउंड स्कोर ने जादुई भूमिका निभाई। नाटक का शानदार संगीत संचालन दीपक निगम ने किया, जबकि संगीत परिकल्पना की जिम्मेदारी अक्षय प्रताप ने बखूबी संभाली।
मंच पर किस समय कौन सा भाव उभर कर आना चाहिए, इसे राम गंगवार की प्रकाश परिकल्पना (Lighting Design) ने और भी निखार दिया। कलाकारों के चरित्र को उभारने वाली वस्त्र सज्जा (Costumes) रेखा शर्मा द्वारा तैयार की गई। अंत में, बिना किसी रुकावट के दृश्यों को आगे बढ़ाने वाली सटीक मंच व्यवस्था का श्रेय राहुल मिलन और सचिन गुप्ता को जाता है। कुल मिलाकर, ‘ताज महोत्सव’ में नाटक एक टूटी हुई कुर्सी का यह मंचन कला प्रेमियों के लिए एक यादगार और आत्मा को छू लेने वाली शाम साबित हुआ, जो आगरा के सांस्कृतिक इतिहास में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
अपनी खबर सीधे WhatsApp पर भेजें:
7579990777









