क्राइम डेस्क, Taj News | Updated: Wednesday, 21 Jan 2026 08:00 PM IST
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में चल रहे धर्मांतरण सिंडिकेट (Conversion Syndicate) की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे बेहद चौंकाने वाले और घिनौने सच सामने आ रहे हैं। यूपी एटीएस (UP ATS) और पुलिस की जांच में मुख्य आरोपी डॉ. रमीज (Dr. Ramiz) के लैपटॉप और मोबाइल से ऐसे सबूत मिले हैं, जिन्होंने एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। फोरेंसिक जांच में रमीज के लैपटॉप में हिंदू लड़कियों के नाम से बने कई अलग-अलग फोल्डर्स मिले हैं, जिनमें उनकी निजी तस्वीरें और वीडियो सेव थे।

लैपटॉप में ‘शिकार’ का पूरा डेटाबेस?
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, डॉ. रमीज के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की डाटा रिकवरी के दौरान एक पैटर्न सामने आया है। उसके लैपटॉप में कई फोल्डर ऐसे मिले हैं, जिनके नाम हिंदू लड़कियों पर रखे गए थे। जब इन फोल्डर्स को खोला गया, तो उनमें संबंधित लड़कियों की तस्वीरें, वीडियो और पर्सनल चैट के स्क्रीनशॉट मिले। जांच एजेंसियों को शक है कि यह महज एक संयोग नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। आशंका जताई जा रही है कि रमीज इन लड़कियों को ‘लव जिहाद’ (Love Jihad) या ब्लैकमेलिंग के जरिए धर्मांतरण के जाल में फंसाने की फिराक में था।
वीडियो दिखाकर करता था ब्रेनवॉश
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि डॉ. रमीज न केवल मेडिकल स्टाफ बल्कि मरीजों और तीमारदारों को भी निशाना बनाता था। उसके मोबाइल में कट्टरपंथी इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक (Zakir Naik) के कई भड़काऊ वीडियो मिले हैं। आरोप है कि रमीज हिंदू छात्रों और कर्मचारियों को पहले दोस्ती के जाल में फंसाता था, फिर उन्हें हिंदू धर्म के खिलाफ भड़काता था। वह दावा करता था कि “इस्लाम ही एकमात्र सच्चा धर्म है” और बीमारियों से बचने के लिए “अल्लाह की शरण” में आने का दबाव बनाता था। लैपटॉप में मिले वीडियो का इस्तेमाल वह ब्रेनवॉश करने के लिए करता था।
ब्लैकमेलिंग का एंगल आया सामने
लैपटॉप में लड़कियों की तस्वीरें मिलने से ‘हनी ट्रैप’ और ब्लैकमेलिंग का एंगल भी मजबूत हो गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि:
- क्या ये तस्वीरें उन लड़कियों की सहमति से ली गई थीं या चोरी-छिपे?
- क्या इन तस्वीरों का इस्तेमाल उन्हें धर्मांतरण के लिए ब्लैकमेल करने में किया जा रहा था?
- इनमें से कितनी लड़कियां KGMU की छात्राएं या स्टाफ हैं?
नेटवर्क में और कौन-कौन?
डॉ. रमीज अकेला नहीं था। जांच में यह बात सामने आई है कि KGMU के अंदर एक पूरा गिरोह काम कर रहा था। रमीज के संपर्कों की जांच की जा रही है। उसके मोबाइल कॉल डिटेल्स (CDR) से कई संदिग्ध नंबर मिले हैं, जो धर्मांतरण से जुड़े बाहरी संगठनों के हो सकते हैं। एटीएस अब यह भी खंगाल रही है कि क्या इस सिंडिकेट को विदेशी फंडिंग मिल रही थी।
पीड़ितों की पहचान गुप्त रखकर पूछताछ
पुलिस ने लैपटॉप में मिले नामों के आधार पर कुछ लड़कियों की पहचान कर ली है। संवेदनशीलता को देखते हुए उनकी पहचान गुप्त रखी जा रही है। जल्द ही पुलिस इन लड़कियों से संपर्क कर उनके बयान दर्ज करेगी, ताकि यह साफ हो सके कि रमीज ने उनके साथ किस हद तक माइंड गेम खेला था।
KGMU प्रशासन ने भी इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। आरोपी डॉक्टर के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। वहीं, हिंदूवादी संगठनों ने अस्पताल के बाहर प्रदर्शन कर डॉ. रमीज और उसके साथियों पर रासुका (NSA) लगाने की मांग की है।
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